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सूर्योपासना का प्रमुख पर्व है मकर संक्रांति, सूर्यास्त तक स्नान का पुण्य काल रहेगा

पं. राजेन्द्र प्रसाद मिश्र
सूर्योपासना का प्रमुख पर्व है मकर संक्रांति आज के दिन भुवन भास्कर दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर गमन करते हैं यह पर्व अलग-अलग नामों से संपूर्ण भारत वर्ष में मनाया जाता है। यह सनातन धर्म का प्रमुख त्यौहार यह दक्षिण भारत में पोंगल,उत्तर भारत में खिचड़ी,असम में बिहू,पंजाब में हरियाणा में लोहड़ी नाम से मनाया जाता है। सूर्य भगवान 1 वर्ष में 12 बार अपनी राशि का परिवर्तन करते हैं। एक राशि से जब दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं उस समय का नाम संक्रांति से जाना जाता है। सूर्य जब धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करता है उसे मकर संक्रांति कहते हैं। सूर्य 6 माह उत्तरायण व 6 माह दक्षिणायन रहता है । मकर से कर्क राशि तक सूर्य उत्तरायण रहते तथा कर्क से धनु राशि तक कर्क से धनु राशि तक दक्षिणायन रहते हैं। इस संक्रांति काल में पवित्र नदियों स्थान दान जप पूजन पाठ हवन इत्यादि करना पुण्य का काम कहा जाता है। आज सूर्य की पूजा व अर्घ्य अवश्य देना चाहिये।

मकर संक्र ांति दान का पर्व भी कहलाता है। आज के दिन प्रत्येक सनातनी पवित्र नदियों में स्नान कर कुछ न कुछ दान अवश्य करता है। इस वर्ष प्रयागराज में कुंभ का पर्व आज से प्रवेश हो रहा है। आज साधु संतों अखाडों का पहला शाही स्नान होगा ऐसा अनुमान है कि लगभग 2 करोड लोग स्नान करेंगे और दान धर्म भी करेंगे। आज के दिन खिचडी का दान व भोजन अवश्य करना चाहिये इस प्रकार पूरे भारत वर्ष में यह पर्व बहुत ही धूमधाम हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है।
सिवनी में आज के दिन श्रृध्दालुजन बैनगंगा के उद्गम स्थल मुंडारा में स्नान दान करने जाते हैं और वहाँ पर बहुत बडा मेला लगता है इसी प्रकार बैनगंगा के लखनवाडा घाट,दिघौरी घाट,छपारा,मझगवां नदी के तट पर स्नानदान करते हैं और मेला लगता है।

इस वर्ष मकर संक्रांति माघ मास कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि मंगलवार पुष्य नक्षत्र में विषकुंभ योग,षालव करण सिवनी समय के अनुसार दोपहर 3 बजकर 26 मिनट मिथुन लग्न कर्क राशि में रहेगा। अर्थात धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेगा। आज सूर्यास्त तक स्नान का पुण्य काल रहेगा। संक्रांति का वाहन व्याघ्र अपवाहन अश्व पीला वस्त्र गदा आयुध,खीर भरण करते हुये कु मकुम लेपन,भूत वर्ण,चमेली पुष्प,बाल्यावस्था पश्चिम दिशा की तरफ गमर कर रही हैं।
संक्रांति माघ मास की मिथुन लग्न में प्रवेश करेगी ”आनंद सर्व लोकानां मंगलानि गृहे-गृहे ” प्रजा में सब प्रकार का मंगल होगा एवं सब सुखी रहेंगे,महंगाई बढेगी,लेकिन सर्वत्र शांति व्यवस्था कायम रहेगी,वैचारिक उग्रता आयेगी,लोग एक दूसरे से मरने मारने में उतारू हो जायेंगे,वर्षा अच्छी होगी,गर्मी भी खूब पडेÞगी,मेष वृष कर्क कन्या वृश्चिक धनु मकर व मीन राशि वालों को लाभप्रद एवं मिथुन सिंह तुला व कुंभ राशि वालों को हानिप्रद रहेगा। हानिप्रद राशि वालों को तिल का दान अवश्य करना चाहिये। संक्रांति पर्व में तिल का प्रयोग 6 प्रकार से करना शास्त्रों में बताया गया है।

तिल स्नायी,तिलोद्वर्ती,तिल होमी,तिलोद्वकी। तिल शुक तिलदाता च षटतिला: पाप नाशक:।।
अर्थात आज के दिन जल में तिल डालकर उससे स्नान करना चहिये,तिल का तेल लगाना चाहिये,तिल का उबटन लगाना चाहिये,तिल का हवन करना चाहिये,तिल खाना चाहिये और तिल का दान करना चाहिये। ये 6 प्रकार कर्म पाप नाशक माने जाते हैं। इसके अलावा आज के दिन,अन्नदान करना चाहिये। पवित्र नदियों में स्नान करना,दान करना,कम्बल का दान,ऊनी वस्त्र दान, तिल गुड लड्डू का दान,खिचड़ी का दान अवश्य करना चाहियेद्ध पवित्र नदियों में स्नान करना, दान करना, हवन करना गरीबों का सुस्वाद भोजना कराना तथा श्रेष्ठजनों, गुरूजनों ब्रम्हणों का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिये। इस प्रकार सभी सनातनियों को हर्ष उल्लास के साथ तिल गुड खाओ और मीठा बोलो मकर संक्रांति का पर्व मनाना चाहिये।

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