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टमाटर को अब एहसास हुआ कि वह किचिन का राजा है

मंहगाई के नाम पर केवल टमाटर चर्चा में
सोशल मीडिया में कर रहा है ट्रेंड
और मंहगी सब्जियों के साथ ही अन्य जरूरी चर्चाओं पर गौर नहीं

सिवनी यशो:- उड़द, मूंग, मसूर सब मजे में है गेहूँ के साथ घुन पिस रहा है बदनामी जिसके साथ लग जाये वह पीछा नहीं छोड़ती घुन तो उड़द मूंग मसूर सहित अन्य अनाज में भी होते है और पिसते है परंतु कहावत में गेहूँ को ही लिया जाता है । यही हाल इन दिनों टमाटर के है मंहगाई के नाम पर टमाटर बहुत अधिक लोकप्रिय हो रहा है सोशल मीडिया में टमाटर को बहुत स्थान मिल रहा है कोई चुटकुले बना रहा है तो रील बना रहा है । ट्वीटर पर भी टें्रंड चल रहा है । हालांकि दो-तीन दशक से ही टमाटर इन दिनों बाजार में दिखने लगा है अन्यथा वर्षाकाल में टमाटर सहज रूप से उपलब्ध ही नही होता था और रही बात मंहगे होने की तो टमाटर ही नहीं अन्य सब्जियाँ भी वर्षाकाल में मंहगी हो ही जाती है परंतु अब उपलब्धता है तो सब्जियाँ हमारे भोजन में अनिवर्य हो गयी है सब्जियाँ मंहगी होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है परंतु टमाटर ने जिस तरह से सोशल मीडिया में अपनी उपस्थिती दर्ज की है उससे अन्य सब्जियां टमाटर से अधिक मंहगी होने के बाद भी चर्चा में नही है। यह सोशल मीडिया का दौर है वायरल होने के लिये जो ट्रेंड चले वहीं चलता है और इस प्रकार के ट्रेंड के चक्कर में जरूरी बाते भी छूट जाती है । चल रहे ट्रेंड के चक्कर में टमाटर फुकट में बदनाम हो रहा है, जबकि मंहगाई की आग अन्य सब्जियों के दामों में भी लगी है।
यह बात अलग है कि आज टमाटर रसोई का राजा है और इसकी उपयोगिता आवश्यक महसूस होने लगी है परंतु इससे मंहगी सब्जियाँ भी तो खरीद ही रहे है तो टमाटर को कोसना क्यों ? महिलाएं ऐसे मुंह बिचकाकर टमाटर का मजाक उड़ा रही हैं कि वह रोज टमाटर के अलावा और कुछ बना ही नहीं रही थीं। कोई टमाटर खरीदकर दो एकड़ जमीन बेचने वाला तो कोई दो टमाटर में पूरा पेट्रोल दे रहा है । और भी तरह तरह की रील बनाई जा रही है ।
सब्जी मंडी में ऐसी कोई सब्जी नहीं, जिसके रेट सुनकर झटका न लगे अभी तो प्याज की मेहरबानी है अपने दाम कम किये हुये है टमाटर मंहगा हो जाये सरकार भी चिंता नहीं करती परंतु प्याज ने कहीं अपने तेवर दिखाएँ दे सरकार हिलने लगती है । देश में प्याज की चर्चा हुई मतलब सरकार गयी हालांकि प्याज केवल मंहगी होने पर सरकार को नहीं हिलाती इसकी कीमत एक दम से नीचे गिरने पर भी सरकार संकट में आ जाती है पिछले विधानसभा चुनाव के पूर्व मध्यप्रदेश में प्याज के रेट एकदम से नीचे आ गये थे सरकार हिल गयी थी और प्रदेश से भाजपा को हाथ धोना पड़ा था वह तो टमाटर है जो सस्ता हो जाये या मंहगा उसे कोई फर्क नहीं पड़ता ।
टमाटर को बदनाम करने के बाद मंडी में 10 रुपये में मिलने वाला कद्द,ू लौकी 50 रुपये की हो गई तो लोकल में निकलने वाली सब्जी भिंडी बरबटी बैंगन रंग दिखा रही है । गोभी, परवल, करेला, भिंडी, तोरी, लौकी के रेट भी कम नहीं है । सब्जियों के बढ़े दाम के कारण उपभोक्ता तो परेशानी है ही सब्जी का व्यापार करने वाली भी परेशान है अनेक फेरी लगाकर सब्जी बेचने वाले आपकी गलियों में नहीं दिख रहे होंगे । उनके साथ भी मजबूरी है एक सब्जियाँ मंहगी होने से लगात अधिक हो गयी है, खरीददारों से बहस भी बहुत करना पड़ती है और सब्जी के साथ मुफ्त की धनियाँ देना फिलहाल उनकी हैसियत से बाहर हो गया है क्योकि धनियाँ भी 300 रूपये किलो हे । बरसात के दिनों में सब्जियाँ सड़ती भी अधिक है । इन परेशानियों से बचने और नुकसान की संभावनाओं से छोटे फेरीवाले घर बैठ गये है ।
सड़को पर फिकने वाला टमाटर आज सम्मान की स्थिती में है और यह उसका अधिकार है परंतु अन्य सब्जियों के जो भाव बढ़े है उसके संबंध में घर के बुजुर्ग कहते हे कि जब मॉनसून सीजन में खेतों में पानी भर जाता है और हर वर्ष सब्जियां महंगी होती है और इसलिये भारत की नारियाँ बरसात के लिये इंतजाम भी करती है बडी, पापड़ अचार के अधिकतम उपयोग का यही बेहतर समय होता है और सब्जियों के बरी, राजमा, छोले, सोयाबड़ी,मूंग, बेसन के गट्टे आदि की सब्जी शान से बनाये ।

Dainikyashonnati

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