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अपडेट :- नगर पालिका ने की एफ. आई. आर : पूर्व सी. एम. ओ. एवं अध्यक्ष पर आंच

जनजाति वर्ग के लिये आरक्षित दुकान पर सामान्य वर्ग का हटेगा कब्जा, आरक्षित वर्ग को पुन: आवंटित की जायेगी दुकान

सिवनी यशो:- अनैतिक तरीके से नगर पालिका परिषद सिवनी की एक दुकान के आवंटन के विरूद्ध कार्यवाही की गयी है । नगर पालिका परिषद के 19 जुलाई के साधारण सम्मेलन में परिषद ने कार्यवाही के लिये प्रस्ताव पारित किया था । पारित प्रस्ताव का पालन करते हुये मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने गलत तरीके से कब्जा जमाऐ व्यापारी एवं अनैतिक तरीके से व्यापारी को दुकान आवंटित करने वाले जिम्मेदारों पर एफआईआर करने के लिये पुलिस कोतवाली में आवेदन दिया है ।

सिवनी नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने कोतवाली को दिये अपने आवेदन में उल्लेख किया है कि नगर पालिका स्वामित्व अंतर्गत नगर पालिका के सामने स्थित दुकान क्रमांक-01 अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित दुकान है जो वर्ष 1985-1986 में हरगोविन्द पिता प्रताप सिंह तेकाम को आवंटन किया गया है। आरक्षित दुकान को यशोदा वत्रा जोजे भगतराम वत्रा को क्रय / विक्रय कर सामान्य वर्ग के व्यक्ति के नाम से नामान्तरण / हस्तान्तरण पूर्व परिषद के विशेष सम्मेलन प्रस्ताव क्रमांक 4 (3) दिनांक-11/09/2008 के अनुसार किया जा चुका है। म.प्र. नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 109 के अंतर्गत बने अचल सम्पत्ति अंतरण नियम 2016 एवं संशोधित नियम 2021 के उपनियम 8 (4) (ख) के अनुसार आरक्षित प्रवर्ग की सम्पत्ति उसी संवर्ग को अंतरित किये जाने का प्रावधान है। किन्तु पूर्व परिषद के विशेष सम्मेलन दिनांक-11/09/2008 के प्रस्ताव क्रमांक 04 (3) विशेष सम्मेलन की धारा 57 के अंतर्गत अन्य विषय लाना विधि संगत नहीं है। नियम विरूद्ध तरीके से पूर्व परिषद ने पारित निर्णय कर अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग की आरक्षित दुकान क्रमांक 01 सामान्य वर्ग के व्यक्ति को कर दिया ।

पूर्व परिषद के नियम विरूद्ध पारित निर्णय को वर्तमान परिषद के द्वारा साधारण सम्मेलन दिनांक-19/07/2024 के प्रस्ताव क्रमांक 04 के निर्णय अनुसार उक्त दुकान की लीज नामान्तरण निरस्त किया जाकर दुकान को सील कर नये सिरे से लीज आवंटन की कार्यवाही हेतु निर्णय पारित किया गया है। वर्तमान परिषद के पारित निर्णय अनुसार याशोद वत्रा जोजे भगतरात वत्रा एवं संबंधितो पर एफ.आई.आर दर्ज कर वैधानिक कार्यवाही करने पुलिस को आवेदन दिया है ।

मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने पूर्व परिषद के द्वारा नियम विरूद्ध लीज नामांतरण करने वाले अधिकारी परिषद अध्यक्ष एवं पार्षदों की सूची संलग्र करते हुये वह सारे दस्तावेज दिये है जो यह सिद्ध करते है कि दुकान जनजाति वर्ग के लिये आरक्षित थी जिसे दोंषपूर्ण तरीके से पूर्व परिषद ने सामान्य वर्ग के व्यक्ति को आवंटित कर दी है । नगर पालिका द्वारा की गयी इस कार्यवाही में दुकान आवंटन कराने वाले व्यक्ति की दुकान को संबंधित वर्ग के लिये आवंटन निर्धारित किया जाना सुनिश्चित हो गया है वहीं गलत से दुकान आवंटन प्राप्त करने के लिये संबंधित दुकानदार, एवं आवंटित करने के लिये उस समय के मुख्य नगर पालिका, अध्यक्ष एवं उस समय की परिषद के वह सदस्य जिन्होंने गलत प्रक्रिया का समर्थन किया है उनके विरूद्ध कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित हो सकती है ।

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आरक्षित कोटे पर अनैतिक कब्जा,नपा ने की एफआईआर

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