लाभ में संघ, घाटे में समितियां: 22 हजार की कटौती से वनोपज समितियों पर आर्थिक संकट
तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य प्रभावित, कर्मचारियों को 16 हजार वेतन वृद्धि अब तक नहीं मिली
वनोपज सहकारी समितियां आर्थिक संकट से जूझ रही: कमीशन कटौती से तेंदूपत्ता कार्य प्रभावित
सिवनी यशो :- प्रदेश में लघु वनोपज से करोड़ों का मुनाफा कमाने वाला संघ जहां लाभ में है, वहीं उसी से जुड़ी प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियां आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं। कमीशन राशि में कटौती के कारण समितियों का संचालन प्रभावित हो रहा है।
मध्यप्रदेश भोपाल को हर वर्ष प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से करोड़ों का लाभ प्राप्त होता है। इसी लाभांश में से समितियों को उनके संचालन के लिए प्रति वर्ष दो लाख रुपये कमीशन के रूप में दिए जाते हैं, जिससे कर्मचारियों के वेतन-भत्ते एवं अन्य खर्च पूरे होते हैं।
लेकिन इस वर्ष संघ द्वारा इस कमीशन राशि में से 22 हजार 375 रुपये की कटौती कर दी गई है। इस कटौती के कारण समितियों की आर्थिक स्थिति डगमगा गई है और नियमित गतिविधियों के संचालन में कठिनाई आ रही है।
वर्तमान में तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य जारी है, जो समितियों के लिए आय का प्रमुख स्रोत होता है। ऐसे समय में कमीशन में कटौती से संग्रहण कार्य भी प्रभावित हो रहा है और जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं कमजोर पड़ रही हैं।
ज्ञापन सौंपा, ये रखी मांगें
म.प्र. वनोपज सहकारी कर्मचारी एवं श्रमिक संघ की जिला इकाई ने इस समस्या को लेकर प्रबंध संचालक, म.प्र. राज्य लघु वनोपज संघ भोपाल के नाम ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि:
कमीशन राशि में की गई कटौती को तुरंत वापस लिया जाए
शेष राशि का शीघ्र भुगतान किया जाए
अगस्त 2024 से मार्च 2025 तक की 16 हजार रुपये वेतन वृद्धि का भुगतान किया जाए
प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख रूप से
नारायण सनोड़िया, संतोष पटले, राजेश भलावी, राकेश वरकड़े, मेमबती अड़माचे, भुमेश्वरी सोनेश्वर, रमा नागले, वीरेन्द्र नागरे, शत्रुघन उइके, पोतनलाल चौरे, अर्चना महलवंशी, विजय मेश्राम, लीमचंद रंगारे, चेतराम झारिया, दुर्गेश कुमार चौधरी, रमेश रामटेके सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।
अगर जल्द ही भुगतान नहीं हुआ तो तेंदूपत्ता संग्रहण और समितियों की कार्यप्रणाली पूरी तरह प्रभावित हो सकती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।



