Seoni 25 July 2025
सिवनी यशो:- श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, सिवनी (म.प्र.) में शुक्रवार को एक भव्य आध्यात्मिक आयोजन के अंतर्गत समाधिस्थ आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण चिन्हों की प्रतिष्ठा की गई।
इस पावन अवसर पर मुनि श्री धर्मसागर जी एवं मुनि श्री भावसागर जी के दिव्य सान्निध्य में एक प्रेरणादायक धर्मसभा संपन्न हुई।
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जीवन की रक्षा ही सर्वोच्च धमर्: मुनि श्री धर्मसागर जी
धर्मसभा में मुनि श्री धर्मसागर जी ने आत्महत्या जैसे घातक विषय पर गहन चिंता व्यक्त करते हुए कहा —
“आत्महत्या कायरता है, समाधान नहीं। जीवन जैसा अमूल्य रत्न दुबारा नहीं मिलता। जब तक साँस चल रही है, तब तक आशा जीवित है।”
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि जब भी मानसिक तनाव या जीवन की चुनौतियाँ घेरें, ध्यान, साधना, माता-पिता के सान्निध्य और संत साहित्य का आश्रय लें।
संयम और श्रद्धा का प्रतीक: विद्यासागर जी के चरण चिन्ह
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा — आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण चिन्हों की प्रतिष्ठा, जिन्हें सहस्त्रों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर भावविभोर होकर नमन किया।
श्रद्धालुओं का मानना है कि चरण चिन्ह मात्र पत्थर नहीं, बल्कि साक्षात साधना और त्याग के प्रतीक हैं।
मुनि श्री भावसागर जी का संदेश
मुनि श्री भावसागर जी ने अपने उद्बोधन में कहा:
“तुम जैसे दुनिया में कोई नहीं। खुद को पहचानो। जब कोई तुम्हारी मदद न कर पाए, तब खुद को साधो — वही तुम्हारा जीवन बदल देगा।”
उन्होंने आगे जोड़ा
“माँ का प्रेम आत्मा की सबसे बड़ी सुरक्षा है — उसे भूलना विनाश का मार्ग है।”
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, आत्मिक वातावरण
सिवनी नगर सहित जिले के कोने-कोने से श्रद्धालुओं ने इस पावन आयोजन में भाग लिया। मंदिर परिसर में गूंजते जिनवाणी के स्वर, भक्ति-भजन और संयममयी वाणी ने वातावरण को आत्मिक बना दिया।
संपादकीय टिप्पणी:
यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्म-रक्षा, मनोबल और साधना के प्रचार का अवसर था। आत्महत्या रोकने जैसे विषयों पर जैन धर्म का यह सारगर्भित संदेश संपूर्ण समाज को नई दिशा देता है।
भारतीय संस्कृति में जैन धर्म का योगदान—विषय पर -विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन भोपाल का विशेष लेख पढ़ें :- https://jaingazette.com/bhartiye-sanskriti-mai-jain-dharm-ka-yogdan/



