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ध्यान वह चाबी है जिससे अंतःकरण का ताला खुलता है

जैन बड़ा मंदिर सिवनी में मुनिश्री भावसागर जी व मुनिश्री धर्मसागर जी के सान्निध्य में संपन्न हुई मांगलिक क्रियाएं

Seoni 24 July 2025
जैन धर्म की गूढ़ साधना परंपरा को सजीव करते हुए आज प्रातः श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर, सिवनी (म.प्र.) में परम पूज्य मुनिश्री भावसागर जी महाराज एवं मुनिश्री धर्मसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में मंगलाचरण व मांगलिक क्रियाएं सम्पन्न हुईं।

यह साधनामयी अवसर महासमाधिधारी आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज द्वारा दीक्षित परम पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्यों की उपस्थिति में श्रद्धालुओं के लिए दुर्लभ साधना-क्षण बन गया।

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“ध्यान आत्मा से परमात्मा तक की यात्रा है”

इस अवसर पर मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा —

“ध्यान अपने को खो देने की प्रक्रिया है, अपने को मिटा देने का नाम है, आत्मा को परमात्मा बनाने की क्रिया है। ध्यान से मन की चंचलता शांत होती है और अंतःकरण का ताला खुलता है। जब ध्यान के फूल खिलते हैं, तो जीवन का बगीचा आनंद से महक उठता है। ध्यान ही वह दीपक है जो आत्म-मंदिर को प्रकाशित करता है। यह आत्मा में छिपे परमात्मा की आभा को उजागर करता है।”

उन्होंने कहा कि ध्यान कोई क्रिया मात्र नहीं, बल्कि जीवन की समग्रता में प्रवेश का माध्यम है। ध्यान के माध्यम से मस्तिष्क की संवेदनशीलता बढ़ती है और प्रज्ञा प्रखर होती है।

भक्तामर स्त्रोत से दूर होते हैं रोग

मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज ने इस अवसर पर भक्तामर स्त्रोत की व्याख्या करते हुए कहा —

“भक्ति आत्मा को शुद्ध करने का मार्ग है। भक्तामर स्त्रोत का नियमित पाठ और चिंतन रोगों के निवारण में चमत्कारी प्रभाव देता है। यह आत्मबल और विश्वास को जाग्रत करता है।”

उन्होंने भक्तों को भक्ति, ध्यान और साधना के समन्वय से जीवन को उन्नत बनाने का संदेश दिया।

कार्यक्रम की झलकियाँ

  • प्रातःकालीन मांगलिक क्रियाएं

  • सामूहिक ध्यान व स्त्रोत पाठ

  • श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति

  • मुनिश्री के सान्निध्य में आध्यात्मिक चर्चा

विशेष प्रस्तुति: दैनिक यशोन्नति टीम
स्थान: श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर, सिवनी (म.प्र.)

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