Seoni 25 July 2025
सिवनी यशो :- सिवनी जिले की कई ग्राम पंचायतों में गहरे भ्रष्टाचार की परतें अब खुलने लगी हैं। सीईओ जिला पंचायत के कार्यालय तक पहुंची जाँच रिपोर्टों के बावजूद अब तक न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई, और न ही दोषियों पर जिम्मेदारी तय की गई।
जिले की पंचायत राज व्यवस्था भ्रष्टाचार के मकडज़ाल में फँसी हुई है। विकास योजनाओं के नाम पर करोड़ों का शासकीय धन लूटा जा रहा है और यह सब कुछ अधिकारियों के संरक्षण में खुल्लमखुल्ला हो रहा है। जनकल्याण की योजनाएँ भ्रष्टाचारियों के लिए आमदनी का जरिया बन चुकी हैं और शासन-प्रशासन की चुप्पी ने अंधेरगर्दी को बढ़ावा दिया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना में खुला फर्जीवाड़ा: रोजगार सहायक ने माँ-पत्नि के नाम हड़पे दो आवास
सिवनी जनपद की एक ग्राम पंचायत में पदस्थ रोजगार सहायक द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपनी माँ और पत्नी के नाम पर दो आवास मंजूर करवा लिए और सरकारी धन सीधे हड़प लिया।
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ये फर्जीवाड़ा शिकायत के माध्यम से सामने आया और इसकी पुष्टि भी हुई, परन्तु आज तक न तो राशि की वसूली हुई और न ही किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई।
सीईओ और एसडीओ ने मिलकर लगाया दो करोड़ का चूना
जनपद पंचायत सिवनी में पदस्थ रहे तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक कुमार एवं एसडीओ राजाराम सनोडिया ने अपने कार्यकाल में लगभग दो करोड़ रुपये के कार्यों में फर्जीवाड़ा कर शासन को गंभीर आर्थिक क्षति पहुँचाई।
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इस पूरे मामले की जाँच जनपद पंचायत स्तर की टीम और जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा की गई, जिसमें घोर अनियमितताएँ और शासकीय धन की लूट स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुईं।
कलेक्टर कार्यालय में दबा दी गई फाइल, जाँच प्रतिवेदन पर नहीं हुई कार्यवाही
इस फर्जीवाड़े के संबंध में बाकायदा जाँच टीम गठित की गई थी, जिसमें जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों ने विस्तृत जाँच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
जाँच रिपोर्ट में सीधा उल्लेख है कि निर्माण कार्य बिना स्थल निरीक्षण एवं बिना सामग्री के भुगतान कर दिए गए। जाँच में यह स्पष्ट पाया गया कि करोड़ों की राशि सिर्फ कागज़ों पर खर्च दिखाई गई है।
जाँच प्रतिवेदन जिला कलेक्टर कार्यालय भेजा गया, जहाँ से कार्यवाही के निर्देश जारी होने चाहिए थे, लेकिन फाइल को दबा दिया गया। वर्षों बीतने के बावजूद अब तक इस पर कोई प्रशासनिक निर्णय नहीं लिया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि भ्रष्टाचारियों को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है।
सीईओ जिला पंचायत की लापरवाही: सैकड़ों भ्रष्टाचार प्रमाणित, फिर भी चुप्पी
ग्राम पंचायतों में सचिव और रोजगार सहायकों की अराजकता चरम पर है। सैकड़ों मामलों में जनपदों द्वारा प्रतिवेदन भेजे गए हैं जिसमें कार्यों में अनियमितता, अपात्र हितग्राहियों को लाभ, फर्जी हस्ताक्षर, अपात्र व्यक्तियों को आवास/शौचालय जैसी योजनाओं का लाभ जैसे गंभीर आरोप प्रमाणित हुए हैं।
इसके बावजूद सीईओ जिला पंचायत द्वारा किसी भी भ्रष्टाचार के मामले में कठोर कार्यवाही नहीं की गई। कई मामलों में प्रतिवेदनों को दरकिनार कर दिया गया या महीनों तक लंबित रखा गया।
निष्कर्ष : अगर शासन नहीं चेता, तो पंचायतें बन जाएंगी भ्रष्टाचार का अड्डा
सिवनी जिले की पंचायत व्यवस्था एक गंभीर संकट से गुजर रही है। यदि शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो ग्राम पंचायतें भ्रष्टाचार का स्थायी केंद्र बन जाएंगी और विकास की उम्मीदें पूरी तरह दम तोड़ देंगी।
ग्राम पंचायतों की विस्तृत जानकारी के लिये लागिंन करें :- https://mp.gov.in/panchayat-rural-development-departmentmp.gov.in/panchayat-rural-development-department




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