2003 के बाद मिला है इतना बड़ा जनमत
सिवनी यशो:-मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बंपर जीत हासिल करते हुये 163 सीटे जीती है । यहाँ बतादें कि इस प्रकार की जीत मध्यप्रदेश में दिग्विजय शासन के आक्रोश के विरोध में 2003 में भाजपा को प्राप्त हुई थी जिसके लिये तत्कालीन भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष कैलाश जोशी संगठन महामंत्री कप्तानसिंह सोलंकी, सुश्री उमाभारती एवं युवा तुर्क नेता प्रहलाद पटेल के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में दिग्विजय सिंह के कुशासन के विरोध में वातावरण तैयार किया गया था और भाजपा को उस समय 173 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज हुई थी और प्रदेश में 42 प्रतिशत मत प्राप्त हुये थे कांग्रेस को महज 38 विधानसभा सीटे प्राप्त हुई थी और 31 प्रतिशत मत प्राप्त हुये थे । जबकि 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 2003 के मुकाबले भले ही सीटे कम मिली हो परंतु वोट का प्रतिशत 2003 से अधिक है भाजपा को 2023 के परिणाम में 49 प्रतिशत मत प्राप्त हुये है ।
भाजपा ने नहीं दिया था मुख्यमंत्री का फेस
विधानसभा के शानदार परिणाम आने के तीन दिन बाद भी भाजपा ने नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान नहीं किया है. हालांकि,इस बीच सीएम की कुर्सी के दावेदारों के नाम को लेकर तमाम कयास लगाए जा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह वाली बीजेपी अमूमन अपने पत्ते अंतिम समय तक नहीं खुलती है, लेकिन फिर भी निवृत्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई दिग्गज नेताओं के नाम प्रमुखता से लिये जा रहे हैं.कहा जा रहा है कि आजकल में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम का फैसला ले लिया जाएगा ।
यहाँ यह उल्लेखनीय है कि भारतीय जनता पार्टी आलाकमान ने इस बार के चुनाव में किसी को भी सीएम फेस प्रोजेक्ट नहीं किया था. इसलिए सूबे के राजनीतिक हलकों में शिवराज सिंह चौहान के स्थान पर नए नेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी देने की चर्चा चल पड़ी है. हालांकि, कहां जा रहा है कि अभी भी शिवराज सिंह चौहान ही मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए सबसे बड़े दावेदार हैं । वही अनेक न्यूज एजेंसिया यह बता रही है कि भाजपा तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री पद किसी नये चेहरें को दे सकती है । प्रदेश में नाम सबसे प्रमुख रूप में सामने आ रहा है तो वह है सिवनी जिले से राजनैतिक सफर प्रारंभ करने वाले प्रह्लाद सिंह पटेल का ।
प्रह्लाद पटेल का नाम प्रमुखता से
प्रह्लाद सिंह पटेल की राजनैतिक क्षमताओं में लक्ष्य प्राप्त करने की जीवटता को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय नेतृत्व ने बहुत बार देखा है २००३ के विधानसभा चुनाव में लगातार पूरे प्रदेश में तत्कालीन कांग्रेसी सत्ता के विरोध में व्यापक माहौल तैयार करने के लिये प्रशासन और शासन से लड़ते हुये लगातार आंदोलन जनसंवाद कर भाजपा के पक्ष में व्यापक जनाधार का पहाड़ खड़ा कर दिया था । श्री पटेल की क्षमताओं को देखते हुये केन्द्रीय नेतृत्व ने मणिपुर की जिम्मेदारी दी तो वहाँ भी उन्होंने अपनी क्षमताओं का भरपूर उपयोग कर भाजपा की जीत का परचम लहराया। हाल ही में हुये विधानसभा चुनाव में महाकोशल के हर क्षेत्र में जनता से संवाद के साथ कार्यकत्ताओं में ऊर्जा का संचार कर बड़ी बढत के लिये परिणामकारी प्रयास किये । मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री पद के लिये कैलाश विजयवर्गीय, रीति पाठक, नरेन्द्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिंया के नाम प्रमुखता से चल रहे है ।
आज पर्यवेक्षक हो सकते है नियुक्त
यहाँ बता दें कि मध्यप्रदेश सहित तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री के नामों पर अटकलों का दौर जारी है। राज्यों की राजधानियों से लेकर दिल्ली तक बैठकों का दौर जारी है। बुधवार को तीनों राज्यों में चुनाव जीतने वाले भाजपा के सांसदों ने इस्तीफे दे दिए। कुल 12 सांसदों ने चुनाव जीता है। अब तक 10 ने इस्तीफा दे दिया है। शेष दो भी जल्द इस्तीफा दे देंगे। माना जा रहा है कि पार्टी किसी भी समय तीनों राज्यों के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर सकती है। ये पर्यवेक्षक शनिवार या रविवार तक संबंधित राज्य में आएंगे। विधायकों की बैठक होगी और उम्मीद की जा रही है कि रविवार तक तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री के नाम का एलान कर दिया जाएगा।



