विश्व सिकल सेल दिवस 2026: मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य क्रांति की नई तस्वीर, राष्ट्रपति ने कहा—देश बना रहा है वैश्विक उदाहरण
ओंकारेश्वर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम, स्क्रीनिंग में ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना
विश्व सिकल सेल दिवस 2026: ओंकारेश्वर में बड़ा आयोजन, राष्ट्रपति ने की एमपी की सराहना
खंडवा के ओंकारेश्वर में भव्य राज्य स्तरीय आयोजन
भोपाल यशो :- विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के पवित्र तीर्थ ओंकारेश्वर में राज्य स्तरीय विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन-2047 के तहत हुआ, जिसमें देश की सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रपति द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मंच पर मौजूद रहे। प्रारंभ में वंदे मातरम् और राष्ट्रगान जन गण मन का सामूहिक गायन हुआ, जिससे पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति और जनस्वास्थ्य के संकल्प से भर उठा।
राष्ट्रीय मिशन की ऐतिहासिक उपलब्धि, 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग पूरी
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत देश में अब तक लगभग 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग पूरी हो चुकी है। उन्होंने इसे केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर आनुवंशिक रोगों की रोकथाम की सबसे बड़ी पहलों में से एक बताया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मिशन की शुरुआत मध्यप्रदेश के शहडोल से की थी, तब इसका उद्देश्य सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारी को जड़ से समाप्त करना था।
मध्यप्रदेश बना केंद्र बिंदु
1.32 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग
राष्ट्रपति ने विशेष रूप से मध्यप्रदेश की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने इस अभियान को गति देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्रदेश में अब तक 1.32 करोड़ से अधिक नागरिकों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है।
इसके अलावा बड़ी संख्या में लोगों को जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड प्रदान किए गए हैं, जिससे समय रहते बीमारी की पहचान और रोकथाम संभव हो रही है।
मिशन की वैज्ञानिक और सामाजिक संरचना
स्वास्थ्य, विज्ञान और जनजातीय विकास का संयुक्त मॉडल
राष्ट्रपति ने कहा कि यह मिशन केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक बहुआयामी सामाजिक और वैज्ञानिक मॉडल है। इसे पहली बार इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली
जनजातीय कल्याण विभाग
जेनेटिक साइंस
डिजिटल हेल्थ ट्रैकिंग
को एक साथ जोड़ा गया है।
इसमें आईसीएमआर, एम्स, डब्ल्यूएचओ, एनएचएम और ट्राइबल हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट जैसी संस्थाओं ने महत्वपूर्ण अध्ययन और सहयोग प्रदान किया है।
बीमारी की चुनौती और वास्तविकता
लाखों लोग बिना जानकारी के वाहक
अध्ययनों के अनुसार भारत में लगभग 2 से 2.5 करोड़ लोग सिकल सेल जीन के वाहक हो सकते हैं। इनमें से बड़ी संख्या को अपनी स्थिति की जानकारी ही नहीं होती, जिससे यह बीमारी पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रहती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि यही इस मिशन की सबसे बड़ी चुनौती है, जिसे जागरूकता और स्क्रीनिंग के माध्यम से नियंत्रित किया जा रहा है।
मिशन के तीन मुख्य आधार
राष्ट्रपति ने बताए सफलता के स्तंभ
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि इस अभियान की सफलता तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है—
जागरूकता अभियान और विवाह पूर्व जेनेटिक काउंसलिंग
व्यापक स्क्रीनिंग और समय पर पहचान
निरंतर उपचार और रोग प्रबंधन प्रणाली
उन्होंने कहा कि भारत पहली बार इतने बड़े पैमाने पर आनुवंशिक स्क्रीनिंग और डिजिटल ट्रैकिंग का उपयोग कर रहा है।
मध्यप्रदेश की नई पहलें और उपलब्धियां
मोबाइल यूनिट से लेकर सिकल मित्र तक
मध्यप्रदेश ने इस मिशन को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए कई नवाचार किए हैं—
4 लाख से अधिक महिलाओं की विशेष स्क्रीनिंग
दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट
विद्यार्थियों के बीच व्यापक जांच अभियान
“सिकल मित्र” कार्यक्रम के माध्यम से सामाजिक भागीदारी
इन प्रयासों ने स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण
चार मोर्चों पर चल रहा अभियान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन के लिए चार प्रमुख मोर्चों पर कार्य कर रही है—
स्क्रीनिंग
उपचार
जेनेटिक काउंसलिंग
जनजागरूकता
उन्होंने कहा कि प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 5 से बढ़कर 32 हो चुकी है, जो स्वास्थ्य ढांचे में बड़े बदलाव का संकेत है।
जनजातीय क्षेत्रों पर विशेष फोकस
आदिवासी समाज को प्राथमिकता
मध्यप्रदेश के जनजातीय बहुल जिलों में यह बीमारी अधिक पाई जाती है। इसी कारण सरकार ने इन क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाए हैं, जिसमें गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और विद्यार्थियों की प्राथमिक जांच को प्राथमिकता दी जा रही है।
समापन संदेश: 2047 से पहले लक्ष्य हासिल करने का संकल्प
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें इसी तरह मिलकर कार्य करती रहीं, तो वर्ष 2047 से पहले ही भारत सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन का लक्ष्य प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने मध्यप्रदेश के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह राज्य जनजातीय स्वास्थ्य सुधार में एक राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभर रहा है।




