मंत्रो के अशुद्ध उच्चारण से अनर्थ होता है – स्वामी श्री प्रज्ञानानंद
लक्ष्मी के पिता बने या पुत्र बनकर श्रेष्ठ दानी बनना चाहिए
सिवनी 28 मार्च 2023
सिवनी यशो:- सद्गुरु और माता श्रीभगवती हमेशा कृपा की बरसात करती हेै परंतु मिलता उन्ही को जो पात्र होते हैं !श्री माता राजा राजेश्वरी की सेवा समस्त देवी और देवता भी श्रद्धा भाव से करते हैं ।
इस आशय के विचार मठ मंदिर में चल रहे श्रीशक्ति महायज्ञ के छटवें दिन आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री प्रज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज ने उपस्थित श्रोताओं को धर्म गंगा के प्रवाह में लेजाते हुये व्यक्त किये आपने कथा को आगे बढाते हुये कहा कि भगवान और भगवती अपने भक्तों को योग क्षेम तथा संरक्षण प्रदान करते हैं! जीवन में धर्म के प्रति एक निष्ठा एक व्रत कल्याणकारी होता है,। यज्ञ में मंत्रों के शुद्ध उच्चारण का महत्व बताते हुए स्वामी श्री ने कहा कि मंत्रों के अशुद्ध उच्चारण से अनर्थ होता है! शुद्ध उच्चारण और देव भाषा संस्कृत का महत्व बताते हुए स्वामी जी ने कहा कि विद्या ब्राह्मण का अलंकरण होता है! श्रीमद्भागवत में जड भरत के जन्म का स्मरण कराते हुए ,आप श्री ने कहा कि विक्षिप्त और मूकबधिर जन्मे मनुष्य की उपेक्षा और उपहास नहीं करना चाहिए! संभव है पूर्व जन्म के परमहंस अपने प्रारब्ध के कारण इन अवस्थाओं में जन्म लेते हैं और यह ईश्वर की इच्छा होती है कि उनसे इस जन्म में पूर्व जन्मों की तरह कोई भूल ना हो । वास्तव में पागल उन्हें समझना चाहिए जो बुद्धि रहते हुए भी पाप करते हैं और बुद्धि का दुरुपयोग करते हैं!
स्वामी श्री ने प्रवचन श्रंखला को आगे बढ़ाते हुए कहा कि अनंत कोटी ब्रम्हांड जननी श्री माता राजराजेश्वरी की सेवा समस्त देवी और देवता करते हैं । प्रसंग वश अपने पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य महाराज श्री का पुण्य स्मरण करते हुए आप श्री ने कहा कि, श्री विद्या के परम उपासक हमारे गुरुदेव अवतारी पुरुष थे। जिनके शुभ हस्ते- महाकौशल क्षेत्र में अनेक स्थानों पर श्री माता राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी की स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा हुई है । मातृ धाम, झोतेश्वर , गणेशगंज में बाला भवानी ,सहित दुर्गा चौक , एवं नंदीकेश्वर धाम सिवनी में आने वाली कई पीढिय़ों के उद्धार हेतु भगवती श्री माता विराजमान है। इसके साथ ही संपूर्ण भारत वर्ष में गुरुदेव भगवान ने अनेक देवी-देवताओं के अनेक मंदिरों में श्री विग्रह प्राण प्रतिष्ठा की है । पड़ोसी देश *पाकिस्तान से भी देवी हिंगलाज को लाकर गुरुदेव ने महाकौशल क्षेत्र में प्रतिष्ठित किया है!
स्वामी श्री ज्ञानानंद जी ने आव्हान किया कि ,लक्ष्मी पिता बन कर हमें अपने धर्म के अनुरूप विष्णु रूप यज्ञ नारायण को लक्ष्मी का दान करना चाहिए तथा पुत्र बनकर श्री माता की सेवा में धन को लगाना चाहिए! यही श्रेष्ठ दान है । प्रवचन के अंत में देववाणी संस्कृत के उत्थान के लिए आप श्री ने कहा कि सिवनी नगर में देववाणी संस्कृत के पठन-पाठन हेतु श्रेष्ठ संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना हो, जहां ब्राह्मण बालकों को यज्ञ कर्म तथा शास्त्र सम्मत विधि विधान से पूजन पद्धति की शिक्षा प्राप्त हो सके! आपश्री ने कहा कि रिकॉर्डडेड मंत्रों से नहीं बल्कि ब्राह्मण मुख से उच्चारित वेद मंत्र उच्चारण से ही किए गए यज्ञ और पूजन वैवाहिक कार्य तथा मनुष्य जीवन के 16 संस्कार सफल होते हैं! गुरुदेव की कृपा से आयोजित श्री शक्ति महायज्ञ में सभी श्रद्धालु जन, श्री अर्चना और आहुति डालकर अपना एवं विश्व के कल्याण में सहभागी बने 7
स्वामी श्री ने पाश्चात्य संस्कृति के आचार विचार, खान-पान से सचेत करते हुए कहा कि मनुष्य द्वारा मांस भक्षण उसे पशुओं से भी गिरा हुआ बनाते हैं! क्योंकि जैसे सिंह अपनी मर्यादा के अनुसार कभी घास नहीं खाता, और गाय कभी मांस नहीं खाती! किंतु मानव अपने आहार में एक एकनिष्ठ ना रहकर शाकाहारी और मांसाहारी दोनों का भक्षण करता है।
स्वामी श्री के प्रवचन के पूर्व विद्वान आचार्य पंडित सनत कुमार उपाध्याय जी ने भूमिका की प्रस्तावना में कहा कि सिवनी की धर्म भूमि ,दो-दो पूज्य दंडी स्वामी ,ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज तथा आचार्य महामंडलेश्वर दंडी स्वामी श्री प्रज्ञानानंद सरस्वती की प्राकट्य स्थली है! यहां से संस्कृत का पठन-पाठन और उत्थान सद्गुरु की कृपा से संभव हो सकता है! गुरु की महिमा बताते हुए आपने कहा कि वेद वेदांत धर्म शास्त्रों के ज्ञाता को ही गुरु बनाना चाहिए इसी में सब का कल्याण है





