छिंदवाड़ाक्राइममध्यप्रदेश

पेंच नदी से रोज निकल रहे 2 हजार ट्रैक्टर रेत, अवैध उत्खनन में 17 हजार रुपए महीना वसूली के आरोप

चांद क्षेत्र में रेत माफियाओं का नेटवर्क सक्रिय, प्रशासनिक मिलीभगत के आरोपों से मचा हड़कंप

पेंच नदी अवैध रेत उत्खनन, शासन को करोड़ों के राजस्व का नुकसान

chhindwara 12 June 2026
छिंदवाड़ा यशो:-  जिले में रेत का अवैध कारोबार एक बार फिर सुर्खियों में है। पेंच नदी से प्रतिदिन लगभग 2 हजार ट्रैक्टर रेत निकाले जाने के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र में सक्रिय रेत माफियाओं का दावा है कि अवैध उत्खनन करने वालों से कथित रूप से 17 हजार रुपए प्रतिमाह तक की वसूली की जाती है, जिसके बाद कार्रवाई नहीं होती।

रेत का कारोबार इन दिनों सोने से भी ज्यादा लाभदायक माना जा रहा है। यही कारण है कि रेत माफिया रातोंरात लाखपति से करोड़पति बन रहे हैं। सरकार द्वारा रेत खदानों के ठेके दिए जाने के बावजूद अवैध उत्खनन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।

पेंच नदी के कई घाटों से खुलेआम निकाली जा रही रेत

जानकारी के अनुसार चांद क्षेत्र में पेंच नदी के बाड़ीबाड़ा से लेकर बांसखेड़ा तक लगभग 30 से 40 किलोमीटर के दायरे में कई घाट संचालित हैं। इनमें विकलाघाट, चंदनघाट, नौनीघाट, बादगांव घाट, खैरघाट, शहपुरा एवं कुलबहरा घाट प्रमुख बताए जा रहे हैं।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार केवल चांद क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग 200 ट्रैक्टर रेत निकाली जाती है, जबकि पूरे क्षेत्र में यह संख्या लगभग 2 हजार ट्रैक्टर प्रतिदिन तक पहुंच रही है।

“17 हजार रुपए दो, कार्रवाई नहीं होगी” — माफियाओं के आरोप

अवैध उत्खनन से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक विभागों के कुछ लोगों द्वारा दलालों के माध्यम से प्रति ट्रैक्टर 17 हजार रुपए प्रतिमाह तक की वसूली की जाती है। आरोप है कि भुगतान करने वाले ट्रैक्टरों पर कार्रवाई नहीं होती, जबकि जिनसे राशि नहीं मिलती, उनके खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई कर दी जाती है।

इन आरोपों में पुलिस, खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन के कर्मचारियों के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

कार्रवाई नाममात्र, स्टाफ की कमी बनी वजह

जानकारों का कहना है कि खनिज विभाग में अमले की कमी के कारण अवैध उत्खनन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा। यही कारण है कि कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।

हाल ही में चांद क्षेत्र के ग्राम हरनाखेड़ी में खनिज निरीक्षक ने पुलिस के साथ मिलकर देर रात चार खाली ट्रैक्टर जब्त कर थाने पहुंचाए थे, लेकिन अभी तक इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

जब्त रेत भी बनती है कमाई का जरिया

स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षा ऋतु से पहले रेत माफिया बड़ी मात्रा में रेत का भंडारण करते हैं। प्रशासन द्वारा जब्ती की कार्रवाई के बाद भी कई मामलों में वही रेत बाद में दोबारा बेच दी जाती है।

आरोप यह भी हैं कि कई बार रेत ठेकेदार खुद थानों में रेत चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराते हैं, जबकि शासन को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान होता रहता है।

सरकार सीधे रायल्टी वसूले : ठेकेदार

रेत कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार यदि ठेकेदारी व्यवस्था समाप्त कर बेरियर लगाकर सीधे रायल्टी वसूले तो अवैध उत्खनन पर काफी हद तक रोक लग सकती है।

उनका सुझाव है कि प्रति ट्रैक्टर लगभग 500 रुपए की रायल्टी तय कर रसीद जारी की जाए। इससे शासन को करोड़ों रुपए का राजस्व मिलेगा, साथ ही ट्रैक्टर मालिकों और मजदूरों को रोजगार भी मिलता रहेगा।

निर्माण कार्यों के लिए जरूरी है रेत

स्थानीय लोगों का कहना है कि रेत मकान निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री है और निर्माण कार्य लगातार जारी हैं। ऐसे में सरकार को ऐसी पारदर्शी नीति बनानी चाहिए, जिससे अवैध उत्खनन पर रोक लगे और शासन को भी हर महीने करोड़ों रुपए की आमदनी हो सके।

Dainikyashonnati

Related Articles

Back to top button