राशन के चावल की गुणवत्ता पर सवाल, ग्रामीणों ने लेने से किया इनकार
धनवाही पंचायत के डुगरिया गांव में सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने कहा—पहले हो गुणवत्ता की जांच, फिर हो वितरण
राशन के चावल की गुणवत्ता पर सवाल, ग्रामीणों ने लेने से किया इनकार
Seoni 27 August 2026
सिवनी / घंसौर यशो:- ग्राम पंचायत धनवाही के ग्राम डुगरिया में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित किए जा रहे चावल की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी सामने आई है। ग्रामीणों ने उचित मूल्य की दुकान पर पहुंचे चावल की गुणवत्ता पर आपत्ति जताते हुए खाद्यान्न लेने से इनकार कर दिया। ग्रामीणों की शिकायत के बाद अब राशन व्यवस्था और खाद्यान्न की गुणवत्ता जांच प्रशासन के लिए अहम मुद्दा बन गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उचित मूल्य की दुकान से ऐसा चावल दिया जा रहा है जिसकी गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। उनका आरोप है कि चावल की स्थिति देखकर उन्होंने इसे लेने से मना कर दिया। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से खाद्यान्न का नमूना लेकर निष्पक्ष जांच कराने और जांच के बाद ही आगे वितरण करने की मांग की है।

राशन दुकान पर पहुंचा चावल, गुणवत्ता पर उठे सवाल
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में राशन के चावल की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों द्वारा सामूहिक रूप से आपत्ति दर्ज कराना गंभीर मामला माना जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि राशन उनके परिवारों की जरूरत का महत्वपूर्ण सहारा है। यदि वितरित होने वाले खाद्यान्न की गुणवत्ता ही संतोषजनक नहीं होगी तो पूरी वितरण व्यवस्था की निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों की दो टूक—पहले जांच, फिर वितरण
डुगरिया में ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी है कि अच्छी गुणवत्ता का चावल अलग कर दिए जाने और अपेक्षाकृत खराब गुणवत्ता वाला खाद्यान्न वितरण में लगाए जाने की आशंका की जांच होनी चाहिए। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों की मांग है कि मौके पर उपलब्ध चावल के नमूने लेकर अधिकृत प्रयोगशाला से गुणवत्ता की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जांच से ही स्पष्ट होगा कि खाद्यान्न निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है या नहीं।
निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में
मामला सामने आने के बाद खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि राशन दुकान तक खाद्यान्न पहुंचने से पहले और वितरण के दौरान उसकी गुणवत्ता की जांच की व्यवस्था है, तो फिर आपत्ति की स्थिति क्यों बनी।
जांच में यह भी स्पष्ट होना जरूरी होगा कि संबंधित खाद्यान्न किस स्तर से जारी हुआ, उसकी गुणवत्ता की जांच कब हुई और उचित मूल्य दुकान पर वितरण से पहले खाद्यान्न का सत्यापन किस स्तर पर किया गया।
ग्रामीणों ने जांच और कार्रवाई की मांग की
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि राशन दुकान में उपलब्ध चावल का तत्काल नमूना लिया जाए और उसकी गुणवत्ता की जांच कराई जाए। यदि जांच में खाद्यान्न निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो जिम्मेदारी तय कर संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि गरीब परिवारों के हिस्से का खाद्यान्न किसी भी स्थिति में घटिया गुणवत्ता का नहीं होना चाहिए। शासन की राशन व्यवस्था का उद्देश्य जरूरतमंदों को गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध कराना है, इसलिए इस मामले में पारदर्शी जांच जरूरी है।
अधिकारियों ने कहा—जांच के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
दिलीप डेहरिया, सीईओ, सहकारिता विभाग सिवनी ने कहा, “चावल की गुणवत्ता पर शिकायत मिली है तो जांच कराई जाएगी। ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि जांच में चावल मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया तो संबंधित स्तर पर जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
वहीं डी.आर., सहकारिता विभाग सिवनी ने कहा, “डुगरिया में राशन के चावल की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई है तो मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। खाद्यान्न का नियमानुसार नमूना लेकर गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। यदि चावल गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
फिलहाल डुगरिया में ग्रामीणों द्वारा राशन का चावल लेने से इनकार किए जाने के बाद मामला चर्चा में है। अब गुणवत्ता जांच की रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि ग्रामीणों की आपत्ति कितनी सही है और राशन के चावल की गुणवत्ता निर्धारित मानकों पर खरी उतरती है या नहीं।
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