जंगल कटाई से 5 गांवों पर संकट: आजीविका बचाने सड़क पर उतरे ग्रामीण, SDO ने ज्ञापन लेने से किया इनकार
मंडला के मोहगांव प्रोजेक्ट में फलदार पेड़ों की कटाई से भुखमरी का खतरा, मीडिया से भी उलझीं अधिकारी
मंडला जंगल कटाई मामला
Mandla 24 March 2026
मंडला यशो:- मंडला जिले के बिछिया विकासखंड अंतर्गत मानिकपुर रैयत सहित आधा दर्जन गांवों में अंधाधुंध जंगल कटाई ने सैकड़ों आदिवासी परिवारों की आजीविका पर सीधा संकट खड़ा कर दिया है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि ग्रामीणों के सामने अब जीवन और मरण का प्रश्न खड़ा हो गया है।
मंडला जंगल कटाई मामला मोहगांव प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जहां वन विभाग द्वारा कक्ष क्रमांक 762 और 237 में फलदार और बेशकीमती पेड़ों की कटाई की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह जंगल ही उनके जीवन का आधार है—यहीं से मवेशियों के लिए चारा, घर के लिए जलाऊ लकड़ी और रोजी-रोटी का साधन मिलता है।
“जंगल ही जीवन रेखा, कटाई से भुखमरी तय”
ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह कटाई नहीं रुकी तो आने वाले समय में उनके परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो जाएगी। पीढ़ियों से वे इसी जंगल पर निर्भर हैं और अब उसी जीवन रेखा पर कुल्हाड़ी चलाई जा रही है।
मंडला जंगल कटाई मामला – ज्ञापन देने पहुंचे ग्रामीण, SDO ने खड़े किए हाथ
अपनी मांगों को लेकर ग्रामीण मोहगांव प्रोजेक्ट कार्यालय पहुंचे, लेकिन यहां उन्हें निराशा हाथ लगी। आरोप है कि प्रभारी SDO ने ज्ञापन लेने से ही इनकार कर दिया।
स्थिति तब बदली जब मौके पर मौजूद मीडियाकर्मियों ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद अधिकारी ज्ञापन लेने को तैयार हुईं।
मीडिया पर भड़कीं अधिकारी, कहा—“मसाला चाहिए”
मंडला जंगल कटाई मामला में नया मोड़ तब आया जब SDO ने मीडिया के सवालों पर जवाब देने के बजाय नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कैमरे के सामने बयान देने से इनकार करते हुए कहा कि “मीडिया को तो सिर्फ मसाला चाहिए।”
यह बयान अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि जिस मुद्दे को अधिकारी “मसाला” बता रही हैं, वह ग्रामीणों के जीवन से जुड़ा गंभीर संकट है।
प्रशासनिक जिम्मेदारी पर उठे सवाल
नियमों के अनुसार, किसी भी विभाग का प्रभारी अधिकारी अपने कार्यकाल में सभी दायित्वों के निर्वहन के लिए जिम्मेदार होता है। ऐसे में ज्ञापन लेने से इनकार करना न केवल प्रशासनिक उदासीनता दर्शाता है, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रवैया संवेदनहीनता को दर्शाता है और प्र
शासन को इस पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।




