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शिप्रा पाठक ने अयोध्या से रामेश्वरम की पदयात्रा 105 दिन में की पूर्ण

सिवनी पहुँचने पर हुआ भव्य स्वागात
3952 किमी की पद यात्रा 105 दिनों में पूरी करने वाली भारत की पहली मातृशक्ति शिप्रा पाठक का सिवनी पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत

सिवनी यशो:- सरयू से सागर तक जाने वाली राम जानकी वन गमन पथ की भारत की प्रथम पद यात्री वाटर वूमन शिप्रा पाठक आज शाम सिवनी पहुंची।आपको बताते चलें शिप्रा पाठक ने 27 नवंबर को राम नगरी अयोध्या से अपनी राम जानकी पद यात्रा प्रारंभ की थी जो राम नाम के संकल्प के साथ उतर प्रदेश,मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़,महाराष्ट्र,कर्नाटक में पडऩे वाले राम वन गमन पद चिन्ह के साथ साथ चलकर 11 मार्च को रामेश्वरम पहुंची।शिप्रा ने वन मार्ग में पडऩे वाली विभिन्न प्रमुख नदियों के जल से रामेश्वरम भगवान का जलाभिषेक कर नदियों की स्वच्छता के लिए प्रार्थना की।शिप्रा पाठक की पद यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत को भविष्य में होने वाले जल संकट से बचाने हेतु अध्यात्म जागरण से पर्यावरण जागरण का है।आज शाम सिवनी पहुंचने पर नरेंद्र टॉक के नेतृत्व में सैकड़ों राम भक्तों और मातृ शक्तियों ने शिप्रा पाठक का पुष्पवर्षा के साथ राजश्री पैलेस में स्वागत किया।मातृ शक्तियां भारत में माता जानकी के बाद किसी महिला द्वारा राम जानकी वन गमन पथ की पद यात्रा करते हुए देख भाव विभोर हो उठीं।शिप्रा के आने की कुछ घंटे पहले सूचना मिलने पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गये।देश में वाटर वूमन के नाम से विख्यात शिप्रा पाठक नर्मदा भक्त है और नर्मदा नदी की पैदल परिक्रमा करने के उपरांत वह अपने आध्यात्मिक जीवन का श्रेय भी नर्मदा मां को हो देती हैं।

      स्वागत समारोह के उपरांत शिप्रा पाठक ने सिवनी के राजश्री पैलेस में पत्रकार वार्ता करते हुए कहा आने वाले दिनों में होने वाले जल संकट से भारत को बचाने के लिए नदी,जल,जंगल,पहाड़,वृक्षों को बचाना होगा।उन्होंने कहा अपनी इस पद यात्रा में उन्होंने देखा भगवान राम ने भी अपने वन गमन मार्ग में मुख्य नदियों,पहाड़ों,जंगलों को स्पर्श कर इन्हें पूज्यनीय बताया।शिप्रा ने कहा आज की जागरूकता हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए वरदान साबित होगी।उन्होंने कहा सरकार के ऊपर जिम्मेदारियां थोप कर हम बच नही सकते।इसके लिए हम सभी को जल के महत्त्व और संरक्षण को आपस में मिलकर एक दूसरे को समझाना होगा।उन्होंने कहा कृत्रिम उर्वरक का कम से कम उपयोग करें।अपनी जमीन की जांच कराकर उसे उतना ही पोषण दें जितने की जरूरत हो।शिप्रा ने 3952 किमी की पद यात्रा के दौरान जगह जगह संवाद करके युवा पीढ़ी को राम जानकी के चरित्र को आत्मसात करने की प्रेरणा देते हुए कहा जानकी माता ने सदैव अपने कुल,मर्यादा,स्वाभिमान को सर्वोपरि रखा इसके लिए उन्होंने अयोध्या का यश वैभव छोड़ भगवान राम के साथ बनवास जाना चुना।शिप्रा ने राम जानकी वन मार्ग में लगभग दो दर्जन से ज्यादा राम जानकी वाटिका लगाने की भी संरचना की है जिसमें विलुप्त होती हुई औषधीय पौधे रोपित किए जायेंगे।

    शिप्रा पाठक की यह पद यात्रा भारत में किसी मातृ शक्ति द्वारा अयोध्या से रामेश्वरम तक 3952 किमी की दूरी पैदल नापने वाली पहली यात्रा है।इस यात्रा के माध्यम से शिप्रा को कई रामायणकालीन अनुकूल अनुभूतियां भी हुईं है जिसका लेखन कर राष्ट्र हित में अपनी पुस्तक लिखकर राष्ट्र को समर्पित करेंगी।शिप्रा इससे पहले उत्तर प्रदेश के गोमती नदी की पद यात्रा करने वाली भारत की पहली मातृ शक्ति हैं।शिप्रा का कहना है जल संकट को दूर करने कर लिए सर्व प्रथम नदियों को बचाना होगा।नदी किनारे सरिया सीमेंट बजरी निर्माण बिलकुल बंद करना होगा।नदी के प्राकृतिक जल श्रोत खोलकर नदियों की अविरल धारा बहाने हेतु कार्य करना होगा।नदियों में प्रवाहित होने वाले रसायनिक तत्व बंद करने होंगे।यहां उपस्थित बड़ी संख्या में मातृ शक्तियों को संबोधित करते हुए वाटर वूमन ने कहा आप सभी अपने बच्चो को राम जानकी के चरित्र के बारे में बताएं उन्हें रामायण का ज्ञान कराएं।उन्हें ये समझाएं कि कैसे राम ने अयोध्या का यश वैभव छोड़कर वन मार्ग में जानकी के समाज के हर वर्ग को गले लगाया।उन्होंने यह बताया की आत्मविश्वास हो तो कठिन समय भी सरलता से कट जाता है।उन्होंने कहा आज के बच्चो के चरित्र में माता जानकी और पुरुषोत्तम राम के गुणों का समर्पण होना चाहिए।

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