राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और बचपन बचाओं आंदोलन की छपामार कार्यवाही
इसी प्रकार का एक मामला मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से सामने आया है जहाँ एक शराब की फैक्ट्री में 39 लड़के और 19 लड़कियों से तेज अल्कोहल से संबंधित कार्य कराया जा रहा था जिसकी गवाही बच्चो के अल्कोहल से जले हुये हाथ दे रहे है । इन बच्चों को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने छपामार कार्यवाही कर बचाया आज रविवार को मुक्त कराया । राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (National Commission for Protection of Child Rights) ने स्वैच्छिक कार्रवाई संघ जिसे बचपन बचाओं आंदोलन के नाम से ख्याति प्राप्त है के साथ मिलकर यह कार्यवाही की है ।
स्कूल बस में ले जाया जाता था और वे प्रतिदिन 12-14 घंटे काम करते थे
बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) (Bachpan Bachao Andolan (BBA) ने बताया कि एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो के नेतृत्व में एक टीम ने रायसेन की सोम डिस्टिलरी (som distilleries raysen) से 58 बच्चों, 19 लड़कियों और 39 लड़कों को मुक्त कराया है ।
उन्होंने बताया कि इन छोटे छोटे "बच्चों के हाथ कठोर रसायनों और अल्कोहल के संपर्क में आने से जल गए थे। उन्हें उनके नियोक्ता द्वारा प्रतिदिन एक स्कूल बस में ले जाया जाता था और वे प्रतिदिन 12-14 घंटे काम करते थे।"
बच्चों की हाथ की स्किन झुलसी मिली
बाल संरक्षण आयोग की टीम ने आज सोम डिस्टलरी में औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान 50 नाबालिग बच्चे शराब बनाते हुए मिले थे। इनमें 20 नाबालिग लड़कियों को भी शराब बनाने के काम में लगाया गया था। बाल आयोग को निरीक्षण के दौरान बच्चों की हाथ की स्किन झुलसी मिली थी।
आबकारी विभाग की नाक के नीचे नाबालिगों से काम करवाया जा रहा था। पूरे मामले में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कार्रवाई का आदेश दिया है।