जन सरोकार, निर्भीक विचार और सौहार्द की मिसाल थे आशु भैया
Ashutosh Verma Ashu Bhaiya Seoni : द्वितीय पुण्यतिथि पर विशेष
मूलतः राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़े आशु भैया ( Ashutosh Verma Ashu Bhaiya Seoni) केवल एक राजनेता भर नहीं थे। वे वकील, पत्रकार और जनचिंतक के रूप में भी अपनी अलग पहचान रखते थे। सक्रिय कांग्रेस राजनीति में रहते हुए भी उन्होंने सदैव व्यापक जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता दी। किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या जनविरोधी निर्णय के विरुद्ध वे तथ्यात्मक और निर्भीक ढंग से अपनी बात रखने के लिए जाने जाते थे।
Ashutosh Verma Ashu Bhaiya Seoni : विकास के मुद्दों पर मुखर आवाज
जिले के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर (Ashutosh Verma Ashu Bhaiya Seoni) आशु भैया ने निरंतर संघर्ष किया। गोटेगांव से रामटेक रेल लाइन के लिए उन्होंने पोस्टकार्ड अभियान चलाकर जनसमर्थन खड़ा किया, जिसके परिणामस्वरूप इस परियोजना के सर्वे को स्वीकृति मिली। इसी प्रकार नगझर से खैरीटेक बायपास निर्माण को लेकर उन्होंने अपनी ही पार्टी की सरकार के समक्ष भी मजबूती से आवाज उठाई और अंततः इस योजना को स्वीकृति दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सिवनी विधानसभा से चुनाव हारने के बावजूद उन्होंने कुरई को तहसील का दर्जा दिलाने के लिए अपनी ही सरकार के सामने लंबा संघर्ष किया। इसके अतिरिक्त पेंच परियोजना की नहर सिवनी तक लाने, सिवनी को संभाग बनाने, मेडिकल कॉलेज और कृषि महाविद्यालय की स्थापना जैसे अनेक अधोसंरचनात्मक विकास कार्यों के लिए वे अपने अंतिम समय तक लगातार पत्राचार और जनसंवाद के माध्यम से सक्रिय रहे।
परिसीमन के विरोध में तथ्यपूर्ण संघर्ष
परिसीमन के दौरान सिवनी संसदीय क्षेत्र और घंसौर विधानसभा के विलोपन का उन्होंने जोरदार विरोध किया। परिसीमन आयोग के समक्ष जिले की भौगोलिक परिस्थितियों और जनभावनाओं के आधार पर उन्होंने सशक्त तर्क प्रस्तुत किए। इससे पहले भी परिसीमन के मुद्दे पर जनमंच के बैनर तले हुए आंदोलन में उनकी भूमिका अग्रणी रही।
साम्प्रदायिक सौहार्द के सजग प्रहरी
आशु भैया (Ashutosh Verma Ashu Bhaiya Seoni) सदैव साम्प्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब के पक्षधर रहे। जिले में जब भी सामाजिक तनाव की स्थिति उत्पन्न होती, वे सक्रिय होकर दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास करते। कई बार परिस्थितियाँ जटिल रहीं, परंतु उनकी बात दोनों पक्ष सम्मानपूर्वक अवश्य सुनते थे। यही कारण था कि प्रशासन भी ऐसे संवेदनशील अवसरों पर अन्य सामाजिक हस्तियों के साथ आशु भैया की उपस्थिति को महत्वपूर्ण मानता था।
साहित्य और संस्कृति से भी गहरा जुड़ाव
सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने के उद्देश्य से उन्होंने अपने मित्रों के साथ “सद्भाव” नामक सामाजिक-साहित्यिक संस्था की स्थापना की। इस संस्था के माध्यम से लगभग दो दशकों तक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और मुशायरे का संयुक्त आयोजन होता रहा, जो जिले की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।
राजनीति से परे रिश्तों की गर्माहट
विचारों से वे भले ही कट्टर कांग्रेसी थे, किंतु उनके संबंध सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं से आत्मीय रहे। एक अनुभवी और संतुलित सलाहकार के रूप में उनकी पहचान थी। यही कारण था कि विभिन्न दलों के नेता भी बिना किसी संकोच के उनसे सलाह लेने पहुंचते थे और वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपने अनुभव के आधार पर मार्गदर्शन देते थे।
‘राजनीतिक डायरी’ की यादें
आशु भैया (Ashutosh Verma Ashu Bhaiya Seoni ) की एक विशेष पहचान उनकी साप्ताहिक राजनीतिक डायरी भी थी, जिसे वे अपने अखबार “दर्पण झूठ न बोले” के लिए नियमित रूप से लिखते थे। हर मंगलवार को प्रकाशित होने वाली यह डायरी जिले की राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ और विश्लेषण का प्रमाण होती थी। उल्लेखनीय है कि वे इसे स्वयं कंप्यूटर पर टाइप करते थे, जबकि उन्हें टाइपिंग का अधिक अभ्यास नहीं था। गोपनीयता बनाए रखने के लिए वे घंटों बैठकर स्वयं ही इसे तैयार करते थे और प्रशासन अथवा जनप्रतिनिधियों को लिखे जाने वाले पत्र भी स्वयं टाइप करते थे।
Ashutosh Verma Ashu Bhaiya Seoni : स्मृतियों में जीवित एक व्यक्तित्व
आज जब आशु भैया हमारे बीच नहीं हैं, तब उनके परिवार, मित्रों, शुभचिंतकों और उनकी राजनीतिक डायरी के पाठकों को उनकी कमी गहराई से महसूस होती है। जनहित के मुद्दों पर उनकी निर्भीक आवाज, सामाजिक सौहार्द के प्रति उनका समर्पण और जिले के विकास के लिए उनका संघर्ष सिवनी की स्मृतियों में लंबे समय तक जीवित रहेगा।
आशु भैया : संक्षिप्त परिचय
▪ नाम – आशुतोष वर्मा (आशु भैया) (Ashutosh Verma Ashu Bhaiya Seoni)
▪ पहचान – वरिष्ठ कांग्रेस नेता, अधिवक्ता, पत्रकार
▪ विशेषता – जनहित के मुद्दों पर निर्भीक और तथ्यपूर्ण आवाज
▪ प्रमुख पहल – गोटेगांव-रामटेक रेल लाइन अभियान, नगझर-खैरीटेक बायपास, कुरई तहसील आंदोलन
▪ सामाजिक योगदान – “सद्भाव” संस्था की स्थापना, 20 वर्षों तक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरा
▪ लेखन – साप्ताहिक राजनीतिक डायरी
आज उनकी द्वितीय पुण्यतिथि पर सिवनी जिले के लोग उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके द्वारा स्थापित मूल्यों और जनसेवा की परंपरा को स्मरण कर रहे हैं।





