सिवनीमध्यप्रदेश

जब व्यवस्था सोती रही, तब गांव जाग उठा: बच्चों की सुरक्षा के लिए ग्रामीणों ने श्रमदान से गड्ढामुक्त की सड़क

चक्कीखमरिया–सिमरिया मार्ग पर किसानों, स्कूल प्रबंधन और पंचायत ने पेश की मिसाल, प्रशासन से स्थायी सड़क निर्माण की मांग

ग्रामीणों ने श्रमदान से गड्ढामुक्त की चक्कीखमरिया–सिमरिया सड़क, बच्चों की सुरक्षा के लिए पेश की मिसाल

सिवनी/कुरई यशो  :- प्रशासनिक उदासीनता के बीच कुरई जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत चक्कीखमरिया – सिमरिया तक जाने वाले जर्जर मार्ग पर ग्रामीणों ने जनसहभागिता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए।

वर्षों से गड्ढों में तब्दील इस सड़क की मरम्मत नहीं होने पर किसानों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्कूल प्रबंधन ने स्वयं आगे आकर श्रमदान और अपने संसाधनों से सड़क को गड्ढामुक्त कर बच्चों और ग्रामीणों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया।

यह मार्ग प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों, किसानों और ग्रामीणों के आवागमन का प्रमुख रास्ता है। सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों के कारण आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता था। बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर हो गई थी, जिससे बच्चों को स्कूल पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

ग्रामीणों ने संभाली जिम्मेदारी

जब लंबे समय तक संबंधित विभागों की ओर से सड़क सुधार की कोई पहल नहीं हुई तो चक्कीखमरिया के किसानों ने अपने खर्च पर ट्रैक्टर लगाकर सड़क की मरम्मत शुरू कर दी।

इस जनहित अभियान में सिमरिया ग्राम पंचायत की सरपंच ने जेसीबी मशीन उपलब्ध कराई, जिससे गड्ढों को भरने और सड़क को समतल करने का कार्य तेजी से पूरा किया गया।

स्कूल प्रबंधन ने निभाई सामाजिक जिम्मेदारी

इस अभियान में सरस्वती शिशु मंदिर के प्राचार्य विनोद चौरसिया ने आर्थिक सहयोग दिया, जबकि पंडित जवाहरलाल नेहरू हाई सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य अखिलेश तिवारी ने आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर सहयोग किया।

चक्कीखमरिया ग्राम पंचायत के सरपंच ने भी अपना निजी ट्रैक्टर उपलब्ध कराकर अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

“बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले”

ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधि समय पर सड़क की मरम्मत कराते तो उन्हें स्वयं यह जिम्मेदारी नहीं उठानी पड़ती।

बच्चों की सुरक्षा और आम नागरिकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए गांव ने अपने संसाधनों और श्रम से सड़क को चलने योग्य बनाया।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से चक्कीखमरिया–सिमरिया सड़क का शीघ्र स्थायी निर्माण कराने की मांग की है, ताकि हर वर्ष ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। उनका कहना है कि श्रमदान से फिलहाल समस्या का अस्थायी समाधान हुआ है, लेकिन स्थायी राहत केवल गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण से ही मिल सकती है।

ग्रामीणों का संदेश: “बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले है। जब जिम्मेदार विभाग आगे नहीं आए, तब गांव ने स्वयं जिम्मेदारी निभाई। अब प्रशासन स्थायी समाधान सुनिश्चित करे।”

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