“38 करोड़ के सांदीपनि विद्यालय में अनुशासन पर सवाल: क्लासरूम में रील, छात्रों के विवाद से अभिभावक चिंतित”
करीब 38 करोड़ की लागत से बने विद्यालय में निगरानी व्यवस्था पर सवाल, प्राचार्य की कार्यप्रणाली को लेकर भी उठ रही आवाजें
सांदीपनि विद्यालय छपारा में अनुशासन पर सवाल, क्लासरूम में रील और छात्रों के विवाद से अभिभावक चिंतित
Seoni 31 July 2026
सिवनी / छपारा यशो:- प्रदेश में बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के उद्देश्य से उत्कृष्ट विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर सीएम राइज और सांदीपनि विद्यालयों के रूप में विकसित किया गया है।
इन विद्यालयों के निर्माण और सुविधाओं पर शासन द्वारा बड़ी राशि खर्च की गई है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, अनुशासन और सुरक्षित परिसर उपलब्ध हो सके।
हालांकि, छपारा नगर स्थित शासकीय सांदीपनि विद्यालय में सामने आ रही कथित अनुशासनहीनता की घटनाओं ने विद्यालय की प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

करीब 38 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस विद्यालय में एलकेजी से लेकर कक्षा 12वीं तक लगभग 1500 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत बताए जा रहे हैं। इतने बड़े शिक्षण संस्थान में विद्यार्थियों की गतिविधियों की निगरानी, अनुशासन बनाए रखना और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना विद्यालय प्रबंधन के लिए बड़ी जिम्मेदारी है।
लेकिन वर्तमान में सोशल मीडिया रील, मोबाइल फोन के उपयोग और छात्रों के बीच विवाद की कथित घटनाओं को लेकर अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों में चिंता का माहौल है।
क्लासरूम में छात्र बना रहे सोशल मीडिया रील
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालय के कुछ विद्यार्थियों द्वारा कक्षा अथवा विद्यालय परिसर में सोशल मीडिया के लिए रील बनाए जाने की बात सामने आई है। इन रीलों को बाद में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किए जाने की चर्चा है।
बताया जा रहा है कि कुछ वीडियो में गैंगस्टर संस्कृति से जुड़े संवाद, आपत्तिजनक भाषा अथवा अनुचित प्रस्तुति दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।
विद्यालय परिसर में इस प्रकार की गतिविधियां सामने आना इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि स्कूल का प्राथमिक उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अनुशासन, नैतिक मूल्यों और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का वातावरण उपलब्ध कराना है।
अभिभावकों का सवाल है कि यदि विद्यार्थी कक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर वीडियो बना रहे हैं तो विद्यालय की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
विद्यालय में मोबाइल फोन के उपयोग को लेकर स्पष्ट नियम और उनका पालन सुनिश्चित कराने की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
छात्रों के बीच बढ़ रहे विवाद, अभिभावकों में चिंता
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, विद्यालय के विद्यार्थियों के बीच विवाद की घटनाओं को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। कुछ मामलों में विवाद विद्यालय परिसर से बाहर तक पहुंचने और पुलिस थाने तक मामला जाने की बात भी सामने आई है।
गत दिवस गुरुवार को भी विद्यालय के विद्यार्थियों के बीच विवाद होने और विद्यालय परिसर से बाहर सड़क तक लड़ाई-झगड़े की स्थिति बनने की चर्चा है।
बताया गया कि सड़क से गुजर रहे लोगों ने घटना को देखा और कुछ लोगों द्वारा इसे मोबाइल फोन में रिकॉर्ड भी किया गया।
यदि विद्यालय के विद्यार्थी खुले तौर पर विद्यालय परिसर अथवा उसके आसपास विवाद करते हैं, तो यह केवल अनुशासन का विषय नहीं बल्कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और विद्यालय की छवि से जुड़ा गंभीर मामला भी बन जाता है।
विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल
विद्यालय में सामने आ रही कथित घटनाओं के बाद प्रबंधन की निगरानी और अनुशासन व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 1500 से अधिक विद्यार्थियों वाले संस्थान में प्रत्येक विद्यार्थी की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी के लिए पर्याप्त व्यवस्था होना आवश्यक है।
सूत्रों के अनुसार, पूर्व में भी कुछ विद्यार्थियों द्वारा विद्यालय परिसर में ऐसी सामग्री लाने की चर्चा रही है, जिसका उपयोग विवाद अथवा झगड़े की स्थिति में खतरनाक हो सकता था।
हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। यदि ऐसी शिकायतें या घटनाएं सामने आती हैं तो विद्यालय प्रबंधन और संबंधित शिक्षा अधिकारियों द्वारा इसकी गंभीरता से जांच किया जाना आवश्यक है।
अभिभावकों का कहना है कि किसी भी विद्यालय में अनुशासनहीनता की छोटी घटना को भी नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते समझाइश, काउंसलिंग और आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई के माध्यम से स्थिति को नियंत्रित किया जाना चाहिए।
प्राचार्य की जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था पर भी चर्चा
विद्यालय में अनुशासन बनाए रखने के साथ ही शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना विद्यालय प्रबंधन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
ऐसे में लगातार सामने आ रही कथित घटनाओं को लेकर प्राचार्य की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि कक्षाओं में मोबाइल फोन के माध्यम से वीडियो बनाए जा रहे हैं अथवा विद्यार्थियों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है, तो विद्यालय की आंतरिक निगरानी व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक है।
हालांकि, विद्यालय प्रबंधन अथवा प्राचार्य का इस पूरे मामले पर आधिकारिक पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है, ताकि लगाए जा रहे आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
छोटे बच्चों पर पड़ सकता है नकारात्मक प्रभाव
सांदीपनि विद्यालय में एलकेजी से लेकर 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। ऐसे में बड़े विद्यार्थियों के बीच होने वाली अनुशासनहीन गतिविधियों का प्रभाव छोटे बच्चों पर पड़ने की आशंका भी अभिभावकों ने जताई है।
अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों का प्रवेश विद्यालय में इसलिए कराया है कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित और अनुशासित वातावरण मिल सके।
यदि विद्यालय परिसर में मारपीट, आपत्तिजनक भाषा या सोशल मीडिया के लिए अनुचित गतिविधियां बढ़ती हैं, तो इसका विद्यार्थियों के मानसिक और शैक्षणिक वातावरण पर विपरीत असर पड़ सकता है।
गणमान्य नागरिकों और अभिभावकों ने की जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर विद्यालय की अनुशासन व्यवस्था की समीक्षा कराने की मांग की है।
साथ ही विद्यालय परिसर में मोबाइल फोन के उपयोग, विद्यार्थियों की निगरानी, सीसीटीवी व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंध और शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया की जांच किए जाने की मांग भी उठाई जा रही है।
अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय में केवल पढ़ाई की गुणवत्ता ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, अनुशासित और सकारात्मक वातावरण भी उतना ही जरूरी है। यदि कहीं कोई कमी है तो उसे समय रहते दूर किया जाना चाहिए।
अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली की समीक्षा के साथ विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित एवं अनुशासित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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