मध्यप्रदेशसिवनी

अध्यक्ष की कुर्सी, कर्मचारियों पर पकड़ नहीं! विधायक के दरबार में पहुंची फरियाद, नगरीय सियासत में भी घमासान

चार दिन वेतन लेट क्या हुआ, हड़ताल पर कर्मचारी; अपनी समस्याएं लेकर विधायक की चौखट पर पहुंच रहे अधीनस्थ, नगर में चर्चाओं का दौर

सिवनी में अध्यक्ष की पकड़ पर सवाल, कर्मचारी विधायक के पास पहुंचे; नगरीय नेताओं के विवाद की भी चर्चा

Seoni 28 August 2026
सिवनी यशो:- नगर की राजनीति और संस्थागत व्यवस्थाओं को लेकर इन दिनों तरह-तरह की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच सुनाई दे रही हैं। सबसे ज्यादा चर्चा उस संस्थान की है, जहां अध्यक्ष और अधीनस्थ कर्मचारियों के बीच समन्वय का अभाव अब खुलकर सामने आने की बात कही जा रही है।

चर्चा है कि संस्थान के कुछ कर्मचारी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अध्यक्ष के पास जाने के बजाय सीधे विधायक के पास पहुंच रहे हैं। इधर, अध्यक्ष की ओर से यह बात कही जा रही है कि महज चार दिन वेतन मिलने में देरी हुई और कर्मचारी हड़ताल पर चले गए, जबकि उनकी बात कोई सुनने को तैयार नहीं है।

अब सवाल यही है कि जब किसी संस्थान के अधीनस्थ कर्मचारी ही अध्यक्ष की बात को तवज्जो नहीं दे रहे हैं और अपनी समस्याओं के लिए सीधे राजनीतिक नेतृत्व का दरवाजा खटखटा रहे हैं, तो फिर अध्यक्ष के रूप में उनकी स्वीकार्यता और प्रभाव को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि यहां एक दूसरा पहलू भी चर्चा में है। बताया जाता है कि उक्त अध्यक्ष जनता अथवा संस्थान के प्रतिनिधियों द्वारा निर्वाचित नहीं हैं, बल्कि शासन स्तर से मनोनीत किए गए हैं। ऐसे में राजनीतिक और संस्थागत नेतृत्व के बीच अधिकार, स्वीकार्यता और संवाद का संतुलन कितना मजबूत है—यह सवाल भी अब चर्चाओं में शामिल हो गया है।

बंदरबांट की चर्चा से गरमाया नगरीय सियासी माहौल

इधर नगरीय क्षेत्र में नेताओं के बीच कथित तौर पर बंदरबांट को लेकर हुए विवाद की चर्चा भी तेजी से फैल रही है। नगर में चल रही चर्चाओं के मुताबिक विवाद इतना बढ़ गया कि नेताओं के बीच मारपीट और अश्लील गाली-गलौज तक की नौबत आ गई।

हालांकि बाद में वरिष्ठ नेताओं की समझाइश के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौते की तस्वीर सामने आई। बताया जाता है कि इसके बाद दोनों को साथ घूमते हुए भी देखा गया। धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर लाइव वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने को लेकर भी नगर में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।

अगले दिन पांच-पांच हजार और रसगुल्ले के डिब्बे की चर्चा

चर्चाओं का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि विवाद के अगले दिन कथित तौर पर संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति की ओर से पांच-पांच हजार रुपये और रसगुल्ले का एक-एक डिब्बा पहुंचाए जाने की बात कही जा रही है।

इन चर्चाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन नगर में यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग अपने-अपने स्तर पर इसके मायने निकाल रहे हैं और सवाल कर रहे हैं कि आखिर विवाद के बाद अचानक मिठास घोलने की जरूरत क्यों पड़ी?

सवाल कई, जवाब का इंतजार

एक तरफ कर्मचारी और अध्यक्ष के बीच कथित असहमति, दूसरी तरफ नगरीय राजनीति में बंदरबांट को लेकर विवाद की चर्चाएं—इन दोनों घटनाक्रमों ने नगर की राजनीतिक फिजा को गर्म कर दिया है।

अब देखना यह है कि इन चर्चाओं पर संबंधित पक्ष सामने आकर अपना पक्ष रखते हैं या फिर नगर में चल रही चर्चाएं यूं ही राजनीतिक गलियारों की गूंज बनी रहेंगी।

हर सवाल का जवाब—‘बदनाम करने की साजिश’?

नगर में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि संबंधित अध्यक्ष के कुछ करीबी सलाहकार उन्हें यह समझाइश दे रहे हैं कि मीडिया या सोशल मीडिया में उनके कामकाज को लेकर कोई खबर अथवा टिप्पणी सामने आए तो उसे बदनाम करने की साजिश बताया जाए।

अब सियासी गलियारों में सवाल यह उठ रहा है कि यदि किसी संस्थान की व्यवस्था, कर्मचारियों की नाराजगी या निर्णयों को लेकर सवाल सामने आते हैं तो हर सवाल को साजिश का नाम देना कितना उचित है? क्या आलोचना का जवाब आरोप से दिया जाएगा या फिर सवालों का जवाब कामकाज और तथ्यों के जरिए दिया जाएगा?

चर्चा तो यह भी है कि यदि व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है और निर्णय नियमों के मुताबिक हो रहे हैं, तो फिर सवालों से बचने के बजाय सवालों के तथ्यात्मक जवाब सामने रखना ही सबसे मजबूत जवाब हो सकता है।

आखिर लोकतंत्र में मीडिया का सवाल दुश्मनी नहीं, बल्कि व्यवस्था को आईना दिखाने का माध्यम माना जाता है। अब देखना यह है कि संबंधित अध्यक्ष और उनके सलाहकार आईने में दिखाई दे रही तस्वीर सुधारने पर जोर देते हैं या आईने को ही दोषी ठहराते हैं।

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https://www.hindigeetmala.net/song/har_sawal_ka_jawab.htm 

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