राहुल गांधी 30 साल विलंब से कर रहे राजनीति, बालाघाट दौरा संवेदना नहीं राजनीतिकरण: उदय प्रताप सिंह
बालाघाट दौरे को लेकर मंत्री उदय प्रताप सिंह का राहुल गांधी पर तीखा हमला, बोले- नक्सल हिंसा के दौर में नहीं जताई संवेदना, अब बदली परिस्थितियों में दौरे को दिया जा रहा राजनीतिक रंग
राहुल गांधी के बालाघाट दौरे पर उदय प्रताप का हमला
Bhopal 30 September 2026
भोपाल यशो:- लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आगामी बालाघाट दौरे को लेकर मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री उदय प्रताप सिंह ने तीखा राजनीतिक हमला बोला है। राहुल गांधी 1 अक्टूबर को बालाघाट के प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में जाकर मृत बच्चों के परिजनों से मुलाकात करने वाले हैं।
मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि बालाघाट में वर्ष 1999 में नक्सलियों द्वारा तत्कालीन सरकार के एक मंत्री की निर्मम हत्या के दौरान राहुल गांधी ने वहां जाकर संवेदना व्यक्त करने की चिंता नहीं की। उन्होंने कहा कि उस समय राहुल गांधी की उम्र भी कम नहीं थी और उनकी माताजी उस समय सक्रिय रूप से राजनीति संभाल रही थीं।
उन्होंने कहा कि जब बालाघाट में नक्सलवाद चरम पर था और लगातार हिंसक घटनाएं हो रही थीं, तब भी राहुल गांधी ने वहां जाकर पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त नहीं की। आज बीमारी और विपरीत मौसम की परिस्थितियों के बीच बालाघाट जाने को राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।
नक्सलवाद पर नियंत्रण के बाद बदला बालाघाट का परिवेश
उदय प्रताप सिंह ने कहा कि उन्होंने स्वयं प्रभारी मंत्री के रूप में बालाघाट के हालात को करीब से देखा है। उनके अनुसार केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण हुआ, जिसके बाद प्रशासनिक व्यवस्थाएं और अधिकारी उन क्षेत्रों तक पहुंच सके तथा ग्रामीण और आदिवासी समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम तेज हुआ।
उन्होंने कहा कि बैगा समाज के ऐसे लोग, जो पहले बाजारों और कस्बों तक नहीं पहुंच पाते थे, उन्हें भी मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में काम किया गया है।
“राहुल गांधी का दौरा संवेदना के लिए नहीं, राजनीतिकरण के लिए”
मंत्री ने आरोप लगाया कि बदले हुए परिवेश में सकारात्मक भूमिका निभाने के बजाय राजनीतिक वातावरण को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का बालाघाट जाना संवेदना के लिए नहीं बल्कि राजनीतिकरण के लिए है।
उदय प्रताप सिंह ने कहा कि यदि वास्तव में संवेदना की भावना होती तो अतीत में बालाघाट में हुई गंभीर घटनाओं के समय भी राहुल गांधी वहां पहुंचते और पीड़ित परिवारों से मिलते।
“2014 के बाद आंतरिक सुरक्षा पर गंभीरता से हुआ काम”
मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने गंभीरता से काम किया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से भी प्रभावी कार्रवाई हुई है।
उन्होंने कहा कि जब सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहे हैं, तब इन बदलावों की प्रशंसा और समर्थन होना चाहिए, न कि राजनीतिक कारणों से वातावरण को प्रभावित करने का प्रयास।
“जब बोलने का समय होता है, तब बोलते नहीं; करने का समय आता है तो करते नहीं”
राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उदय प्रताप सिंह ने कहा कि वे आमतौर पर राहुल गांधी के बारे में कम बोलने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा, “जब उनके बोलने का समय होता है, तब वे बोलते नहीं हैं और जब करने का समय होता है, तब वे करते नहीं हैं। हर चीज वे विलंब से कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि जो काम 25, 26 या 28 वर्ष की उम्र में एक युवा राजनेता करता है, राहुल गांधी वही काम 56-57 वर्ष की उम्र में कर रहे हैं। मंत्री ने इसे राहुल गांधी की राजनीति में लगभग 30 वर्ष का विलंब बताया।
“चुनाव के समय नजर आते हैं कांग्रेस नेता”
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उदय प्रताप सिंह ने कहा कि चुनाव आते ही राहुल गांधी नजर आते हैं और चुनाव समाप्त होने के बाद लंबे समय तक विदेश में रहते हैं। उन्होंने इसे “चुनावी टूरिज्म” करार दिया और कहा कि उनके आने पर सरकार को उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी अतिरिक्त चिंता करनी पड़ती है।
मंत्री ने कहा कि कांग्रेस को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय जनता से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
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