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गधे खा रहे च्यवनप्राश, होशियारों को नहीं मिल रही घास! गधे के नाम नर्सिंग सर्टिफिकेट ने MP में मचाया हड़कंप

‘DONKEY’ के नाम जारी हुआ प्रोविजनल नर्सिंग रजिस्ट्रेशन, गधे की फोटो और कथित फर्जी दस्तावेजों से आवेदन का दावा; ऑनलाइन सत्यापन सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

गधे के नाम नर्सिंग सर्टिफिकेट! MP में DONKEY के रजिस्ट्रेशन से हड़कंप

भोपाल यशो :- मध्यप्रदेश में नर्सिंग रजिस्ट्रेशन की ऑनलाइन व्यवस्था ने ऐसा कारनामा सामने ला दिया है, जिसे देखकर अच्छे-अच्छे होशियार भी माथा पकड़ लें। मामला है एक ऐसे कथित नर्सिंग अभ्यर्थी का, जिसके नाम के स्थान पर ‘DONKEY’ और पिता के नाम के स्थान पर ‘DONKEY FATHER’ दर्ज है। हैरानी की बात यह कि इसी नाम से नर्सिंग रजिस्ट्रेशन का प्रोविजनल प्रमाण-पत्र जारी होने का मामला सामने आया है।

मामले ने नर्सिंग रजिस्ट्रेशन की ऑनलाइन व्यवस्था और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गधे की फोटो, नाम DONKEY और फिर भी बन गया सर्टिफिकेट!

मामले में NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार का दावा है कि उन्होंने मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के ऑनलाइन पोर्टल की जांच करने के लिए जानबूझकर एक गधे की फोटो अपलोड की। आवेदन में नाम DONKEY और पिता के नाम में DONKEY FATHER जैसे विवरण दर्ज किए गए।

परमार के अनुसार, ऐसे दस्तावेज भी अपलोड किए गए जिनसे किसी वास्तविक नर्सिंग योग्यता का प्रमाण नहीं मिलता था। इसके बावजूद निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से प्रोविजनल नर्सिंग रजिस्ट्रेशन प्रमाण-पत्र जारी हो गया।

यानी जिस सिस्टम से असली नर्सिंग अभ्यर्थियों की पहचान और योग्यता जांचने की उम्मीद की जाती है, उसी सिस्टम में गधे की फोटो पहुंची और मामला प्रमाण-पत्र तक जा पहुंचा।

नाम से लेकर पिता तक… सब DONKEY!

सामने आए प्रमाण-पत्र में आवेदक के नाम के स्थान पर DONKEY दर्ज है। पिता के नाम वाले कॉलम में DONKEY FATHER लिखा हुआ दिखाई देता है।

प्रमाण-पत्र पर मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल का नाम, पंजीयन क्रमांक, डिजिटल हस्ताक्षर और वैधता संबंधी विवरण भी दर्ज हैं।

यही वजह है कि मामला अब महज मजाक का विषय नहीं रह गया है। सवाल सीधे उस ऑनलाइन सिस्टम पर है, जो किसी व्यक्ति की पहचान और पेशेवर योग्यता से जुड़े रजिस्ट्रेशन को संभालता है।

‘गधे का रजिस्ट्रेशन हो सकता है तो होशियारों का क्या होगा?’

रवि परमार ने इसी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि यदि गधे की फोटो और कथित रूप से अमान्य दस्तावेजों के आधार पर प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन प्रमाण-पत्र जारी हो सकता है, तो वास्तविक अभ्यर्थियों के दस्तावेजों और पहचान का सत्यापन किस स्तर पर किया जा रहा है?

उनके अनुसार, यह मामला नर्सिंग रजिस्ट्रेशन की विश्वसनीयता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

काउंसिल बोली- यह प्रोविजनल सर्टिफिकेट है

मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल की अध्यक्ष डॉ. वेणु कुशवाहा ने मामले में स्पष्ट किया है कि संबंधित प्रमाण-पत्र प्रोविजनल है और काउंसिल के सत्यापन के अधीन है।

काउंसिल के अनुसार, आवेदक द्वारा गलत अथवा फर्जी जानकारी प्रस्तुत करना धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। ऑनलाइन व्यवस्था का उद्देश्य रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और बिचौलियों की भूमिका कम करना है।

काउंसिल के मुताबिक आवेदक ऑनलाइन दस्तावेज अपलोड करता है और प्रोविजनल प्रमाण-पत्र प्राप्त करता है, जबकि प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रामाणिकता का सत्यापन आगे किया जाता है।

मामला सामने आने के बाद अतिरिक्त सिस्टम चेक लागू करने के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया रोकने की बात भी सामने आई है।

सर्टिफिकेट मिला, लेकिन स्थायी नर्सिंग लाइसेंस नहीं

यहां यह अंतर समझना भी जरूरी है कि सामने आया दस्तावेज प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन प्रमाण-पत्र बताया गया है। इससे यह साबित नहीं होता कि किसी गधे को स्थायी नर्सिंग लाइसेंस मिल गया या उसने इस प्रमाण-पत्र के आधार पर किसी अस्पताल में नौकरी हासिल कर ली।

लेकिन सवाल फिर भी बड़ा है—जब प्रारंभिक ऑनलाइन प्रक्रिया में ही इतनी असामान्य जानकारी के साथ प्रमाण-पत्र जनरेट हो गया, तो सिस्टम की शुरुआती जांच कितनी मजबूत है?

नर्सिंग व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

मध्यप्रदेश में नर्सिंग शिक्षा और नर्सिंग कॉलेजों से जुड़े विवाद पहले भी जांच और न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच चुके हैं। ऐसे में रजिस्ट्रेशन पोर्टल से जुड़ा यह मामला व्यवस्था के एक और महत्वपूर्ण हिस्से पर सवाल खड़े करता है।

मामला अब यह जानने का है कि ‘DONKEY’ के नाम से आवेदन आखिर किस-किस डिजिटल जांच से गुजरकर प्रमाण-पत्र तक पहुंचा और किस स्तर पर उसे रोका नहीं गया।

अब सिस्टम से चाहिए इन सवालों का जवाब

  • गधे की फोटो वाला आवेदन सिस्टम में आगे कैसे बढ़ा?
  • DONKEY और DONKEY FATHER जैसे नामों पर सिस्टम ने आपत्ति क्यों नहीं की?
  • पहचान और शैक्षणिक दस्तावेजों का प्रारंभिक सत्यापन कैसे हुआ?
  • प्रमाण-पत्र जारी करने से पहले दस्तावेजों की वास्तविक जांच क्यों नहीं हुई?
  • क्या ऐसे और आवेदन भी बिना पर्याप्त जांच के प्रोविजनल रूप से जारी हुए हैं?
  • अतिरिक्त सिस्टम चेक की जरूरत आखिर अब क्यों पड़ी?

गधे खा रहे च्यवनप्राश और होशियारों को घास नहीं मिल रही—यह सिर्फ व्यंग्य नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जहां ‘DONKEY’ नाम से भी नर्सिंग रजिस्ट्रेशन का प्रमाण-पत्र निकलने का दावा सामने आ गया। अब असली परीक्षा काउंसिल की जांच की है कि सिस्टम में यह कारनामा हुआ कैसे और इसके लिए जिम्मेदार चूक आखिर कहां हुई।

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