अरहर की फसल पर पत्ती लपेटक कीट का हमला, किसानों को दी गई बचाव की सलाह
पत्तियों और कलियों को नुकसान पहुंचाकर घटा सकता है उत्पादन, शुरुआती अवस्था में नियंत्रण करने की सलाह; अधिक प्रकोप पर अनुशंसित कीटनाशकों के छिड़काव का सुझाव
अरहर में पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप, किसानों को सलाह
Seoni, 11 October 2026
सिवनी यशो:- अरहर की फसल में इन दिनों पत्ती लपेटक कीट (लीफ वेबर) का प्रकोप देखा जा रहा है। यह कीट पत्तियों को आपस में मोड़कर जाला बना लेता है और उसके भीतर रहकर पत्तियों तथा कलियों को नुकसान पहुंचाता है। इससे फसल की वृद्धि प्रभावित होने के साथ उत्पादन में भी कमी आने की आशंका रहती है। इसे देखते हुए किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने और कीट का शुरुआती प्रकोप दिखाई देते ही नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।
जाले और प्रभावित पत्तियों को नष्ट करें
पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप प्रारंभ होने पर किसानों को पौधों पर दिखाई देने वाले जालों तथा प्रभावित पत्तियों को तोड़कर खेत से बाहर ले जाकर नष्ट करने अथवा मिट्टी में दबाने की सलाह दी गई है। जैविक नियंत्रण के लिए नीम अर्क (NSKE 5 प्रतिशत) अथवा नीम ऑयल 3000 पीपीएम का 2 से 3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव किया जा सकता है।
अधिक प्रकोप पर इन कीटनाशकों के उपयोग का सुझाव
कीट का प्रकोप अधिक होने पर निम्नलिखित अनुशंसित कीटनाशकों में से किसी एक का उपयोग निर्धारित मात्रा के अनुसार करने की सलाह दी गई है। प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने का सुझाव दिया गया है।
- एमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत SG: 80 से 100 ग्राम प्रति एकड़।
- क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत SC: 60 मिलीलीटर प्रति एकड़।
- फ्लूबेंडियामाइड 39.35 प्रतिशत SC: 40 मिलीलीटर प्रति एकड़।
- इंडोक्साकार्ब 15.8 प्रतिशत EC: 135 मिलीलीटर प्रति एकड़।
शाम के समय छिड़काव करना बेहतर
किसानों को साफ मौसम में कीटनाशकों का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। मधुमक्खियों और अन्य परागणकारी कीटों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए शाम के समय छिड़काव करना उचित रहेगा। चूंकि पत्ती लपेटक कीट पत्तियों को मोड़कर जाले के भीतर छिप जाता है, इसलिए दवा का सूंडी तक पहुंचना कठिन हो सकता है। ऐसे में छिड़काव के दौरान पौधों के प्रभावित हिस्सों तक दवा पहुंचाना और पत्तियों को अच्छी तरह भिगोना जरूरी है।
किसानों को सलाह दी गई है कि कीटनाशक का चयन करते समय फसल एवं कीट के लिए उत्पाद के लेबल पर दिए गए निर्देशों का पालन करें। निर्धारित मात्रा से अधिक दवा का उपयोग न करें तथा अलग-अलग कीटनाशकों को बिना विशेषज्ञ की सलाह के आपस में न मिलाएं। समय पर निगरानी और उचित नियंत्रण से फसल को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
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