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तालाब के भीतर ही बना दिया नया तालाब! – सोनखार पंचायत में 24 लाख के निर्माण कार्य पर उठे सवाल

जल संसाधन नीति और वन नियमों की खुली अवहेलना, प्रशासन मौन

 Seoni 25 July 2025

सिवनी यशो:- सरकार जब विकास के नाम पर अकूत धन उपलब्ध कराती है, तो अपेक्षा रहती है कि वह जनहित में खर्च हो। लेकिन अफसोस कि अधिकारियों की मानसिकता विकास नहीं, बल्कि धन की बंदरबांट और ठेकेदारी संस्कृति में लिप्त नजर आती है।

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ग्रामीण विकास के नाम पर भ्रष्टाचार की परतें खुलती जा रही हैं। पिछले समाचार में जो अनियमितताएँ सामने आईं, अब उससे भी अधिक चौंकाने वाला मामला जनपद पंचायत केवलारी की ग्राम पंचायत सोनखार में सामने आया है।

तालाब के अंदर ही नया तालाब!

ग्राम सोनखार में पहले से मौजूद एक बड़े तालाब के भीतर ही नया तालाब स्वीकृत कर दिया गया। यह पूरा क्षेत्र वन भूमि में आता है, फिर भी न तो वन विभाग से अनुमति ली गई, न ही पर्यावरणीय स्वीकृति।

हैरानी की बात ये है कि यह पूरा काम मनरेगा योजना के तहत किया जा रहा है, जिसकी लागत ₹24 लाख दर्शाई गई है।

गंभीर नियम उल्लंघन के बिंदु:

  •  नया तालाब, पहले से मौजूद तालाब के जल भराव क्षेत्र में स्वीकृत

  • शून्य दूरी पर दो तालाब बनाना, मप्र जल संसाधन नीति का उल्लंघन

  • वन अधिनियम के तहत बिना अनुमति कोई भी निर्माण अवैध

  •  हर वर्ष पुराने तालाब का बैकवॉटर वहीं भरता है – नए तालाब के क्षतिग्रस्त होने का जोखिम

प्रशासनिक स्वीकृति पर भी सवाल

इस निर्माण को लेकर जो प्रशासकीय स्वीकृति जारी हुई है, उसमें कलेक्टर सिवनी सुश्री संस्कृति जैन का नाम दर्ज है और सहायक यंत्री दुर्गा कुमरे को कार्य का प्रभारी बताया गया है।

लेकिन जमीनी स्तर पर मुआयना हो या तकनीकी जाँच – सबकुछ नदारद है।

स्थानीय लोगों की माँग – जाँच हो, निलंबन हो

ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने इस निर्माण को ‘नियमों का मज़ाक’ बताते हुए उच्च स्तरीय जाँच और संबंधित अधिकारियों के तत्काल निलंबन की माँग की है।

उनका कहना है कि –

“यह केवल सरकारी धन की बर्बादी नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों से खिलवाड़ है।”

कानून क्या कहता है?

  • मप्र जल संसाधन नीति: जल भराव क्षेत्र में नया तालाब बनाना मना है।

  • वन अधिनियम: बिना अनुमति, किसी भी प्रकार का निर्माण वन भूमि पर अवैध है।

निष्कर्ष:

यदि समय रहते इस निर्माण पर रोक नहीं लगी और निष्पक्ष जाँच नहीं हुई, तो यह प्रकरण भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का राज्यस्तरीय उदाहरण बन सकता है।

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