एक बगिया मां के नाम योजना में गड़बड़ी के आरोप
हर्रई जनपद में तयशुदा विक्रेता से सामग्री खरीदने का दबाव, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष ने कलेक्टर से की जांच की मांग
Chhindwara 17 December 2025
हर्रई/छिन्दवाड़ा यशो:- जनपद पंचायत हर्रई में “एक बगिया मां के नाम” योजना के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी हर्रई के अध्यक्ष रामजी उईके ने कलेक्टर छिन्दवाड़ा को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया है कि जनपद पंचायत के कुछ अधिकारी हितग्राहियों पर एक निश्चित विक्रेता (गोटेगांव, जिला नरसिंहपुर) से ही सामग्री क्रय करने का दबाव बना रहे हैं।
सीमेंट पोल व फेंसिंग सामग्री में गड़बड़ी का आरोप
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि योजना के तहत उपयोग की जा रही सीमेंट पोल एवं फेंसिंग तार की आपूर्ति न तो स्वीकृत स्टीमेट के अनुरूप है और न ही SOR (Schedule of Rates) के अनुसार।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि—
-
मनरेगा पोर्टल में सीमेंट पोल की दर 290 रुपये प्रति पोल निर्धारित है,
-
जबकि वर्तमान में 470 रुपये प्रति पोल की दर से बिल लगाए जा रहे हैं।
-
स्टीमेट के अनुसार पोल में 10 एमएम लोहे की छड़ का उपयोग होना चाहिए, लेकिन आपूर्ति किए गए पोल में इससे कम गुणवत्ता का लोहा प्रयोग किए जाने की शिकायत सामने आई है।
हितग्राही, सरपंच और सचिव मानसिक दबाव में
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि तयशुदा विक्रेता से सामग्री खरीदने के दबाव के चलते हितग्राही, सरपंच और सचिव मानसिक रूप से परेशान हैं, जिससे स्वीकृत कार्य प्रभावित हो रहे हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि योजना के उद्देश्य को भी कमजोर करती है।

वित्तीय अनियमितता की आशंका
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रामजी उईके ने आरोप लगाया कि—
“यह पूरी प्रक्रिया हितग्राहियों की स्वतंत्रता के विरुद्ध है और इसमें वित्तीय अनियमितता की प्रबल संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।”
कलेक्टर से जांच और स्वतंत्रता की मांग
ज्ञापन के माध्यम से कलेक्टर से मांग की गई है कि—
-
यह जांच कराई जाए कि किस अधिकारी द्वारा दबाव बनाया जा रहा है,
-
हितग्राहियों को उचित दर, गुणवत्ता और निकटता के आधार पर सामग्री क्रय करने की स्वतंत्रता दी जाए,
-
दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
प्रशासन की भूमिका पर टिकी निगाहें
पूरा मामला अब जिला प्रशासन की जांच पर निर्भर है।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह “एक बगिया मां के नाम” जैसी महत्वाकांक्षी योजना की विश्वसनीयता और
क्रियान्वयन व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।


