भय और आतंक के अंधेरे से निकलकर लौट रही है रौशनी: बालाघाट में विकास की नई सुबह
नक्सलवाद की छाया से बाहर निकलकर सामान्य जीवन की ओर लौटते लोग, सरकार के प्रयासों से बदली तस्वीर
बालाघाट नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बड़े बदलाव: भय खत्म, विकास तेज
Balaghat 10 April 2026
भोपाल/बालाघाट यशो:- कभी बालाघाट नक्सल प्रभावित क्षेत्र भय और आतंक से जूझता रहा ।आज धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है। जहां कभी शाम ढलते ही सन्नाटा और डर हावी हो जाता था, वहीं अब वही क्षेत्र विकास और विश्वास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भय और आतंक का दौर अब समाप्त हो चुका है, और अब वहां विकास की रफ्तार तेज की जा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति के कारण नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है।
जब जीवन था डर और सन्नाटे में कैद
कुछ वर्ष पहले तक बालाघाट और आसपास के क्षेत्रों में स्थिति बेहद भयावह थी।
ग्रामीणों के लिए जीवन आसान नहीं था—
- शाम होते ही घरों में कैद हो जाना
- जंगल और रास्तों में अनिश्चितता का डर
- छोटे गांवों में सुरक्षा की कमी
- रोजमर्रा की आवाजाही में असुरक्षा का माहौल
लोग बताते हैं कि बालाघाट नक्सल प्रभावित क्षेत्र में कई बार रात के समय गांवों में सन्नाटा इतना गहरा होता था कि बाहर निकलने की हिम्मत नहीं होती थी।
यह वह दौर था जब विकास की बातें केवल कागजों तक सीमित थीं। अब विकास की नई रोशनी की चमक प्रदेश की सरकार के संकल्प से साकार रूप लेने लगी है
अब बदल रही है तस्वीर
आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
सरकारी प्रयासों, सुरक्षा व्यवस्था और लगातार विकास योजनाओं के कारण—
– गांवों में फिर से चहल-पहल लौट आई है
– बाजार और गतिविधियाँ सामान्य हो रही हैं
– लोग बिना डर के आवाजाही कर रहे हैं
– विकास कार्यों ने गति पकड़ ली है
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सरकार का पूरा ध्यान इन पिछड़े और प्रभावित क्षेत्रों को मुख्यधारा में लाने पर है।
विकास की तेज रफ्तार पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि—
- स्वास्थ्य सेवाएँ हर गांव तक पहुँचें
- शिक्षा सुविधाएँ मजबूत हों
- रोजगार और कौशल विकास बढ़े
- महिलाओं और बच्चों को विशेष लाभ मिले
- पिछड़े क्षेत्रों को नई पहचान मिले
उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब समय है कि बालाघाट नक्सल प्रभावित क्षेत्र जो विकास की दौड़ में पीछे रह गए तेजी से आगे बढ़ें।
जनजातीय संस्कृति बनेगी विकास का आधार
आगामी बालाघाट जनजातीय महोत्सव को केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि विकास और पहचान का मंच बनाया जा रहा है।
इसमें शामिल होंगे—
- बैगा समुदाय की पारंपरिक संस्कृति
- लोकनृत्य और खेल प्रतियोगिताएँ
- पारंपरिक व्यंजन और हस्तशिल्प प्रदर्शनी
- औषधीय ज्ञान और जड़ी-बूटी सम्मेलन
हर वर्ग तक पहुंचेगा लाभ
महोत्सव के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा विशेष शिविर लगाए जाएंगे, जिनमें—
- स्वास्थ्य जांच एवं सिकल सेल स्क्रीनिंग
- शिक्षा और छात्र कल्याण योजनाएँ
- रोजगार और कौशल विकास कार्यक्रम
- स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहन
प्रशासनिक प्रतिबद्धता
बालाघाट नक्सल प्रभावित क्षेत्र में अब सरकार के विभिन्न विभाग—स्वास्थ्य, पंचायत, जनजातीय कार्य, वन, कृषि, महिला एवं बाल विकास, ऊर्जा, पर्यटन और गृह विभाग—इस परिवर्तन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
बालाघाट नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब उस दौर से बाहर निकल रहा है जब डर जीवन का हिस्सा था।
आज यहां शांति, विश्वास और विकास की नई कहानी लिखी जा रही है, जो आने वाले समय में पूरे प्रदेश के लिए उदाहरण बनेगी।
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