बिरसा मुंडा जयंती: जननायक की जीवनशैली को आत्मसात करने का आह्वान
“बिरसा मुंडा केवल एक नाम नहीं, भारत की मिट्टी में गूंजता हुआ ‘उलगुलान’ का स्वर है” — डॉ. श्याम सिंह कुमरे
Seoni 19 November 2025
सिवनी यशो:- माधव स्मृति न्यास द्वारा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 14 नवंबर को शासकीय कन्या छात्रावास बोरदाई में तथा 17 नवंबर को शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय सिवनी में श्रद्धा, सम्मान और प्रेरणा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के पूजन एवं धरती आबा बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। श्रद्धांजलि के इस भावपूर्ण क्षण ने उपस्थित जनसमूह को स्वाधीनता संग्राम के उस वीर योद्धा की याद दिलाई, जिसने ब्रिटिश शासन की जड़ें हिला दी थीं।
डॉ. श्याम सिंह कुमरे का प्रेरक संबोधन (कन्या छात्रावास बोरदाई):
श्याम कुमरे ने कहा कि बिरसा मुंडा कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे, बल्कि वे भारत की आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना के क्रांतिकारी वाहक थे। उन्होंने जंगलों के संरक्षण, आदिवासी समाज को जागृत करने और स्वाधीनता के स्वप्न को आधार देने का अद्वितीय काम किया।
कहा— “बिरसा मुंडा ने केवल हथियार नहीं उठाए, बल्कि शिक्षा, स्वाभिमान और संगठन की शक्ति से अंग्रेजी सत्ता को चुनौती दी। हमें उनसे सीखना चाहिए कि अपनी मिट्टी, संस्कृति, भाषा और अस्तित्व के सम्मान की रक्षा कैसे की जाए।”

कार्यक्रम में डॉ. कुमरे ने बालिकाओं को संदेश देते हुए कहा कि आज के समय में बिरसा मुंडा के आदर्शों को शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक नेतृत्व के माध्यम से जीवित रखने की आवश्यकता है।
इस दौरान न्यास के अध्यक्ष दीपक साहू, प्राचार्य हरिनखेड़े, छात्रावास के बच्चे एवं स्थानीय गणमान्यजन उपस्थित रहे।
आनंदी पटले का ओजस्वी उद्बोधन (शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय सिवनी):
उत्कृष्ट विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में आनंदी पटले ने प्रेरक संबोधन देते हुए कहा कि बिरसा मुंडा ने भारत की स्वाधीनता को केवल राजनीतिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना की दृष्टि से भी परिभाषित किया।
आनंदी पटले – “बिरसा ने जनजातीय समाज को यह सिखाया कि यदि संघर्ष करना हो, तो पहले अपनी संस्कृति, अपने ईश्वर और अपनी पहचान को समझना होगा।
उनके ‘उलगुलान’ का अर्थ केवल विद्रोह नहीं, बल्कि अस्तित्व की रक्षा का आंदोलन था।” उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज के युवा यदि बिरसा मुंडा के संघर्ष,
समर्पण और साहस को आत्मसात कर लें,
तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आएगा।
इस कार्यक्रम में दीपक साहू, नीकेलाल काकोडिया, विद्यालय के प्राचार्य,
शिक्षक-स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की विशेषताएँ:
भारत माता का पूजन एवं बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण
छात्राओं द्वारा जनजातीय सांस्कृतिक गीत और स्वदेशी मंत्रोच्चार
भगवान बिरसा मुंडा के जीवन दर्शन पर आधारित भाषण एवं संवाद
“धरती आबा के संदेश” विषय पर विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुति
समापन में संकल्प:
अंत में उपस्थित सभी विद्यार्थियों और अतिथियों ने जनजातीय गौरव,
पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी संस्कृति और सामाजिक जागरूकता को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।



