सीएम हेल्पलाइन बनी मज़ाक! दर्द से तडफ़ रहा बच्चा, कोई सुनने वाला नहीं
सुकतरा सीएम राइज विद्यालय में छात्र से मारपीट, शिकायत पर भी दबाव- अभिभावक डरे, प्रशासन खामोश
दर्द से तड़पता बच्चा, पर स्कूल प्रशासन चुप!
सिवनी यशो:- सिवनी जिले के सीएम राइज विद्यालय सुकतरा में एक मासूम छात्र के साथ हुई मारपीट की घटना ने शिक्षा प्रणाली और प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। ग्राम मोहगांव सड़क निवासी सतकुमार साहू के 10 वर्षीय पुत्र दिव्यांश साहू (कक्षा 5वीं) के कान पर प्राचार्य एवं स्टाफ द्वारा कथित रूप से दो बार जोरदार प्रहार किया गया, जिसके कारण बच्चे के कान में तेज सूजन, संक्रमण और मवाद बन गया। बच्चा रोता रहा, इलाज चलता रहा, लेकिन स्कूल प्रबंधन चुप्पी साधे रहा।

शिकायत की तो उल्टा शिकायत वापस लेने का दबाव-सीएम हेल्पलाइन भी बेअसर!
अभिभावक ने बताया कि उन्होंने 181 सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन विद्यालय प्रबंधन ने उन्हें घेरकर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया।
प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि आगे ऐसी घटना नहीं होगी। लेकिन कुछ ही समय बाद, दीपावली अवकाश के पश्चात फिर उसी बच्चे के कान पर मारपीट कर दी गई।
अभिभावक का दर्द —
“सरकारी हेल्पलाइन पर शिकायत करना भी मुश्किल हो गया है। बच्चे को इंसाफ नहीं, बल्कि हमें चुप रहने की सलाह दी जाती है।”
बच्चा अब स्कूल के नाम से डर जाता है
लगातार दुर्व्यवहार और मारपीट का सामना करने के बाद दिव्यांश स्कूल जाने से डरने लगा है।
अभिभावकों के अनुसार —
➡ “दिव्यांश सुबह स्कूल का नाम सुनते ही घबराहट व रोना शुरू कर देता है। उसे डर है कि फिर उसे मारा जाएगा।”
लगातार कान में दर्द रहने से बच्चा सामान्य पढ़ाई, खेलकूद, यहां तक कि रोज़मर्रा की गतिविधियाँ भी नहीं कर पा रहा।
परिवार मानसिक तनाव में – बच्चे का भविष्य और स्वास्थ्य दोनों खतरे में
परिवार बेहद परेशान है। बालक दिव्यांश की पढ़ाई रुक गई है, और उसके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
अभिभावकों का कहना है—
“हमने बच्चे का भविष्य स्कूल को सौंपा था, लेकिन अब हमें डर लगने लगा है कि कहीं शिक्षा के नाम पर प्रताड़ना तो नहीं दी जा रही?”
प्रशासन, जनजाति विभाग, एसडीएम और थाने में शिकायत—लेकिन कार्रवाई शून्य!
अभिभावक ने जनजाति विभाग, एसडीएम कार्यालय, कुरई थाने और CM हेल्पलाइन में शिकायतें दर्ज कीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
🔸 सवाल उठ रहे हैं —
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क्या सरकारी विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं?
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क्या सीएम हेल्पलाइन सिर्फ काग़जी औपचारिकता रह गई है?
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क्या शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई से प्रशासन डरता है?
अभिभावकों की चेतावनी – “अगर न्याय नहीं मिला, तो सामूहिक आंदोलन करेंगे”
पीड़ित परिवार और अन्य अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि –
यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई और आरोपी स्टाफ पर FIR दर्ज नहीं हुई,
तो वे जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरना देंगे और मामला बाल अधिकार आयोग एवं
शिक्षा मंत्री तक पहुंचाएंगे।
असली सवाल — क्या सरकारी स्कूलों में बच्चों का भविष्य सुरक्षित है?
यह मामला सिर्फ एक छात्र की चोट नहीं,
बल्कि सरकारी शिक्षा प्रणाली के भरोसे पर गहरी चोट है।
जब स्कूल सुरक्षा नहीं दे रहा, हेल्पलाइन राहत नहीं दे रही,
और प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है,
तो आखिर पीड़ित एक मासूम बच्चा न्याय के लिए कहाँ जाए?



