भाजपा ने परिवारवाद पर कसा शिकंजा, निष्क्रिय और विवादित नेताओं पर भी सख्ती
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश – अब मेहनती कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता | परिजनों, निष्क्रिय पदाधिकारियों और दुरुपयोग करने वालों पर होगी कार्रवाई
Seoni 13 September 2025
भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा ने संगठन में परिवारवाद और अनुशासनहीनता पर सख्ती दिखाते हुए बड़ा संदेश दिया है। पिछले दस दिनों में तीन बड़े नेताओं के परिजनों से इस्तीफा लेकर यह स्पष्ट कर दिया गया कि संगठन अब पद उन्हीं को देगा जो कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय और संघर्षशील हैं।
इसके साथ ही पार्टी ने संकेत दिए हैं कि सिर्फ परिजन ही नहीं, बल्कि वे पदाधिकारी भी अब बख्शे नहीं जाएंगे जो निष्क्रिय रहते हैं, पार्टी लाइन के खिलाफ बयानबाजी करते हैं या पद का निजी स्वार्थ के लिए दुरुपयोग करते हैं।
कार्यकर्ताओं में उत्साह
संगठन की इस सख्ती को लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं में उत्साह है।
लंबे समय से कार्यकर्ता यह शिकायत कर रहे थे कि नेताओं के बेटे-भतीजों या निष्क्रिय पदाधिकारियों को महत्व दिया जा रहा था,
जिससे मेहनती कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता था।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा –
“अब यह साफ हो गया है कि पद सिर्फ उन्हीं को मिलेंगे जो जनता और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय हैं।
यह निर्णय हम जैसे कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा है।”
प्रदेशाध्यक्ष का स्पष्ट रुख
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने साफ कर दिया है कि संगठन में परिवारवाद और निष्क्रियता को जगह नहीं मिलेगी।
उन्होंने संकेत दिए हैं कि जिलाध्यक्ष और पर्यवेक्षक किसी दबाव में आकर परिजनों या विवादित नेताओं को पद न दें।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, संगठन में अनुशासनहीनता और आपराधिक प्रवृत्ति वाले नेताओं पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी।
यदि कोई पदाधिकारी पार्टी के खिलाफ बयानबाजी करता है या जिम्मेदारियों का दुरुपयोग करता है तो उससे भी इस्तीफा लिया जाएगा।
राजनीतिक संदेश
यह कदम भाजपा के लिए सिर्फ संगठनात्मक सुधार नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि –
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परिवारवाद को बढ़ावा देने वालों को रोका जाएगा।
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निष्क्रिय और जिम्मेदारी न निभाने वाले पदाधिकारियों को हटाया जाएगा।
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अनुशासनहीन और आपराधिक प्रवृत्ति वालों पर तुरंत कार्रवाई होगी।
यह नीति भाजपा के उस मूल मंत्र को मजबूती देती है कि “पार्टी पहले, व्यक्ति बाद में।”
भविष्य की राह
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का यह सख्त रुख आगामी चुनावों में पार्टी की संगठनात्मक क्षमता को और मजबूत करेगा।
इससे कार्यकर्ताओं में विश्वास बढ़ेगा कि संगठन में आगे बढ़ने का रास्ता सिर्फ मेहनत और निष्ठा से ही है।



