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आवारा कुत्तों का आतंक: सिवनी में जनता का गुस्सा चरम पर, प्रशासन की नींद उड़ाई

नगरपालिका पर लापरवाही का आरोप | मासूम की मौत से भड़का जनाक्रोश | नसबंदी और ठोस कार्रवाई की मांग

सिवनी यशो :- शहर और आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि लोग अब घर से बाहर निकलने से डरने लगे हैं। हाल ही में एक मासूम बच्ची पर कुत्तों के हमले में हुई दर्दनाक मौत ने पूरे जिले को झकझोर दिया। जनता का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है और लोग सीधे तौर पर नगरपालिका प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

प्रशासन की लापरवाही पर सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। शिकायतें बार-बार दर्ज कराने के बावजूद नगरपालिका प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। न तो कुत्तों की नसबंदी हुई, न ही उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया।

रोज सुबह मॉर्निंग वॉक पर जाने वाले लोग भयभीत रहते हैं। दिन और रात में कुत्ते वाहनों के पीछे दौड़ पड़ते हैं, जिससे कई वाहन चालक गिरकर घायल हो चुके हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए घर से बाहर निकलना चुनौती बन गया है।

 सोशल मीडिया पर आक्रोश

शुक्रवार को नगर के एक बच्चे के पीछे भागते कुत्तों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। देखते ही देखते इस वीडियो पर सैकड़ों गुस्से भरी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। लोग लिख रहे हैं – “कितनी और जानें जाएंगी? कब जागेगा प्रशासन?”

इससे पहले भी कुत्तों के झुंड ने एक मासूम बच्ची की जान ले ली थी। उस घटना की पीड़ा अभी कम भी नहीं हुई थी कि फिर नए मामले सामने आने लगे।

 उग्र आंदोलन की चेतावनी

जनता का कहना है कि प्रशासन सिर्फ कागजों में रिपोर्ट तैयार कर रहा है,

जबकि जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई दिखाई नहीं देती। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि –

यदि तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

एक स्थानीय नागरिक ने आक्रोश जताते हुए कहा –

“अगर कोई और बड़ी घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी नगरपालिका की होगी और जनता अब चुप नहीं बैठेगी।”

 जिला प्रशासन की जिम्मेदारी

जनता अब सिर्फ नगरपालिका ही नहीं, बल्कि जिला प्रशासन से भी उम्मीद लगाए बैठी है कि –

वह इस गंभीर समस्या पर संज्ञान ले।

विशेषज्ञों का कहना है कि –

यह महज “नगरपालिका की विफलता” नहीं, बल्कि जन-जीवन की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है।

जिला प्रशासन यदि अब भी नहीं जागा तो यह लापरवाही और भी भयावह परिणाम ला सकती है।

 जनता की मांगें

  1. कुत्तों की तत्काल नसबंदी अभियान शुरू किया जाए।

  2. कुत्तों को सुरक्षित शेल्टर होम्स में रखा जाए।

  3. सड़कों पर लगातार निगरानी और नियंत्रण की व्यवस्था हो।

  4. घटनाओं के शिकार परिवारों को मुआवजा और सुरक्षा का आश्वासन दिया जाए।https://www.thehindu.com/news/national/supreme-court-verdict-on-stray-dogs-live-updates-august-22-2025/article69963272.ece

Dainikyashonnati

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