CMHO के नाम पर 50 हजार की रिश्वत! छिंदवाड़ा में कंप्यूटर ऑपरेटर लोकायुक्त के जाल में फंसा
बीमार व दिव्यांग नर्स के ट्रांसफर के बदले मांगे पैसे, सीएमएचओ कार्यालय में रंगे हाथ कार्रवाई
Chhindwara 02 February 2026
छिंदवाड़ा यशो:- छिंदवाड़ा। CMHO कार्यालय रिश्वत मामला छिंदवाड़ा एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग में फैले भ्रष्टाचार को उजागर करता है। लोकायुक्त पुलिस ने सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ कम्प्यूटर ऑपरेटर को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह राशि स्थानांतरण के नाम पर मांगी गई थी।
लोकायुक्त के अनुसार शिकायतकर्ता पुष्पा बड़गरे, रोहनकला स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ नर्सिंग ऑफिसर हैं। वे किडनी संबंधी गंभीर बीमारी और दिव्यांगता से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने नजदीकी स्थान पर स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था। बताया गया कि कलेक्टर स्तर से भी निर्देश जारी हो चुके थे, इसके बावजूद फाइल आगे नहीं बढ़ाई गई।
शिकायत में कहा गया कि कंप्यूटर ऑपरेटर ने ट्रांसफर आदेश निकलवाने के लिए सीधे 50 हजार रुपये की मांग की। पीड़िता द्वारा 20 हजार देने की बात कही गई, लेकिन आरोपी ने साफ शब्दों में कहा—
“CMHO कार्यालय रिश्वत मामला छिंदवाड़ा: लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई
इसके बाद पीड़िता ने लोकायुक्त से शिकायत की। सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाया और सीएमएचओ कार्यालय में ही आरोपी को रिश्वत लेते पकड़ लिया।
लोकायुक्त ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है।
मौके से दस्तावेज और अन्य साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं।
पूरे मामले में यह सवाल गहराता जा रहा है कि-
क्या सिर्फ ऑपरेटर दोषी है या रिश्वत की रकम ऊपर तक जाती थी?
“50 हजार से कम में बात नहीं बनेगी” – पीड़िता का आरोप
पीड़िता पुष्पा बड़गरे ने बताया कि –
जब उन्होंने कलेक्टर के आदेशों का हवाला दिया तो कंप्यूटर ऑपरेटर ने साफ इनकार कर दिया और कहा कि
“आदेश से कुछ नहीं होगा, पैसे पूरे देने होंगे।”
कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद एक बीमार और दिव्यांग महिला कर्मचारी को परेशान किया जाना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है
जांच की आंच सीएमएचओ तक?
“हाईकोर्ट स्टे की आड़ में चल रहा था खेल?”
गिरफ्तार कंप्यूटर ऑपरेटर जितेंद्र यदुवंशी ने पूछताछ में दावा किया है कि –
उसने यह रकम प्रभारी सीएमएचओ डॉ. नरेश गुन्नाडे को देने के लिए ली थी।
बताया जाता है कि डॉ. गुन्नाडे के कार्यकाल के दौरान आउटसोर्स भर्ती और अन्य मामलों में लेन-देन की लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं।
हाईकोर्ट के स्टे के चलते शासन स्तर पर कार्रवाई नहीं हो सकी, लेकिन अब लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद
पूरे कार्यकाल की जांच की मांग तेज हो गई है।
सवाल यह भी है कि क्या सिर्फ मोहरा पकड़ा गया है?



