WhatsApp Image 2026-03-17 at 4.22.34 PM (1)
मध्यप्रदेशक्राइमछिंदवाड़ा

जंगल में ‘जहर’… सिस्टम खामोश! धड़ल्ले से चल रही थी अफीम की खेती

डेढ़ घंटे पहाड़ चढ़कर पहुंची पुलिस, 6 हजार अफीम पौधे नष्ट - 20 लाख की खेती, अब उठे सिस्टम पर सवाल

छिंदवाड़ा अफीम खेती एक्सपोज – जंगल के भीतर पुलिस द्वारा नष्ट की गई अवैध अफीम की खेती

Chhindwara 29 March 2026

छिंदवाड़ा यशो:- टाइगर रिजर्व के भीतर ‘जहर की खेती’ महीनों तक चलती रही… और सिस्टम को भनक तक नहीं लगी! सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ लापरवाही है या किसी संरक्षण में फल-फूल रहा था यह अवैध कारोबार?

छिंदवाड़ा जिले के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में अवैध अफीम खेती का बड़ा खुलासा हुआ है। सांगाखेड़ा रेंज के छातीआम क्षेत्र के घने जंगलों में पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए 6 हजार से अधिक अफीम के पौधों को नष्ट कर दिया।

हैरानी की बात यह है कि यह पूरी खेती ऐसे दुर्गम क्षेत्र में संचालित हो रही थी, जहां तक पहुंचने के लिए पुलिस को करीब डेढ़ घंटे तक पहाड़ी रास्तों पर पैदल चलना पड़ा।

सबसे बड़ा सवाल: जब पुलिस को पहुंचने में डेढ़ घंटा लग रहा है, तो इतने बड़े पैमाने पर खेती महीनों तक कैसे चलती रही?

मौके से 6148 अफीम के पौधे बरामद किए गए, जिनका वजन 194.500 किलोग्राम और अनुमानित कीमत करीब 20 लाख रुपये बताई गई है।

कार्रवाई: मुख्य आरोपी उदेसिंग गिरफ्तार, साथ ही बिसनलाल शीलू, मनोहर सिंह और कैलाल को भी पुलिस ने हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है।

प्रशासनिक चूक या मिलीभगत?

सबसे गंभीर पहलू यह है कि टाइगर रिजर्व जैसे हाई-सिक्योरिटी और संवेदनशील क्षेत्र में इतनी बड़ी अवैध खेती का पनपना सीधे तौर पर निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।

क्या वन विभाग की गश्त केवल कागजों में हो रही थी? क्या स्थानीय स्तर पर किसी की आंखें बंद थीं या फिर इस पूरे नेटवर्क को संरक्षण मिल रहा था?

जवाबदेही तय होगी? अगर टाइगर रिजर्व में ‘जहर की खेती’ संभव है, तो सुरक्षा और निगरानी के दावों पर भरोसा कैसे किया जाए?

छिंदवाड़ा अफीम खेती एक्सपोज – बड़ा नेटवर्क बेनकाब होने के संकेत

पुलिस अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। शुरुआती संकेत बताते हैं कि छिंदवाड़ा अफीम खेती एक्सपोज कोई छोटा मामला नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसकी जड़ें दूर तक फैली हो सकती हैं।

फिलहाल कार्रवाई से फसल तो नष्ट हो गई, लेकिन असली सवाल अब भी बाकी है—इस ‘जहर की खेती’ को पनपने किसने दिया?

https://www.naidunia.com/madhya-pradesh/chhindwara-accuded-who-poisoned-and-killed-a-tiger-in-satpura-tiger-reserve-was-cultivating-opium-plants-were-discovered-in-forest-8432650

Dainikyashonnati

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!