WhatsApp Image 2026-03-17 at 4.22.34 PM (1)
क्राइमछिंदवाड़ामध्यप्रदेश

वन विभाग का ‘परिवार मॉडल’ घोटाला उजागर – फॉरेस्टर के बेटे को मजदूर दिखाकर करोड़ों की फर्जी भुगतान, 3 अफसर व ठेकेदार पर एफआईआर

पिता सरकारी फॉरेस्टर, बेटा मजदूर बनकर करोड़ों का भुगतान ले गया — अवनी कंस्ट्रक्शन को फर्जी तरीके से 23 लाख से अधिक की रकम जारी, CCTV खरीद में भी खुला भ्रष्टाचार का गेट

Chhindwara 28 November 2025
छिंदवाड़ा यशो :- वन विभाग में सरकारी कुर्सियों को पारिवारिक खाते में तब्दील कर देने वाले भ्रष्टाचार के मामले का बड़ा खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ जबलपुर ने 30 लाख रुपए तक की फर्जी भुगतान विसंगतियों को लेकर तत्कालीन उप वनमंडलाधिकारी अनादि बुधोलिया, परिक्षेत्र अधिकारी कीर्ति बाला गुप्ता, हीरालाल सनोडिया और अवनी कंस्ट्रक्शन के संचालक सुशील चौबे पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम एवं भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है।

🔹 फॉरेस्टर का पुत्र मजदूर बना, फिर ठेकेदार बना – अवनी कंस्ट्रक्शन से करोड़ों की निकासी

शिकायत की जांच में खुलासा हुआ कि घटना के दौरान आरोपी सुशील चौबे के पिता चैतराम चौबे उसी वन मंडल में फॉरेस्टर पद पर पदस्थ थे। बेटे सुशील को फर्जी मजदूर दिखाकर 2,71,379 रुपए मजदूरी का भुगतान किया गया। वहीं इसी ‘फर्जी मजदूर’ की अपनी फर्म अवनी कंस्ट्रक्शन को कैम्पा व अन्य मद से कुल 23,21,199 रुपए फर्जी रूप से आहरित किए गए।

🔹 एक ही कार्य, एक ही दिनांक – दो बार भुगतान
जांच अधिकारियों ने पाया कि मजदूरी मद में एक ही तिथि पर दो बार भुगतान दर्शाया गया। देयक भुगतान शासन के वित्तीय नियमों और भंडार क्रय नियमों के विपरीत जाकर किया गया।

🔹 बाउंड्रीवाल निर्माण में भी गड़बड़ी, आधी राशि गायब

सांवरी परिक्षेत्र में 15 लाख रुपए की स्वीकृत बाउंड्रीवाल निर्माण राशि में से 6,97,643 रुपए का देयक पाया गया,

जबकि बची हुई रकम का कोई लेखा-जोखा नहीं मिला।

चौंकाने वाली बात यह रही कि स्वीकृति से पूर्व ही 2,22,176 रुपए की राशि जारी कर दी गई।

🔹 सप्लायर को कोटेशन से ज्यादा भुगतान

वन मंडल परासिया द्वारा मासर्स डिजिटल एक्स छिंदवाड़ा को 4 CCTV कैमरे एवं DVR की सप्लाई के लिए कोटेशन से 52,534 रुपए अधिक का भुगतान किया गया, वो भी कार्य स्वीकृति से पहले।

जांच एजेंसी की टिप्पणी:

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ का कहना है कि यह केवल वित्तीय गड़बड़ी नहीं,

बल्कि योजना को जड़ से हड़पने वाली सुनियोजित सांठगांठ का मामला है।

वन विभाग के अधिकारी, ठेकेदार व फॉरेस्टर के परिवारजनों की भूमिकाएं संदिग्ध और

प्रमाणित पाई जा रही हैं। विवेचना जारी है।

शिकायतकर्ता और वन क्षेत्र में आक्रोश:

स्थानीय कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि यह फर्जीवाड़ा वर्षों से चल रहा था,

लेकिन विभागीय संरक्षण के चलते जांच ठंडी बस्ते में डाली जाती रही।

अब कार्रवाई शुरू होने से कई और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

वन विभाग में ‘परिवारिक ठेका मॉडल’ के इस खुलासे ने सरकारी योजनाओं की जड़ को ही हिला दिया है —

अब बड़ा सवाल है, क्या यह जंगल राज सिर्फ एफआईआर तक सिमटेगा, या दोषियों की संपत्ति जब्त कर उदाहरण पेश किया जाएगा?

यह खबर भ्रष्टाचार और वन विभाग से जुड़े मामलों की विशेष निगरानी रिपोर्ट के अंतर्गत प्रकाशित की गई है।

https://www.swatantraprabhat.com/article/148667/fir-registered-against-the-contractor-for-asking-for-his-money

Dainikyashonnati

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!