दीपक सक्सेना–कमलेश शाह: भाजपा की जीत की रीढ़, फिर भी सत्ता से दूर?
भाजपा को छिंदवाड़ा में ऐतिहासिक सफलता दिलाने वाले चेहरे
ये दो नाम आज छिंदवाड़ा की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामने के बाद इन्हीं दोनों नेताओं की रणनीति और जनाधार से भाजपा ने पहली बार छिंदवाड़ा लोकसभा सीट जीती, फिर भी प्रदेश सरकार में इन्हें अब तक कोई स्थान नहीं मिल पाया है।
विशेष रिपोर्ट – गोविंद चौरसिया, वरिष्ठ पत्रकार, छिंदवाड़ा
Chhindwara 18 January 2026
छिंदवाड़ा यशो:- पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना और अमरवाड़ा विधायक कमलेश शाह दोनों ही कांग्रेस से भाजपा में आए और उनके आने से ही छिंदवाड़ा की राजनीति का समीकरण बदल गया। लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी विवेक बंटी साहू की जीत और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के पुत्र सांसद नकुलनाथ की हार ने इतिहास रच दिया। आज़ादी के बाद यह पहला मौका था जब छिंदवाड़ा लोकसभा सीट भाजपा के खाते में गई।
राजनीतिक गलियारों में यह बात स्वीकार की जाती है कि इस जीत के पीछे दीपक सक्सेना और कमलेश शाह की भूमिका निर्णायक रही। यही कारण है कि कांग्रेस छोड़ते समय उन्हें यह भरोसा भी दिया गया था कि भाजपा सरकार में उन्हें मंत्री मंडल या निगम-मंडल में सम्मानजनक स्थान मिलेगा।
दो साल पूरे, फिर भी इंतजार जारी
प्रदेश में भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे हो चुके हैं।
अब मंत्री मंडल विस्तार और निगम-मंडल नियुक्तियों की चर्चाएं तेज हो गई हैं। ऐसे में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच सवाल उठ रहा है—
क्या अब दीपक सक्सेना और कमलेश शाह को उनका राजनीतिक हक मिलेगा?
कांग्रेस की उपेक्षा, भाजपा से उम्मीद
कमलनाथ सरकार में दीपक सक्सेना ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का साथ दिया था,
लेकिन सत्ता में रहते हुए भी उन्हें कोई पद नहीं दिया गया।
यहां तक कि निगम-मंडल में भी नियुक्ति न मिलने से गहरी नाराजगी पैदा हुई।
यही नाराजगी बाद में भाजपा में वापसी का कारण बनी।
भाजपा को मिलेगा राजनीतिक फायदा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि –
यदि दीपक सक्सेना कमलेश शाह को सरकार या निगम-मंडल में स्थान मिलता है तो इससे न केवल भाजपा का जनाधार मजबूत होगा,
बल्कि कांग्रेस को बड़ा नुकसान भी झेलना पड़ सकता है।
पद मिलने के बाद और भी कांग्रेसी नेताओं के भाजपा में आने की संभावनाएं बन सकती हैं।



