छिंदवाड़ा में नालियों के अंदर से घरों तक पानी, इंदौर जैसी त्रासदी का खतरा, 227 इलाके ‘भागीरथपुरा मॉडल’ पर!
नालियों के भीतर से गुजरती पाइपलाइन, पुराने 24 वार्ड सबसे ज्यादा जोखिम में
Chhindwara 18 January 2026
छिंदवाड़ा यशो:-छिंदवाड़ा जल आपूर्ति व्यवस्था एक बड़े खतरे की ओर बढ़ रही है। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 24 मौतों के बाद किए गए सर्वे में खुलासा हुआ है कि छिंदवाड़ा शहर के 227 इलाके आज भी नालियों के अंदर से गुजरती क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों के सहारे पानी पीने को मजबूर हैं।
स्पष्ट शब्दों में कहें तो छिंदवाड़ा के सैकड़ों इलाके आज भी उसी व्यवस्था पर चल रहे हैं, जिसने इंदौर में 24 लोगों की जान ले ली थी।
छिंदवाड़ा जल आपूर्ति सर्वे: 29 वार्डों में दूषित पानी का सीधा खतरा
नगर निगम द्वारा 48 वार्डों में कराए गए सर्वे में चौंकाने वाला सच सामने आया है—शहर के 29 वार्डों के 227 क्षेत्र ऐसे हैं, जहां क्षतिग्रस्त पाइपलाइन और नालियों के अंदर से नल कनेक्शन लेकर घरों तक पानी पहुंचाया जा रहा है।
भागीरथपुरा हादसे के बाद शासन ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को 7 दिन में जलवितरण व्यवस्था की रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में छिंदवाड़ा नगर निगम के सब इंजीनियरों ने वार्डवार सर्वे किया, जिसमें यह खतरनाक सच्चाई उजागर हुई कि—
➡ नल कनेक्शन सीधे नालियों के भीतर से गुजर रहे हैं
➡ कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त है
➡ दूषित पानी के सीधे सप्लाई में मिलने की आशंका बनी हुई है
यानी यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो छिंदवाड़ा में भी भागीरथपुरा जैसी त्रासदी से इंकार नहीं किया जा सकता।
227 इलाकों की सूची शासन को भेजी, फैसला भोपाल के भरोसे
नगर निगम अधिकारियों ने 227 संवेदनशील क्षेत्रों की पूरी सूची तैयार कर भोपाल शासन को भेज दी है। अब आगे की कार्रवाई और बजट स्वीकृति शासन स्तर पर लंबित है।
सवाल यह है कि—
जब खतरा सामने है, तो कार्रवाई में देरी क्यों?
शॉर्ट टर्म 2 करोड़, लॉन्ग टर्म 10 करोड़ की मांग
नगर निगम ने जल व्यवस्था सुधार के लिए दो प्रस्ताव भेजे हैं—
🔹 शॉर्ट टर्म (तत्काल सुधार):
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लीकेज सुधार
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नालियों से गुजर रहे नल कनेक्शन शिफ्ट
➡ अनुमानित खर्च: 2 करोड़ रुपये
लॉन्ग टर्म (स्थायी समाधान):
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20 साल से ज्यादा पुरानी पाइपलाइन हटाना
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नई जललाइन बिछाना
➡ अनुमानित खर्च: 10 करोड़ रुपये
कमिश्नर ने माना खतरा
नगर निगम आयुक्त चंद्रप्रकाश राय ने स्वीकार किया कि—
“227 क्षेत्रों की सूची शासन को भेज दी गई है। जिन घरों के नल कनेक्शन नालियों से होकर गए हैं, उन्हें बदला जाएगा। शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों प्रस्ताव भेजे गए हैं।”
सबसे ज्यादा खतरे में शहर के पुराने 24 वार्ड
सर्वे में सामने आया है कि शहर के सबसे घनी आबादी वाले पुराने 24 वार्ड सबसे अधिक प्रभावित हैं, जिनमें—
गुलाबरा, रामबाग, लालबाग, छोटी बाजार, बरारीपुरा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
इन इलाकों में 20 साल से भी पुरानी पाइपलाइन और अवैज्ञानिक कनेक्शन आज भी चालू हैं।
लापरवाही किसकी? उंगली निगम प्लंबरों पर
सर्वे रिपोर्ट में सबसे बड़ा दोष नगर निगम के तत्कालीन प्लंबरों और तकनीकी अमले पर जाता है।
नियमों के अनुसार नल कनेक्शन भूमिगत सुरक्षित मार्ग से होना चाहिए था, लेकिन
➡ मेहनत से बचने के लिए
➡ नालियों के भीतर से पाइप डाल दिए गए
➡ जो अब दूषित पानी का मुख्य कारण बन रहे हैं
ठीक यही गलती इंदौर भागीरथपुरा में भी हुई थी।
अब सवाल सिर्फ एक…
जब खतरा सामने है,
जब सूची तैयार है,
जब बजट प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं—
तो क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
या इस बार भागीरथपुरा से पहले ही छिंदवाड़ा जागेगा?
शहर की जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, तत्काल ठोस कार्रवाई चाहती है।



