Seoni 23 July 2025
सिवनी यशो:-बरघाट विधानसभा के बरघाट और कुरई विकासखंड इन दिनों शासकीय योजनाओं की खुली लूट, ठेकेदारशाही और प्रशासनिक मिलीभगत का अड्डा बनते जा रहे हैं। करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य मनरेगा, ट्राइबल फंड और पंचायत मद से स्वीकृत तो हुए हैं, लेकिन काम का नामोनिशान नदारद, और जो है वह भी गुणवत्ता विहीन, अधूरा और अपारदर्शी।
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निर्माण आदेशों में करोड़ों – ज़मीन पर भ्रष्टाचार की नग्रता
जनपद पंचायत कुरई में 11 करोड़ के निर्माण कार्य, 10 करोड़ के ट्राइबल कार्य , 35 चेकडैम (15 लाख प्रति) के स्वीकृत और पूर्ण हो चुके है इनकी गुणवत्ता और उपयोगिता पर सवाल उठ रहे है । इन कार्यो के नाम शासकीय धन की लूट के आरोप लग रहे है और स्पष्ट रूप से दिख भी रहा है ।
जानकारी के अनुसार कुरई विकासखंड में लगभग 100 करोड़ से अधिक के कार्य एक ही ठेकेदार को सौंपे गए है वो भी नियम कानूनों को ताक पर रखकर इन में विधायक निधि, अवसंरचना, ट्रायबल, मनरेगा, सहित अन्य कार्य बिना टेंडर प्रक्रिया!
पंचायतों के वैधानिक अधिकारों को कुचलते हुए, कार्य एजेंसी की जगह ठेकेदारों को सौंप दिए गए।
मनरेगा को निगला मशीनी भ्रष्टाचार!
जिन कार्यों में मजदूरों को रोजगार मिलना चाहिए, वहां मशीनें धड़ल्ले से चल रही हैं।
फर्जी मस्टर रोल भरकर मजदूरी का पैसा ठेकेदार-ऑफिसर गठजोड़ हड़प रहे हैं।
मजदूरों का हक छीनकर, उन्हें पलायन के लिए मजबूर कर दिया गया है।
यह केवल घोटाला नहीं, संविधान और श्रमिक अधिकारों की हत्या है।
दबाई जा रही आवाजें, दी जा रही धमकियाँ
सरपंचों, जनपद सदस्यों और यहां तक कि जनपद पंचायत अध्यक्ष तक को अपमानित और धमकाया जा रहा है।
कई प्रतिनिधियों ने कहा:
“ठेकेदार खुलेआम धमकी देते हैं – विरोध करोगे तो जांच में फँसा देंगे।”
एक वायरल वीडियो में एक ठेकेदार द्वारा कहा गया – मैं प्यार से भी बात करता हूँ, नहीं तो तीसरी आंख खोल देता हूँ… मेडिकल कॉलेज में भी भिजवा सकता हूँ…”
यह भाषा किसी ठेकेदार की नहीं, बल्कि सत्ता संरक्षित बाहुबल की धमक है।
जनपद में गड़बड़झाला – जिला पंचायत अध्यक्ष ने दी चेतावनी
जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मालती डहेरिया ने एक लिखित पत्र में कहा:
“कुरई जनपद में 33 चेकडैम की स्वीकृति नियमविरुद्ध दी गई है। जांच समिति गठित की जाए और रिपोर्ट प्रस्तुत हो।”
यह प्रमाण है कि अब संवैधानिक पदाधिकारी भी इन गड़बडिय़ों को छिपा नहीं पा रहे।
जनता के सवाल – क्या ठेकेदार ही लोकतंत्र है?
क्या विधायक-सांसद सिर्फ दिखावे के लिए हैं?
क्यों अधिकारी चुप हैं?
क्यों पंचायतें अपाहिज बना दी गई हैं?
क्या ठेकेदार अब पंचायतों पर हुकूमत करेगा?
जनता की मांग:
ठेकेदार पर गुंडा एक्ट में कार्रवाई
CBI / EOW से निष्पक्ष जांच
पंचायतों को निर्माण एजेंसी का हक़ वापस
मनरेगा में मशीनों पर पूर्ण प्रतिबंध
सभी कार्यों की फिजिकल जांच और सोशल ऑडिट
सोशल मीडिया से उठती आवाजें:
“सरकार बनाने वाला कार्यकर्ता आज ठेकेदार से गाली खा रहा है।”
“अधिकारी टेंडर से पहले दलाली तय कर लेते हैं।”
“मनरेगा को मशीनें खा गईं, मजदूर रो रहे हैं।”
“क्या यही है ‘सबका साथ, सबका विकासÓ?”



