शूलपानेश्वर के दर्शन और नादौड़ की शांति में डूबी एकादशी की दिव्यता
नर्मदा परिक्रमा भाग 12:
— कपिल पांडे जी की भक्ति-प्रधान यात्रा
Seoni 29 June 2025
माँ नर्मदा की पावन परिक्रमा के बारहवें चरण में पदयात्री कपिल पांडे जी की यात्रा मातासर से प्रारंभ होकर गुजरात के पवित्र शूलपानेश्वर मंदिर होते हुए नर्मदा जिले के नादौड़ आश्रम तक पहुँची। यह यात्रा न केवल प्रकृति और संस्कृति के अद्भुत संगम की साक्षी रही, बल्कि आध्यात्मिक और आत्मशुद्धि की दिव्य अनुभूति से भी भरपूर रही।
आदिवासी अंचल में पर्यावरण की पाठशाला

जहाँ कपिल जी ने बांस के बने घरों को देख पर्यावरण-संरक्षण की सहज परंपरा को नमन किया। आदिवासी समुदाय के जीवन से उन्हें प्रकृति के साथ तादात्म्य का वास्तविक पाठ मिला।
एकादशी उपवास में आत्मीय सेवा
आज एकादशी थी। आश्रम में संतों ने उन्हें फलाहार और चाय के साथ विदा दी। मार्ग में झारवानी गांव की एक वृद्धा ने सेव और केले के साथ आत्मीयता से बना चाकू भेंट स्वरूप दिया — जिसे कपिल जी ने माँ नर्मदा की कृपा का प्रतीक माना।

शूलपानेश्वर — जहाँ शिव ने त्रिशूल धोया
परिक्रमा की राह में आया प्राचीन शूलपानेश्वर मंदिर, जिसकी कथा महाभारत से जुड़ी है। मान्यता है कि यहाँ भगवान शिव ने त्रिशूल से रक्त के दाग धोए थे, इसीलिए इस स्थान का नाम शूलपानेश्वर पड़ा। यहाँ एक सिद्ध शिवलिंग आज भी जलाशय में स्थित है। घाट पर चेतावनी थी — “मगर से सावधान रहें”, और दूर से सरदार वल्लभभाई पटेल की विशाल प्रतिमा दृष्टिगोचर हो रही थी।
धर्म की मर्यादा में बंधी परिक्रमा
मन तो ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ जाने को हुआ, लेकिन परिक्रमा धर्म कहता है — माँ नर्मदा को पार नहीं करना। अतः दोपहर के बाद यात्रा पुनः आरंभ हुई।
सेवा और संस्कार की भूमि — नादौड़
शाम तक कपिल जी पहुँचे नादौड़ गांव, जहाँ श्री रामानंद संत आश्रम में उन्हें रात्रि विश्राम मिला। आश्रम के किनारे बहती माँ नर्मदा, शांत राधा-कृष्ण मंदिर और शुद्ध फलाहार ने यात्रा की थकान को पिघला दिया।

भक्ति का यह सिलसिला यहीं नहीं थमता
कपिल जी की यह यात्रा एक यात्री की नहीं, एक साधक की कथा बन चुकी है। हर गाँव, हर मोड़ पर उन्हें मिल रही सेवा, आत्मीयता और संस्कृति की छाया न केवल नर्मदा की महिमा को पुनःस्थापित करती है, बल्कि समाज को भी एक नई दिशा देती है।
अगली कड़ी में पढ़िए: “नादौड़ से सोंखड़ – माँ नर्मदा की गोद में गुंजे भक्ति के स्वर”
तस्वीरें एवं यात्रा विवरण सौजन्य: कपिल पांडे जी संपर्क: editor@dainikyashonnati.com
नर्मदे हर



