‘रिन्यूवल’ का खेल, तबादलों की बोली और करोड़ों की खरीद पर सवाल! आदिम जाति कल्याण विभाग आखिर किसके संरक्षण में?
कथित वायरल ऑडियो में लाखों के लेनदेन की चर्चा, सरकारी कारण बताओ सूचना में करोड़ों की खरीद अनियमितताओं का उल्लेख; वर्षों से उठ रहे सवालों पर अब निर्णायक कार्रवाई की मांग
आदिम जाति कल्याण विभाग में कथित रिन्यूवल खेल, वायरल ऑडियो और करोड़ों की खरीद पर सवाल
Seoni 05 August 2026
सिवनी यशो:- मध्यप्रदेश का आदिम जाति कल्याण विभाग इन दिनों गंभीर विवादों के केंद्र में है। विभाग के भीतर भ्रष्टाचार, कथित लेनदेन, मनमानी, तबादलों, छात्रावासों के रिन्यूवल और करोड़ों रुपये की खरीद प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
विभागीय कर्मचारियों द्वारा सहायक आयुक्त के विरुद्ध भ्रष्टाचार, मनमानी और अपमानजनक व्यवहार के आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन, ज्ञापन और सार्वजनिक नाराजगी भी सामने आ चुकी है।
अब इन विवादों के बीच एक कथित वायरल ऑडियो ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। ऑडियो में दो महिला कर्मचारियों के बीच बातचीत होने का दावा किया जा रहा है, जिसमें मनचाही पोस्टिंग, विभागीय आदेश जारी कराने, अधिकारियों से हस्ताक्षर करवाने तथा छात्रावास अधीक्षकों के “रिन्यूवल” के लिए लगभग एक लाख रुपये तक की कथित राशि की चर्चा सुनाई देने का दावा किया जा रहा है। इस ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इसकी प्रामाणिकता की जांच होना शेष है।
क्या है ‘रिन्यूवल’ का कथित खेल?
विभागीय सूत्रों और कर्मचारियों के आरोप हैं कि छात्रावास अधीक्षकों को अगले सत्र में भी उसी छात्रावास में बनाए रखने के लिए “रिन्यूवल” नाम से कथित रूप से रकम ली जाती है। हालिया कथित ऑडियो ने इन आरोपों को नई चर्चा दे दी है। यदि इन दावों की पुष्टि होती है, तो यह केवल पदस्थापना का मामला नहीं बल्कि पूरी छात्रावास व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न होगा।
कर्मचारियों का आरोप है कि ऐसी व्यवस्था होने पर जवाबदेही प्रभावित होती है और छात्रावासों में भोजन, सामग्री, रखरखाव तथा विद्यार्थियों की सुविधाओं से जुड़े मामलों में अनियमितताओं की आशंका बढ़ जाती है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सरकारी रिकॉर्ड में भी दर्ज हैं गंभीर अनियमितताओं के आरोप
विवाद केवल कथित ऑडियो तक सीमित नहीं है। वर्ष 2019 में कलेक्टर कार्यालय, सिवनी द्वारा जारी कारण बताओ सूचना में तत्कालीन जांच प्रतिवेदन के आधार पर कई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। दस्तावेज के अनुसार—
- जिला क्रय समिति की स्वीकृति के बिना लगभग 31.87 लाख रुपये के खरीद आदेश जारी किए गए।
- स्वीकृत बजट से अधिक लगभग 17.18 लाख रुपये के अतिरिक्त खरीद आदेश जारी होने का उल्लेख किया गया।
- लगभग 39.25 लाख रुपये के भुगतान लंबित पाए गए।
- वर्ष 2014-15 से 2016-17 के दौरान एक ही सामग्री की बार-बार खरीद तथा उससे संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं मिलने का उल्लेख किया गया।
- लगभग 5.27 करोड़ रुपये के स्वीकृत आवंटन के विरुद्ध लगभग 5.44 करोड़ रुपये के खरीद आदेश जारी होने का भी जांच में उल्लेख है।
ये सभी बिंदु उस समय जारी कारण बताओ सूचना और जांच प्रतिवेदन का हिस्सा बताए गए थे।
विभाग में लगातार बढ़ता असंतोष
विभाग के कई कर्मचारियों ने समय-समय पर प्रशासन और शासन के समक्ष अपनी शिकायतें रखी हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती, जबकि विभाग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना भी उतना ही आवश्यक है।
अब सबसे बड़ा सवाल
जब विभाग को लेकर वर्षों से शिकायतें, जांच प्रतिवेदन, कारण बताओ सूचनाएं और अब कथित वायरल ऑडियो जैसे घटनाक्रम सामने आ रहे हैं, तब सवाल यह है कि—
- क्या पूरे विभाग का स्वतंत्र विशेष ऑडिट कराया जाएगा?
- क्या कथित वायरल ऑडियो की फोरेंसिक जांच होगी?
- क्या खरीद, तबादलों, छात्रावास रिन्यूवल और निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी?
- यदि पुराने मामलों में अनियमितताओं का उल्लेख हुआ था, तो उनका अंतिम परिणाम क्या रहा?
प्रदेश सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन सवालों का पारदर्शी उत्तर देने और यदि आरोप सही पाए जाएं तो दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की है।
(संपादकीय टिप्पणी: इस समाचार में कथित वायरल ऑडियो का उल्लेख उपलब्ध दावों के आधार पर किया गया है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि शेष है। वहीं खरीद संबंधी आरोप कलेक्टर कार्यालय की कारण बताओ सूचना और जांच प्रतिवेदन में दर्ज बिंदुओं पर आधारित हैं। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
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