झाबुआ प्लांट के डंपर ने मचाई तबाही, युवक की मौत के बाद सड़क पर उतरे ग्रामीण
गुस्साए ग्रामीणों ने शव सड़क पर रखकर किया प्रदर्शन, प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी
घंसौर डंपर हादसा – राख से भरे ओवरलोड डंपर ने पिकअप को मारी टक्कर, 19 वर्षीय युवक की मौत के बाद ग्रामीणों ने किया चक्का जाम
सिवनी / घंसौर यशो:- घंसौर–जबलपुर मार्ग एक बार फिर तेज रफ्तार और ओवरलोड डंपरों के खौफनाक कहर से दहल उठा। झाबुआ पावर प्लांट से राख लेकर दौड़ रहे एक बेलगाम डंपर ने रूपदोन गांव के पास पिकअप वाहन को ऐसी भीषण टक्कर मारी कि 19 वर्षीय युवक सत्येंद्र ककोड़िया की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

घंसौर डंपर हादसा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिकअप वाहन के परखच्चे उड़ गए और सड़क पर चीख-पुकार मच गई।
घंसौर डंपर हादसा में पिकअप सवार अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर किया गया है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में मातम और आक्रोश का माहौल बन गया।
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तेज रफ्तार डंपर ने छीनी युवक की जिंदगी
जानकारी के अनुसार समनापुर निवासी सत्येंद्र ककोड़िया अतरिया गांव से पिकअप वाहन लेकर लौट रहा था। इसी दौरान राख से भरे ओवरलोड डंपर क्रमांक RJ17GB8537 ने सामने से जोरदार टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक डंपर अत्यधिक रफ्तार में था और टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वाहन पूरी तरह चकनाचूर हो गया। युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
घटना के बाद सड़क पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए।

घंसौर डंपर हादसा – “सड़क नहीं, मौत का कॉरिडोर बन चुका है मार्ग”
घंसौर डंपर हादसा के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने मृतक का शव सड़क पर रखकर लखनादौन–मंडला मार्ग पर चक्का जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि झाबुआ पावर प्लांट से निकलने वाले राख से भरे ओवरलोड डंपर लंबे समय से लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं।
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ग्रामीणों का कहना था कि यह मार्ग अब सड़क नहीं बल्कि “मौत का कॉरिडोर” बन चुका है। आए दिन तेज रफ्तार डंपर हादसों को अंजाम दे रहे हैं, लेकिन प्रशासन और प्लांट प्रबंधन कार्रवाई करने के बजाय आंखें मूंदे बैठा है।
“कितनी मौतों के बाद जागेगा प्रशासन?”
ग्रामीणों ने कहा कि इससे पहले भी कई निर्दोष लोग इन भारी वाहनों की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं। बावजूद इसके ओवरलोडिंग, नियम उल्लंघन और बेलगाम रफ्तार पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर कितनी मौतों के बाद प्रशासन चेतना में आएगा?
50 लाख मुआवजे की मांग, घंटों तनावपूर्ण रही स्थिति
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने मृतक परिवार को झाबुआ पावर प्लांट प्रबंधन की ओर से 50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की। सूचना मिलते ही घंसौर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों के देर से पहुंचने पर लोगों का आक्रोश और बढ़ गया।
स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि प्रशासन को अतिरिक्त अमला बुलाना पड़ा। ग्रामीण लगातार दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और ओवरलोड वाहनों पर रोक लगाने की मांग करते रहे।
6 घंटे तक जाम में फंसे रहे सैकड़ों वाहन
उग्र प्रदर्शन के चलते लखनादौन–मंडला मार्ग पर दोनों ओर करीब दो-दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया। सैकड़ों वाहन घंटों तक सड़क पर फंसे रहे। यात्री, मरीज और आमजन भारी परेशानियों से जूझते रहे, जबकि पुलिस और प्रशासन हालात संभालने में लगे रहे।
करीब 6 घंटे तक चले धरना-प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच वार्ता हुई। अधिकारियों ने दोषियों पर कार्रवाई तथा मांगों पर उचित विचार का आश्वासन दिया, जिसके बाद शाम करीब 6 बजे चक्का जाम समाप्त हुआ और यातायात बहाल हो सका।
कब रुकेगा “राख के डंपरों” का खूनी खेल?
घंसौर से जबलपुर तक का मार्ग अब लोगों के लिए भय और दहशत का प्रतीक बनता जा रहा है। तेज रफ्तार और ओवरलोड डंपरों की आवाजाही से हर दिन हादसे का खतरा मंडरा रहा है।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि ओवरलोड वाहनों पर तत्काल सख्त कार्रवाई, नियमित जांच और सड़क सुरक्षा के स्थायी इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को अपनों को खोने का दर्द न झेलना पड़े।



