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"महिला वर्ग को दें ऐसी गिफ्ट जो सरकार भी न दे सके"- मुनिश्री भावसागर :रक्षाबंधन महोत्सव का जैन परंपरा में भव्य आयोजन:

श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर सिवनी में शांतिधारा, रक्षाबंधन विधान, आरती और मांगलिक क्रियाओं के साथ मनाया गया त्यौहार

 प्रतिभास्थली की बहनों ने अर्पित की राखी और शास्त्र, भक्ति में लीन रहा सिवनी जैन समाज

Seoni 08 August 2025

सिवनी यशो:- रक्षाबंधन, जो कि भारत की एक अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत है, का भव्य आयोजन आज सिवनी के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में मुनिश्री धर्मसागर जी और मुनिश्री भावसागर जी के सान्निध्य में संपन्न हुआ।

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प्रातः काल की बेला में शांतिधारा, रक्षाबंधन विधान के अर्घ समर्पण, आरती और भक्ति संगीत के साथ मांगलिक क्रियाओं का आयोजन श्रद्धा और गरिमा के वातावरण में संपन्न हुआ।

महिला को ऐसा उपहार दें जो सरकार भी न दे सके: मुनिश्री भावसागर जी

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री भावसागर जी महाराज ने कहा:

“रक्षाबंधन पर महिलाओं को ऐसा उपहार देना चाहिए जो सरकार भी न दे सके। वह उपहार ऐसा हो जिससे उन्हें पूरे वर्ष कोई परेशानी न हो।”

उन्होंने आगे कहा कि परिवार में तीन संतान का विचार होना चाहिए –

  • एक देश के लिए,

  • एक समाज के लिए,

  • और एक स्वयं के लिए।

मुनिश्री ने रक्षाबंधन के भावार्थ को भी सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि “रक्षा” शब्द ‘सुरक्षा’ से और ‘बंधन’ शब्द ‘बंधन’ से लिया गया है ।

अर्थात यह पर्व एक ऐसे प्रेमिल वचन का प्रतीक है जिसमें सुरक्षा और साथ निभाने की भावना निहित होती है।

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प्रतिभास्थली की बहनों द्वारा राखी और शास्त्र अर्पण

इस अवसर पर प्रतिभास्थली की बहनों द्वारा शास्त्र अर्पण और राखी समर्पण किया गया, जिससे कार्यक्रम को एक पवित्र आध्यात्मिक ऊँचाई प्राप्त हुई।

कार्यक्रम का संचालन ब्रह्मचारी मनोज भैयाजी ललितपुर के निर्देशन में हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुजनों ने इस अवसर पर भाग लेकर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

रक्षाबंधन: एक सांस्कृतिक प्रतीक

रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों की रक्षा का प्रतीक बन चुका है।

युगों से यह पर्व न केवल उत्तर भारत, बल्कि देश के सभी कोनों में आस्था और आत्मीयता के साथ मनाया जाता है

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