Seoni, 28 July 2025
सिवनी यशो:- श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, सिवनी (म.प्र.) में 27 जुलाई 2025 को प्रातःकालीन बेला में परम पूज्य मुनि संघ के सान्निध्य में मांगलिक क्रियाएं आयोजित की गईं।
यह आयोजन आचार्य श्री समयसागर जी के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनिश्री धर्मसागर जी एवं मुनि श्री भावसागर जी महाराज के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ।

यह भी पढ़े :-समाधिस्थ आचार्य विद्यासागर जी महाराज के चरण चिन्ह स्थापित – आत्महत्या रोकथाम पर मुनियों का भावगर्भित संदेश
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने कहा:
🎙️ “जो देश की रक्षा करते हैं, उनके लिए राखी भेजनी चाहिए। यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि उनका उत्साह और मनोबल बढ़ाने का कार्य है। राखी के साथ आवश्यक सामग्री भी अवश्य भेजें।”
उन्होंने आधुनिक युग में धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी के उपयोग की आवश्यकता बताई। युवाओं को धर्म से जोड़ने के लिए डिजिटल पाठशालाओं की पहल का सुझाव दिया।
साथ ही मंदिर और गौशाला में सहयोग करने वालों के सम्मान की परंपरा को भी आगे बढ़ाने की बात कही।
यह भी पढ़े :- ध्यान वह चाबी है जिससे अंतःकरण का ताला खुलता है
रक्षाबंधन पर्व का मुनि-विश्लेषण
मुनि श्री ने रक्षाबंधन को केवल एक पारंपरिक त्यौहार न मानते हुए उसे एक महापर्व बताया जो संस्कृति, इतिहास, धर्म और समाज को जोड़ता है।
🕉️ “पर्व हमें जोड़ते हैं – कभी संस्कृति से, कभी इतिहास से, तो कभी संवेदनाओं से। राखी भले ही रेशमी धागा हो, लेकिन इसमें जुड़ी भावना उसे मजबूत बनाती है।”
मुनि श्री ने कहा कि यह पर्व भाई-बहन के स्नेह, वात्सल्य और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इस दिन गौशालाओं में गौग्रास दान देना चाहिए, जिससे रक्षाबंधन का पर्व सर्वप्राणी कल्याण का संदेश भी दे सके।



