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छपारा नगर के यात्री प्रतीक्षालय में रह रही विकलांग महिला

अपनो ने निकाला घर से एक माह से अनाथों जैसा जीवन जी रही

छपारा यशो:- प्रत्येक मां-बाप अपनी संतान के लिए अपना सुख त्याग कर उनको अच्छी से अच्छी शिक्षा दीक्षा के साथ एक बेहतर परवरिश देते हैं और यह मानकर चलते हैं कि थी उनके बुढ़ापे की लाठी बनेंगे किंतु इस वर्तमान समय में लोग इतना स्वार्थी हो गए की उन्हें सिर्फ अपनी बीबी बच्चे तक सीमित होकर रह गए हैं।
इसी तरह का मामला एक बार फिर देखने में आया जिसमे जब पति के स्वर्गवासी होते ही बेटो ने सौतेली मां को घर निकाल दिया और वह वर्तमान में दर दर की ठोकर खा रही है।जिसने विगत एक माह से छपारा नगर के यात्री प्रतीक्षालय को अपना आश्रय स्थल बनाया है,उक्त बुजुर्ग महिला को आसपास के रहमदिल दुकानदार खाने पीने को दे देते हैं जिससे उनका गुजारा हो रहा हैं,
वही उक्त बुजुर्ग महिला मैना झरिया ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि आदेगांव से महज दो किलोमीटर दूर बसे पुरवा गांव की निवासी है,ग्राम के चैतराम झारिया के साथ उसका दुसरा विवाह हुआ था,साथ ही विगत दस बारह साल से वह साथ रहते थे,चेतराम की पहली पत्नि से तीन पुत्र राधेश्याम,शंकर,मंकट एवं उससे कोई औलाद नही हुयी पीढित महिला जो विकलांग है उसने आगे बताया कि मेरे पति की गत एक साल पहले स्वर्गवास हो गया मेरे मां बाप भी इस दुनिया में नही है, इस बात का फायदा उठाकर सौतेले बेटो ने घर की छत छीन ली और मुझे मारपीट कर घर से निकाल दिया। पीढित महिला इतनी घबराई हुयी है की उस गांव मे जाने से भी उसे डर लग रहा है,साथ ही उसने पुरवा ग्राम के सरपंच सचिव से निवेदन किया कि था की मुझे वृध्दाआश्रम भेज दो लेकिन उन्होने भी इस बुजुर्ग महिला की नही सुनी। कई दिनो से भूख़ी प्यासी छपारा बस स्टेण्ड प्रतिक्षालय मे खुले मै रह रही हूं एक दो लोग मुझे रोज पोहा खिला देते है मेरे पास न तो पहने के कपडे है और न ओढऩे बिछाने के कपड़े, खड्डा मे सोना हो रहा हैं। उक्त पीडि़त विकलांग महिला ने शासन प्रशासन से गुहार लगाई है कि उसे वृध्दाआश्रम भेज दिया जाए जहा उसको सर पर छत और दो वक्त का भोजन मिलने लगेगा।

Dainikyashonnati

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