विद्यार्थियों के भविष्य के प्रति सरकार और शिक्षा विभाग गंभीर नहीं
सिवनी यशो:- मध्यप्रदेश की बोर्ड परीक्षाओं के परीक्षा परिणाम २०२४ घोषित हो चुके है । सभी बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम बहुत अधिक उत्साहजनक नहीं है, परंतु परीक्षार्थियों के लिये यह बहुत अधिक चिंता का विषय भी नहीं होना चाहिये और माता पिता को भी परीक्षा परिणामों को लेकर बहुत निराश होने की आवश्यता नहीं है परीक्षा परिणाम कम आने के अनेक कारण है और जो कारण है उनकी पुनावृत्ति न हो यदि इस बात पर ध्यान दिया जाये तो आने वाले समय में फेल विद्यार्थियों के लिये आज जो निराशाजनक परिणाम आये है वह उनके लिये वरदान बन सकते है । परीक्षा के परिणाम को लेकर उत्साह और चिंता की मिली जुली भावना को काफी सामान्य माना जाता है। हालांकि यह गंभीर तनाव का रूप न ले ले, छात्रों और माता-पिता दोनों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। परीक्षा परिणाण को सिर्फ परिणाम की तरह ही देखें, इससे सीख लेते हुए आगे की तैयारी करें। अगर आपके परिणाम इच्छानुरूप नहीं आए हैं तो इसपर चिंता करने से बेहतर है कि आप आगे इससे सीख लेते हुए और मेहनत के साथ पढ़ाई शुरू कर दें। आइए ऐसे कुछ उपायों के बारे में जानते हैं जिनका सभी छात्रों को जरूर ध्यान रखना चाहिए। हालांकि परीक्षा परिणाम को लेकर सरकार और विभाग को आवश्यक सुधारों के प्रति गंभीर होना चाहिये केवल परिणाम आने के बाद हाय तौबा मचाने की पुनरावृत्ति ठीक नहीं है । लंबे समय से परीक्षा परिणाम निराशाजनक ही है जबकि शिक्षा के क्षेत्र में सरकार क्रांतिकारी बदलाव के दावे करती है परंतु आश्चर्य तब होता है जब सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का आभाव दिखाई दिखाई देता है और परीक्षा परिणाम छात्र छात्राओं को मायूस करते है । अनेक प्राथमिक स्कूल ही बुरी दुर्दशा के शिकार है, जबकि प्राथमिक शिक्षा ही विद्यार्थी के भविष्य की नींव होती है ।मोबाइल कम दोषी नही है बच्चो का भविष्य चौपट करने में
परीक्षा परिणाम कम आने के अनेक कारण है और शिक्षकीय कार्य में संलग्र शिक्षको से भी इस संबंध में चर्चा की गयी है जिन्होंने बताया कि परीक्षा परिणाम निराशाजनक आने का जो सबसे बड़ा कारण है वह है मोबाईल । छात्र अपने अभिभावको से पढ़ाई में सुविधा के लिये मोबाईल की मांग करते है और अभिभावक लेकर दे देते है कुछ शिक्षक भी मोबाईल से पढाई करने के लिये विद्यार्थियों को प्रेरित करते है परंतु मोबाईल में इतना भटकाव होता है कि विद्यार्थी स्वयं कंफ्युज हो जाता है और यही मोबाईल कुछ समय बाद पढ़ाई से विमुख कर मनोरंजक गेम, और कार्यक्रमों में उलझाता है आगे चलकर मोबाईल के मनोरंजक कार्यक्रम विद्यार्थी को मानसिक गुलाम बना लेते है और पढाई से रूचि कम कर हो जाती है । छात्रों को यदि बहुत सफल विद्यार्थी बनना है और अपने निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति करना है तो मोबाईल और टी व्ही से दूरी बना लें।
शिक्षक और शिक्षा विभाग की लापवाही
मध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश की बोर्ड परीक्षाओं का 2024 का परीक्षा परिणाम कम आने का एक कारण यह भी है कि इस वर्ष का सत्र काफी कम दिनों का रहा है और शिक्षक शिक्षण कार्य के प्रति गंभीर नहीं रहे । शिक्षा के नाम पर सरकार जितना अधिक धन खर्च कर रही है उसकी मानीटरिंग उतनी ही अधिक कमजोर है । शिक्षण संस्थानों से शिक्ष्क गायब रहते है और यह बात जिला कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारी की टीम भी शिक्षण सत्र के दौरान देख चुकी है । शिक्षक विद्यालय से गोल रहते है तो कोई शराब के नशे में पहुँचते है तो कुछ विद्यालय में केवल उपस्थिती दे रहे है । शिक्षा विभाग को मासिक, त्रमासिक और अद्र्धवार्षिक परीक्षा परिणामों की समीक्षा कर सुधार के लिये निर्देश जारी करना चाहिये ।