जिला जेल की सुरक्षा में बड़ी चूक! दीवार फांदकर फरार हुए तीन विचाराधीन बंदी, जेल प्रशासन की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
सिवनी | 15 जनवरी 2026
सिवनी यशो:- जिला जेल सिवनी की सुरक्षा व्यवस्था उस समय कटघरे में आ गई, जब बुधवार शाम लगभग 6:30 बजे तीन विचाराधीन बंदी जेल की दीवार फांदकर फरार हो गए। यह घटना उस वक्त हुई, जब जेल में लॉक-अप की प्रक्रिया चल रही थी। हालांकि पुलिस ने बाद में तीनों बंदियों को पकड़कर दोबारा जेल भेज दिया, लेकिन इस पूरी घटना ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कंधों का सहारा, दीवार पार — सुरक्षा कहां थी?
प्राप्त जानकारी के अनुसार लॉक-अप के समय एक अन्य बंदी की आमद के कारण प्रक्रिया में देरी हुई। इसी दौरान तीनों बंदियों ने पेशाब जाने का बहाना बनाकर बाहर निकलने की अनुमति ली और एक-दूसरे के कंधों का सहारा लेकर जेल की दीवार फांदकर फरार हो गए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
- लॉक-अप जैसे संवेदनशील समय में निगरानी क्यों कमजोर थी?
- क्या जेल स्टाफ की मौजूदगी पर्याप्त थी?
रातभर गांव में छिपे, परिजनों की मदद से पकड़े गए
फरार होने के बाद तीनों बंदी रातभर गांव में छिपे रहे। जब पुलिस व जेल प्रशासन ने उनके परिजनों से संपर्क किया और स्थिति स्पष्ट की, तब परिजनों की मदद से तीनों को पकड़ लिया गया।
गुरुवार को तीनों बंदियों को पुनः जिला जेल में दाखिल कराया गया।
इन मामलों में हैं आरोपी
- विशाल पिता ब्रह्मानंद
(अपराध क्रमांक 333/25, थाना कुरई) - अंकित पिता श्रीपाल श्रीवास
(अपराध क्रमांक 594/25, थाना लखनवाड़ा) - विजय पिता छिद्दीलाल
(अपराध क्रमांक 594/25, थाना लखनवाड़ा)
फरारी के मामले में विधि सम्मत एफआईआर दर्ज कर थाना डूंडासिवनी में अपराध कायम किया गया है।
“स्थिति नियंत्रण में”, लेकिन जवाबदेही कौन तय करेगा?
जेल प्रशासन का कहना है कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है और नियमानुसार कार्रवाई जारी है।
लेकिन यह सवाल अनुत्तरित हैं—
- यदि परिजन सहयोग नहीं करते तो क्या बंदी पकड़े जाते?
- क्या जेल की दीवारें और निगरानी तंत्र सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं?
- इस चूक की जिम्मेदारी किसकी तय होगी?



