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विधान सभा उद्बोधन, सत्ता के गलियारों में गुंजायमान हुई संतों की दिव्य अमृतमय वाणी

पद ग्रहण करते ही खुले में लगने वाली मांस मदिरा की दुकानों को प्रतिबंधित किया – सी.एम.डॉक्टर यादव

Seoni 10 February 2025
सिवनी यशो :- एक सिद्धांत के अनुसार धर्म में राजनीति का प्रवेश हो जाए तो वह धर्म बगुला भक्ति में परिवर्तित हो पाखंडमय हो जाता है किंतु इसके विपरीत यदि राजनीति धर्मनीतियों का अनुशरण करते हुए कार्य योजनाओं का पल्लवन करे तो निश्चित रूप से राष्ट्र में एक सशक्त सुशासन की स्थापना होती है।
धर्म मय राजनीति का सुंदर परिदृश्य विगत में मध्यप्रदेश विधानसभा भोपाल में देखने को मिला जब इस युग के धर्म एवं संतत्व के प्रतीक महाश्रमण संत शिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रथम समाधि पुण्य स्मरण दिवस पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा विधान सभा भवन भोपाल में आचार्य श्री को समर्पित विशेष गुणानुवाद सभा का आयोजन पूज्य आचार्य श्री के प्रियाग्र प्रभावक शिष्य मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज एवं पूज्य आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के प्रभावक सुशिष्य मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज के सानिध्य में किया गया। इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ने आचार्य श्री के प्रति विनयांजलि देशना में कहा कि भारतीय संस्कृति में तमसो मा ज्योतिर्गमय अर्थात अंधकार की नही प्रकाश की उपासना की जाती रही है। समय समय पर इस धरा पर भगवान ऋषभ देव, राम,श्रीकृष्ण,महावीर जैसी अनेक विभूतियां हुई जिन्होंने अपने व्यक्तित्व की दिव्य आभा से इस धरा को आलोकित किया ऐसे ही ज्योति पुंज आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज हुए जिनका प्रथम समाधि पुण्य स्मृति दिवस हम सभी यहां मना रहे है लोग कहते है उन्हे गए 1वर्ष गुजर गया किंतु में कहता हूं वे दिव्य ज्योति पुंज थे दिव्य ज्योति में ही विलीन हो गए उस ज्योति की आभा युग युगांतर तक शाश्वत रहेगी।वर्तमान युग पुण्य शालियों का युग है क्योंकि इस युग में आचार्य श्री जैसे महान व्यक्तित्व का जन्म हुआ था।

भारत में विभिन्न परंपराओं में अनेक बड़े ऋषि मुनि आचार्य एवं मनीषी हुए प्राय: सभी ने अपनी अपनी परंपराओं को ही आगे बढ़ाया किंतु आचार्य श्री ने लीग से हटकर एक नई लीग बनाई उन्होंने अपनी चर्या एवं नियमों पर दृढ़ रहते हुए आत्म हित के साथ लोक हित व राष्ट्र हित का कार्य किया।
गृह मंत्री अमित शाह कुंडलपुर में आचार्य श्री से लगभग 28 मिनिट की गहन चर्चा कर बाद अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने अपने भाषण में
बताया कि उन्होंने पूरी चर्चा के दौरान मात्र भारत,भारतीय,भारतीयता एवं भारतीय संस्कृति की ही
वार्ता की। इसके अलावा समाज,धर्म,तीर्थ या संघ कोई भी वार्ता उनके मुख से नही निकली।
प्रधानमंत्री मोदी भी उनके राष्ट्र के प्रति समर्पण भावों से
प्रभावित रहे।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन जी ने भी कुर्सी संभालते ही जीव दया शाकाहार के क्षेत्र में बहुत से प्रशंसनीय कार्य किए अभी बता रहे थे कि पूरे राज्य में 28 करोड़ गौ वंश को संरक्षित संवर्धित कर पूरे प्रदेश को गोकुल बनाने की बड़ी सुंदर योजना का क्रियान्वयन किया जाना है। निश्चित रूप से आचार्य श्री की प्रेरणा व आशीर्वाद उनके साथ है।
पूज्य मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज ने आचार्य श्री के प्रति अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा आज हम सभी के बीच में आचार्य भगवन नहीं है और ये बात निश्चित है कि हम सभी भी नहीं रहेंगे तो ये दुनिया है व्यक्ति तो आयेंगे जाएंगे किन्तु जिसका व्यक्तित्व महान है वहीं यहां शाश्वत रह पाएगा। एक व्यक्ति के रूप में वे नहीं है किंतु उनके व्यक्तित्व की सुगंध भारत के बच्चे बच्चे में है। उनकाजीव दया के प्रति अपनत्व का भाव चाहे जबलपुर दयोदय हो या बीनावारा की गौशाला हो हर प्राणी की दुआ उनके साथ हमेशा रही है। भारत को उन्होंने संदेश दिया कि आधुनिकता से हटकर आध्यात्मिकता के प्रेरक आचार्य श्री की गुरू के प्रति भक्ति अद्भुत थी एक चित्र वे कैसे ग्रीष्मकाल की तेज धूप में उस ताप को स्वयं सहन कर अपने वृद्ध गुरू को उस ताप से बचा रहे है।मुनि अवस्था में मुझे अपने गुरू के साथ रामटेक में उनके दर्शन करने का सौभाग्य मिला उस समय उन्होंने 20 मिनट पांच महाव्रतों पर बड़ा सुंदर उद्बोधन हम सभी को प्रदान किया था।

इस अवसर पर पूर्व मुख्य मंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि मेरा सौभाग्य रहा कि मुझे अनेक बार आचार्य श्री के चरणों के समीप बैठकर उनके आशीर्वाद के साथ उनके विचारों को सुनने का अवसर मिला।महात्मा गांधी के बाद आचार्य श्री ने जो समूचे देश में अपना स्थान बनाया उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में विशेष बालिकाओं का शिक्षण व रोजगार के क्षेत्र में जो कार्य किया वह अद्भुत है। उनके हथकरघे का प्रकल्प जिसके माध्यम से लाखों लोगों को रोजगार मिला और इसका श्रेय मात्र आचार्य श्री को ही जाता है। प्रेरणा स्वरूप उन्होंने कहा कि यदि आप आचार्य श्री के भक्त है तो हथकरघा शुद्ध के वस्त्रों का ही उपयोग करे। मैं स्वयं सदा से खादी का उपयोग करता रहा हूं।
मुख्यमंत्री यादव ने इस अवसर पर आचार्य श्री का गुणानुवाद करते हुऐ कहा कि इसी विधानसभा में पूर्व में भी उनके अलौकिक स्वरूप के दर्शनों का सौभाग्य मिला था ऐसा लग रहा था जैसे कोई साक्षात धरती के देवता हमारे बीच पधारे है। उनका जन्म भले ही कर्नाटक में हुआ किंतु उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि हम मध्यप्रदेश वासियों को ऐसा लगता है कि वे हमारे राज्य के ही है और हर स्थान वालों की यही स्थिति है कि आचार्य श्री हमारे ही है।

उन्होंने गौ सेवा, गौ संवर्धन पर जोर देते हुए मांस निर्यात विरोध अभियान के साथ दयोदय जीव रक्षा संस्थान गोशालाओ को संचालित करने की प्रेरणा प्रदान की फलस्वरूप आज जैन समाज की ओर से पूरे देश में सैकड़ों गौशालाए संचालित हो रही है। सी एम पद ग्रहण करने के बाद मैने सबसे बड़ा निर्णय लिया और खुले में लगने वाली मांस मदिरा की दुकानों पर प्रतिबंध लगाया एवं अभी प्रदेश के 17 धार्मिक स्थलों पर शराब बंदी का नियम बनाया। अतिथि शब्द की अनोखी व्याख्या कर मुनि श्री प्रमाणसागर जी के प्रति भक्ति प्रगट करते हुए उन्होंने कहा कि अतिथि वह नही जो बिना तिथि के आ जाए अपितु अतिथि तो वह है जिसके आने से तिथि धन्य हो जाए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने पूज्य मुनि श्री के पाद प्रक्षाल कर उनका आशीर्वाद ग्रहण कर आचार्य श्री का चित्र अनावरण दीप प्रज्जवलन किया साथ ही साथ आचार्य श्री के साहित्यों का विमोचन एवं भोपाल में आचार्य श्री का भव्य स्मारक निर्माण एवं उनकी पुण्य तिथि को लोक संत आचार्य विद्यासागर स्मृति दिवस के रूप मे प्रति वर्ष प्रदेश में मनाए जाने की घोषणा की। उक्त घोषणाएं होते ही पूरा सदन तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा।

आयोजन के संयोजक सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि उनके जाने के बाद मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मेरे सर से कोई बहुत बड़ा साया उठ गया। मैने इस धरती पर अनेक साधु संत मुनि तपस्वी देखे किंतु आचार्य श्री से बड़ा साधक आज तक नही देखा। आज में जिस मुकाम में हूं उनका ही आशीर्वाद है।
मध्यप्रदेश के 35 वे मुख्य सचिव अनुराग जैन, आई.ए .एस. ने बताया कि यों तो दर्जनों बार मुझे मध्यप्रदेश के अनेक स्थानों पर आचार्य श्री के दर्शन एवं चर्चा करने का अवसर मिला किंतु एक बार जबलपुर में मैने लंबी कतार में लगकर सामायिक काल में उनकी अलौकिक सौम्य ध्यान मुद्रा के दर्शन किए वह दिव्य स्वरूप आज भी स्मृतियों में है तीर्थंकर तुल्य आचार्य श्री निश्चित रूप से जो उनमें देखा वह अब तक कही देखने को नहीं मिला।

राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि मुनि प्रमाण सागर जी को मैं उनके साहित्य एवं भावना योग के कारण सदा स्मृतियों में रखता हूं। जैन दर्शन के प्रति शुरू से ही मेरा आकर्षण रहा है जैन दर्शन हिंसा आतंकवाद का विलोम है। हम सौभाग्यशाली है अपनी आने वाली पीढिय़ों को बता सकते है कि हमे आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का दर्शन,स्नेह,सानिध्य सब कुछ मिला।परिग्रह प्राय: पवित्रता का क्षरण कर देता है और यहां आचार्य श्री जिन्होंने सब कुछ त्याग कर जैसे सभी को अपना बना लिया था।ऐसे ही पवित्र व्यक्तिव पर ही ईश्वर की आभा प्रविष्ट होती है।
अंत में सकल जैन समाज की ओर से पत्रकार रविंद जैन द्वारा सुंदर आयोजन के लिए मध्यप्रदेश शासन के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

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