महाराजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह का शहादत दिवस ग्राम चिकला में मनाया जाएगा
अखिल भारतीय आदिवासी महासभा ने की अपील – शोषण व अन्याय के खिलाफ संघर्ष की विरासत को जन-जन तक पहुँचाएँ
तथ्यात्मक पृष्ठभूमि
महाराजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह
- शंकर शाह गोंडवाना साम्राज्य की जबलपुर शाखा के उत्तराधिकारी थे।
- उन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी और किसानों को अंग्रेजों के विरुद्ध संगठित किया।
- अंग्रेजों ने प्रत्यक्ष सबूत न मिलने पर एक देशभक्ति कविता को आधार बनाकर उन्हें दोषी ठहराया।
- 18 सितंबर 1857 को जबलपुर (एल्गिन हॉस्पिटल के पास) में पिता-पुत्र को तोप के मुँह में बाँधकर शहीद कर दिया गया।
- इस बलिदान ने गोंडवाना व मध्यभारत क्षेत्र में स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला और तेज कर दी।
Seoni 04 September 2025
सिवनी यशो:-अखिल भारतीय आदिवासी महासभा सिवनी द्वारा आगामी 18 सितंबर को ग्राम चिकला (निवारी) में गोंडवाना साम्राज्य के अंतिम शासक महाराजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह का शहादत दिवस मनाया जाएगा।
ज्ञात हो कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, अंग्रेजों ने उन्हें षड्यंत्रपूर्वक गिरफ्तार किया था।
एल्गिन हॉस्पिटल के पास उन्हें तोप के मुंह में बाँधकर सार्वजनिक रूप से उड़ा दिया गया था।
यह अमानवीय कृत्य केवल इसलिए किया गया, क्योंकि शंकर शाह और उनके पुत्र रघुनाथ शाह अंग्रेजों के अत्याचार, शोषण और दमन के खिलाफ नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहे थे।
अंग्रेजो ने एक कविता के आधार पर दोषी माना था राजा शंकर शाह को
इतिहास में दर्ज है कि अंग्रेजों को उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला, केवल एक कविता के आधार पर उन्हें दोषी ठहराया गया।
इस कविता में उन्होंने अपने आराध्य देवी से दुश्मनों का अंत करने की प्रार्थना की थी। इसी को आधार बनाकर अंग्रेजों ने पिता-पुत्र को क्रूरतापूर्वक शहीद कर दिया।
शहादत दिवस के आयोजन की तैयारी को लेकर कामरेड डी.डी. वासनिक (प्रांतीय उपाध्यक्ष,
अखिल भारतीय आदिवासी महासभा मध्यप्रदेश) के निवास पर बैठक हुई।
इसमें कामरेड ओमप्रकाश बोर्ड (जिला सचिव, भाकपा),
डॉ. बी.सी. ओके, किरण प्रकाश शेर, सनोडिया, गेंदालाल भलावी, महेश कुमार सनोडिया, संतोष सैयाम सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
बैठक में सर्वसम्मति से अपील की गई कि –
आदिवासी समुदाय और आम जनता अधिक से अधिक संख्या में ग्राम चिकला पहुँचकर शहादत दिवस पर उपस्थित हों, शहीदों को नमन करें और साथ ही आज की समस्याओं—
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जनता पर हो रहे शोषण,
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खाद-बीज-दवाई की कमी,
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वन्यजीव (बाघ) के आतंक—
के समाधान के लिए आवाज बुलंद करें।



