“नर्मदा सायकिल – आँन : परिक्रमा के पदचिन्हों पर…”
सायक्लोन सिवनी के प्रेरक कपिल पांडे ने सायकल से की माँ नर्मदा परिक्रमा: एक अनुकरणीय यात्रा की शुरुआत
Seoni 18 June 2025
सिवनी यशो :-“नर्मदे हर…” के साथ शुरू हुई यह यात्रा केवल तीर्थ नहीं, बल्कि एक नव-चेतना है — जो नर्मदा तट की पवित्रता, तप और त्याग से उपजी है। सिवनी जिले के पर्यावरण व फिटनेस के लिए समर्पित अभियान “सायक्लोन सिवनी” के युवा प्रेरक कपिल पांडे ने सायकल से माँ नर्मदा परिक्रमा पूरी कर एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है।
अब उनके इस अनुभव पर आधारित एक विशेष संस्मरणात्मक समाचार श्रृंखला का शुभारंभ दैनिक यशोन्नति के माध्यम से किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य केवल वर्णन नहीं, बल्कि प्रेरणा देना और अनुकरणीय मार्ग प्रशस्त करना है।
🚴♂️ परिक्रमा + पर्यावरण + प्रेरणा = सायक्लिंग से तप
करीब 3700 किलोमीटर की परिक्रमा को पैदल चलने के स्थान पर सायकल से तय करना कोई सामान्य कार्य नहीं। यह निर्णय केवल यात्रा की तीव्रता नहीं, बल्कि पर्यावरणीय जागरूकता, आत्म-अनुशासन और तीर्थ श्रद्धा का प्रतीक बन गया।
परिक्रमा के दौरान कपिल पांडे ने तीन राज्यों – मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात – से होते हुए प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृश्यों का न केवल अनुभव किया, बल्कि हर पड़ाव पर एक विचारशील श्रद्धालु और अनुशासित यात्री के रूप में स्वयं को सिद्ध किया।
🌿 श्रृंखला का उद्देश्य: सिर्फ यात्रा नहीं, जीवन का दर्शन
इस विशेष श्रंखला में कपिल पांडे के अनुभवों से पाठक जानेंगे:
परिक्रमा की परंपरा और उसका गूढ़ अर्थ
मार्ग की कठिनाइयाँ और आत्मिक लाभ
नर्मदा तट के प्रमुख तीर्थस्थलों की महिमा
तैयारी, नियम, संयम और सेवा का भाव
स्थानीय जनजातियों, संतों और आश्रमों से हुए संवाद
पर्यावरण के प्रति जागरूकता और कर्तव्यबोध
📸 पहला लेख: नर्मदा परिक्रमा क्या है, और यह यात्रा क्यों की?
श्रृंखला के प्रथम अंक में कपिल पांडे ने अपने शब्दों में बताया है कि—
“यह यात्रा सिर्फ शरीर से नहीं, हृदय और आत्मा से की जाती है। सायकल के हर पैडल में मैंने माँ नर्मदा की अनुभूति की। यह कोई दिखावे का अभियान नहीं, एक आंतरिक संकल्प था – माँ के तटों से जुड़ने का, प्रकृति से जुड़ने का और स्वयं से जुड़ने का।”



