क्लैरिस हॉस्पिटल ने रचा अद्भुत कीर्तिमान: एंडोस्कोपी से 8 वर्षीय बच्चे के पेट से निकाली नुकीली कील
जटिल केस में बिना सर्जरी किया सफल उपचार, डॉक्टर मनन गोगिया की कुशलता से टला बड़ा खतरा
एंडोस्कोपी से पेट से कील निकाली – 8 वर्षीय बच्चे को जीवनदान
Chhindwara 19 April 2026
छिंदवाड़ा यशो:- छिंदवाड़ा स्थित क्लैरिस हॉस्पिटल में एक बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण मेडिकल केस का सफलतापूर्वक उपचार कर चिकित्सा क्षेत्र में नई मिसाल पेश की गई है।
यह मामला उमरेठ निवासी 8 वर्षीय दर्शील सोनी का है, जिसने गलती से लोहे की नुकीली कील निगल ली थी। घटना के बाद परिजन घबराए हुए अवस्था में बच्चे को तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. मनन गोगिया ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत जांच प्रारंभ की।

पेट में खतरनाक स्थिति में फंसी थी कील
जांच में सामने आया कि कील बच्चे के पेट में ऐसी स्थिति में फंसी हुई थी, जिससे आंतरिक चोट और गंभीर जटिलताओं का खतरा बना हुआ था। आमतौर पर ऐसे मामलों में ओपन सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है, जो जोखिम भरी और समय लेने वाली प्रक्रिया होती है।
एंडोस्कोपी से बिना सर्जरी सफल उपचार
इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में डॉक्टरों ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए एंडोस्कोपी (दूरबीन पद्धति) के माध्यम से कील को बाहर निकालने का निर्णय लिया।
डॉ. मनन गोगिया ने अत्यंत सावधानी और उच्च कौशल का परिचय देते हुए एंडोस्कोपी से पेट से कील निकाली इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह कार्य बेहद जोखिम भरा था, क्योंकि जरा सी चूक से गंभीर नुकसान हो सकता था।
पूरी तरह स्वस्थ हुआ बच्चा
सफल प्रक्रिया के बाद बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो गया और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। परिजनों ने डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त किया।
चिकित्सा क्षेत्र में बनी मिसाल
एंडोस्कोपी से पेट से कील निकाली यह सफलता क्लैरिस हॉस्पिटल की आधुनिक सुविधाओं और चिकित्सकों की विशेषज्ञता का प्रमाण है। इस उपलब्धि ने यह सिद्ध कर दिया है कि सही तकनीक और अनुभव से जटिल मामलों का भी सुरक्षित समाधान संभव है।





