“मीडिया लोकतंत्र का आईना है, उसका अपमान जनता के अधिकारों का अपमान है। भाजपा सरकार सत्ता के नशे में चूर होकर सच से सवाल करने वालों को दबाना चाहती है।”विदित हो कि हाल ही में इंदौर में जहरीला पानी पीने से 15 निर्दोष लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस गंभीर घटना पर जब एक मीडियाकर्मी ने नगरीय प्रशासन मंत्री से सवाल किया, तो मंत्री ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय अशोभनीय, अपमानजनक और अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया। यह बयान न केवल मीडिया के सम्मान पर हमला है, बल्कि भाजपा के अहंकारी और संवेदनहीन चरित्र को भी उजागर करता है।
“भाजपा की पहचान—लूटो, खाओ, भ्रष्टाचार मचाओ”
प्रदर्शन के दौरान युवक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “मंत्री हटाओ–सभ्यता बचाओ”, “मंत्री हटाओ–जनता को बचाओ” और “भाजपा की एक पहचान—लूटो, खाओ, भ्रष्टाचार मचाओ” जैसे गगनभेदी नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सत्ता में बैठे मंत्री यदि आम जनता की मौत पर भी संवेदना नहीं दिखा सकते, तो उन्हें नैतिक अधिकार नहीं है कि वे मंत्री पद पर बने रहें।“जब शराब में मिलावट होती है तो पंचायत से संसद तक हंगामा होता है, लेकिन जब जनता के पीने के पानी में जहर घुलता है, तब मंत्री बेशर्मी से मीडिया को जवाब देते हैं।”युवक कांग्रेस जिला अध्यक्ष गोलू पटेल ने कहा कि भाजपा सरकार के वरिष्ठ मंत्री जनता की जान की जिम्मेदारी लेने के बजाय मीडिया को अपमानित कर रहे हैं। यह न केवल असंवेदनशीलता है, बल्कि लोकतंत्र के मूल्यों पर सीधा हमला है। भाजपा को नैतिकता के आधार पर कैलाश विजयवर्गीय को तुरंत मंत्री पद से हटाना चाहिए, ताकि सत्ता के नशे में चूर अन्य नेताओं को भी सबक मिले।
मीडिया का अपमान लोकतंत्र का अपमान
युवक कांग्रेस नेताओं ने कहा कि - मीडिया समाज का दर्पण है। किसी भी पत्रकार का अपमान पूरे लोकतंत्र का अपमान है। भाजपा का यह अहंकार ज्यादा दिन टिकने वाला नहीं है। जिस प्रकार रावण का अभिमान समाप्त हुआ, उसी प्रकार सत्ता का घमंड भी टूटेगा।प्रमुख रूप से उपस्थित
- गोलू तिवारी
- एकलव्य यहके
- इरफान खान
- उमेश चौहान
- सर्वेंद्र पटेल
- रजत पटेल
- चतरू पटेल
- मोहित रघुवंशी
- विशेष पटेल
- जगदंबा वर्मा
- सुबोध पटेल
- नावेद खान
- चंचलेश सूर्यवंशी
- अंकित सूर्यवंशी
- सचिन रघुवंशी
- प्रशांत रघुवंशी
- कुलदीप बिजौलिया
- ईश्वर टेकरे
- हर्षित सूर्यवंशी
- मनोज वर्मा
- यश मालवीय
- प्रियांशु मालवी
- अंशुल साहू
- आशीष तागड़े
- सौरभ बंदेवार
- पुलकित