Seoni 10 September 2025
सिवनी यशो:- श्री पारसनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, सिवनी (मध्यप्रदेश) में 10 सितंबर 2025 को सोलह कारण विधान समापन के अंतर्गत दिव्य मांगलिक क्रियाओं का आयोजन हुआ।
यह आयोजन महासमाधि धारक परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित, परम पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती
मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज एवं मुनि श्री भावसागर जी महाराज के सानिध्य तथा ब्रह्मचारी मनोज भैया जी जबलपुर के निर्देशन में संपन्न हुआ।
संपन्न हुई धार्मिक क्रियाएं
सुबह प्रातः बेला में अभिषेक, शांति धारा, पूजन एवं सोलह कारण विधान की विधिवत क्रियाएं सम्पन्न की गईं।
विशेष आकर्षण रहा हवन व विश्व शांति महायज्ञ।
इस दौरान श्रद्धालुओं ने श्रीफल अर्पण और शास्त्र अर्पण कर धर्मलाभ लिया।
श्रीमती सुमन थानीसाव परिवार को शास्त्र अर्पण का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज का प्रवचन
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज ने भक्ति की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा –
“भक्ति एक सकारात्मक विचारधारा है, जिसमें हम स्वयं के लिए कुछ नहीं बचाते, सब कुछ न्यौछावर कर देते हैं। यह परमात्मा तक पहुँचने का सबसे सरल मार्ग है।”
मुनि श्री भावसागर जी महाराज का संदेश
मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा –“प्रार्थना जीवन का ताकतवर टॉनिक और विटामिन है। यह मनुष्य की कमजोरी को दूर कर शक्ति और सकारात्मकता देती है। परमात्मा तक पहुँचने का मार्ग कठिन नहीं है, बल्कि भक्ति का सरल और विलक्षण साधन है।
“उन्होंने आगे कहा – “भगवान की पूजा, अभिषेक, आरती और ध्यान – ये भक्ति के विविध रूप हैं। भक्ति के दौरान शरीर में ऐसे रसायन बनते हैं जो मन को सदा प्रसन्न रखते हैं। अतः प्रत्येक व्यक्ति को भक्ति के लिए समय अवश्य निकालना चाहिए।
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