र्किंग और सुविधाओं का संकनिजी अस्पतालों की मनमानी, पाट
नगर की सभी दिशाओं में 100, 100 बेड के सरकारी अस्पताल खोलने की आवश्यकता
सरकारी सुविधाओं के बावजूद निजी अस्पतालों की भरमार
गोविन्द चौरसिया
Chhindwara 27 July 2025
छिंदवाड़ा यशो :- जिले में जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान होने के बावजूद निजी अस्पतालों की संख्या नगर में तेज़ी से बढ़ रही है।
ये अस्पताल मुख्य सड़कों और गलियों में खुले हैं, जहां पार्किंग की कोई सुविधा नहीं है। इससे मरीजों के साथ आए परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है और यातायात भी बाधित होता है।
सहायकों के लिए नहीं है वेटिंग हॉल या विश्राम की व्यवस्था
अक्सर देखा गया है कि मरीजों के साथ आने वाले परिजन अस्पताल की सीढ़ियों, गलियारों या खुले स्थानों में बैठे दिखाई देते हैं।
किसी भी निजी अस्पताल में उनके ठहरने या रात बिताने की कोई उचित व्यवस्था नहीं है।
यह स्थिति न केवल अमानवीय है, बल्कि चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
प्रशासन की अनदेखी, रसूखदारों को मिल रहा संरक्षण
निजी अस्पतालों के संचालक अधिकतर प्रभावशाली एवं रसूखदार हैं, जिनका राजनीतिक संरक्षण भी होता है।
यही कारण है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इनके विरुद्ध कोई सख्त कदम नहीं उठाते।
यदि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी माह में एक बार भी निरीक्षण करें, तो कई खामियाँ उजागर हो सकती हैं।
सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर सवाल
शहर के लगभग सभी सरकारी डॉक्टरों ने निजी क्लीनिक खोल रखे हैं और कुछ डॉक्टर निजी अस्पतालों में विजिट भी करते हैं।
इससे सरकारी अस्पताल में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। यह प्रवृत्ति सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को कमजोर कर रही है।
सभी दिशाओं में सौ-सौ बेड के अस्पताल खोलने की माँग
बढ़ती जनसंख्या और निजी अस्पतालों पर निर्भरता को देखते हुए सिवनी नगर की चारों दिशाओं – परासिया रोड, नागपुर रोड, खजरी रोड और सिवनी रोड पर 100-100 बेड के नए सरकारी अस्पताल खोलने की आवश्यकता है।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों का दबाव शहर के एकमात्र अस्पताल पर नहीं पड़ेगा और चिकित्सा व्यवस्था विकेन्द्रित हो सकेगी।
जनप्रतिनिधियों को चाहिए ठोस पहल
क्षेत्रीय सांसद विवेक बंटी साहू और विधायकगणों को इस दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए।
चूँकि प्रदेश व केंद्र दोनों जगह भाजपा की सरकार है, इसलिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई जाए तो नगर में कई सरकारी अस्पताल स्वीकृत हो सकते हैं, जिससे आमजन को राहत मिलेगी।
“स्वास्थ्य केवल निजी लाभ का माध्यम नहीं, जनकल्याण की प्राथमिक ज़िम्मेदारी होनी चाहिए।”




